आलू-प्याज-लहसुन का भंडारण: बरसात में फसल को सड़ने से बचाने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय बरसात के मौसम में नमी और सीलन के कारण आलू, प्याज और लहसुन की फसलें जल्दी खराब होने लगती हैं। किसान उचित वेंटिलेशन, समय पर छंटाई और गंधक-कपूर के इस्तेमाल से अपने स्टॉक को सुरक्षित रख सकते हैं। किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसलों जैसे आलू, प्याज और लहसुन को बेहतर बाजार भाव मिलने की आस में अक्सर काफी लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं। हालांकि, बारिश का यह दौर इन कंद वाली फसलों के लिए बेहद कठिन साबित होता है। इस मौसम में हवा में उमस और नमी का स्तर बढ़ने से फसलों में सड़न की दिक्कत पैदा होने लगती है। कई बार महज एक खराब कंद की वजह से धीरे-धीरे पूरा का पूरा स्टॉक बर्बाद हो जाता है, जिससे अन्नदाताओं को भारी वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि मानसून के दिनों में इन खाद्य पदार्थों के रख-रखाव को लेकर खासी सतर्कता बरतनी आवश्यक हो जाती है। भंडारण कक्ष में हवा का संचार भंडारण करने वाले किसानों को सबसे पहले इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए कि जिस कमरे या गोदाम में आलू, प्याज और लहसुन का जखीरा रखा गया है, वहां ताजी हवा का आवागमन लगातार बना रहना चाहिए। गोदाम में रखे कंदों को समय-समय पर देखना चाहिए और उन्हें ऊपर-नीचे या उलट-पलट करते रहना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से कंदों के बीच नमी नहीं ठहरती और हर हिस्से तक हवा आसानी से पहुंचती रहती है। यदि किसी भी कंद में हल्की सी भी सड़न या गलन के लक्षण नजर आएं, तो उसे फौरन बाहर निकाल कर फेंक देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि एक संक्रमित कंद अपने पास रखी दूसरी स्वस्थ फसलों को भी बहुत तेजी से संक्रमित कर देता है। सीलन से निपटने के कारगर तरीके कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी और प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बातचीत के दौरान साझा किया कि बरसात के सीजन में इन कंदों के भंडारण के दौरान सबसे विकट समस्या सीलन और नमी की पैदा होती है। इसलिए यह बहुत ज्यादा जरूरी है कि जिस स्थान पर फसलों को सुरक्षित रखा गया है, वहां नमी की मात्रा को न्यूनतम रखा जाए। इसके अलावा भंडारण कक्ष का वेंटिलेशन सिस्टम मजबूत होना चाहिए और समय-समय पर पूरे स्टॉक की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गंधक और कपूर का उपयोग डॉ. कुशवाहा ने आगे जानकारी दी कि फसल रखने वाले कमरे के भीतर गंधक और कपूर की धूनी देना भी काफी फायदेमंद साबित होता है। इस उपाय को अपनाने से गोदाम में पनपने वाले कई प्रकार के हानिकारक कीटाणुओं और जीवाणुओं का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही, आलू, प्याज और लहसुन के स्टॉक पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए और बीच-बीच में निरीक्षण करके सड़े हुए या खराब कंदों को तुरंत बाहर निकालते रहना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न बढ़े। सूखी और हवादार जगह का चुनाव कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी एक भी कंद में सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो गई और उसे सही समय पर अलग नहीं किया गया, तो यह बीमारी बहुत तेजी से पूरे भंडार में फैल सकती है। इसलिए बरसात के इन दिनों में अपनी उपज को हमेशा किसी सूखी और हवादार जगह पर ही स्टोर करें। बीच-बीच में उनकी निगरानी करते रहें और जरूरत के हिसाब से उनकी दिशा बदलते रहें। इन सभी जरूरी सावधानियों का कड़ाई से पालन करके किसान भाई अपने कीमती स्टॉक को सड़ने से बचा सकते हैं और भविष्य में अनुकूल दाम मिलने तक अपनी फसल को पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: देश भर के किसानों को बरसात के दौरान अपनी भंडारित फसलों को सीलन और नमी से बचाने के लिए गोदामों में वेंटिलेशन और नियमित छंटाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। • ग्रामीण क्षेत्रों में: ग्रामीण इलाकों और कृषि भंडारों में रखे आलू, प्याज और लहसुन के स्टॉक को सड़ने से बचाने के लिए गंधक और कपूर की धूनी जैसे पारंपरिक और वैज्ञानिक उपायों को अपनाना फायदेमंद होगा। सवाल-जवाब 1. बरसात के मौसम में आलू, प्याज और लहसुन में क्या समस्या आती है? बरसात के दौरान नमी और सीलन बढ़ने के कारण इन फसलों में गलन और सड़न की समस्या तेजी से फैलने लगती है। 2. स्टॉक को सड़ने से बचाने के लिए सबसे पहली सावधानी क्या है? भंडारण कक्ष में हवा का सही आवागमन होना चाहिए और कंदों को समय-समय पर उलट-पलट करते रहना चाहिए। 3. कीटाणुओं के असर को कम करने के लिए गोदाम में क्या करना चाहिए? भंडारण वाले कमरे में गंधक और कपूर की धूनी करने से वहां मौजूद कीटाणुओं का असर कम करने में मदद मिलती है। 4. खराब कंद मिलने पर क्या कदम उठाना चाहिए? यदि किसी कंद में सड़न दिखाई दे तो उसे तुरंत अलग कर देना चाहिए ताकि वह आसपास की दूसरी फसलों को खराब न करे। https://trendkia.com/business/alu-pyaja-lahasuna-ka-bhndarana-barasata-men-phasala-ko-sarane-se-bachane-ke-lie-apanaen-ye-jaruri-upaya-10947 TrendKia — Har trend, sabse pehle.