आम-लीची को छोड़ किसान अपना रहे बनारसी कागजी नींबू, एक पेड़ से ही हो रही बंपर कमाई बिहार के पूर्वी चंपारण में किसान पारंपरिक फलों के बजाय अब बनारसी कागजी नींबू की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जो सालभर बंपर पैदावार और अधिक मुनाफा दे रहा है। बिहार के पूर्वी चंपारण में खेती के तौर-तरीकों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसान मुख्य रूप से आम और लीची जैसे फलों की बागवानी पर निर्भर थे, वहीं अब फलों की अन्य उन्नत किस्मों की ओर उनका रुझान तेजी से बढ़ रहा है। राज्य में हर साल बागवानी के जरिए अच्छी आय प्राप्त करने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस नए चलन में ‘बनारसी कागजी नींबू’ नाम की किस्म किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई है और चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बनारसी कागजी नींबू की खास विशेषताएं इस नींबू की किस्म की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे पारंपरिक किस्मों से अलग और बेहतर बनाती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस प्रजाति के पौधों में कांटे नहीं होते, जो इसकी देखभाल और फलों को तोड़ने में काफी सुविधा प्रदान करते हैं। आकार में यह नींबू काफी बड़ा और रसीला होता है। इसमें रस की प्रचुर मात्रा होने के कारण बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है। इस नींबू की एक और बड़ी खासियत यह है कि यह गुच्छों में फलता है और साल के बारहों महीने पैदावार देता है, इसीलिए इसे ‘बारहमासी नींबू’ के नाम से भी जाना जाता है। किसान का सफल अनुभव पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया प्रखंड के अमवा गांव निवासी प्रगतिशील किसान विजय यादव ने इस उन्नत किस्म को अपनाया है। उन्होंने बताया कि उन्हें ये बीज जिला कृषि विज्ञान केंद्र से मिले थे, जिन्हें उन्होंने अपने घर के पास लगाया था। एक ही पेड़ ने उन्हें चौंकाने वाली पैदावार दी। विजय यादव ने एक सीजन के भीतर उस एक पेड़ से 2000 से अधिक नींबू तोड़े और मंडी में उन्हें बेचकर मुनाफा कमाया। अब तक महज उस एक पेड़ से वे ₹5000 से अधिक की कमाई कर चुके हैं। मुनाफे की खेती और भविष्य की योजना बनारसी कागजी नींबू का पौधा रोपण के लगभग डेढ़ साल के भीतर फल देने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है। इस पेड़ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी उत्पादकता है, क्योंकि साल में तीन बार अच्छी फसल तोड़ी जा सकती है। इसके फलों का आकार सामान्य नींबू से काफी बड़ा होता है, जो कई बार संतरे के आकार के बराबर पहुंच जाता है। विजय यादव ने इस खेती से होने वाली बंपर कमाई को देखते हुए अब बड़े स्तर पर बागान लगाने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपनी करीब 5 कट्ठा जमीन पर 100 नींबू के पौधे लगाए हैं। उनका मानना है कि जैविक खाद के इस्तेमाल से इस नींबू की गुणवत्ता और पैदावार को और भी बेहतर बनाया जा सकता है। इसका आप पर असर भारत में: किसानों के लिए यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे पारंपरिक फसलों के बजाय नई किस्मों को अपनाकर कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। पूर्वी चंपारण में: स्थानीय किसान अब कम खर्चीली और सालभर फल देने वाली फसलों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। सवाल-जवाब 1. बनारसी कागजी नींबू की क्या खासियत है? यह नींबू कांटे रहित होता है, बड़े आकार का होता है और सालभर गुच्छों में फल देता है। 2. इस नींबू का पौधा कितने समय में फल देने लगता है? रोपण के लगभग डेढ़ साल के भीतर यह पौधा फल देने के लिए तैयार हो जाता है। 3. क्या इस नींबू के पेड़ से साल में एक ही बार फसल मिलती है? नहीं, यह एक बारहमासी किस्म है और सालभर में तीन बार अच्छी फसल दी जा सकती है। 4. विजय यादव ने कितने पौधे लगाए हैं? विजय यादव ने अपनी करीब 5 कट्ठा जमीन में 100 बनारसी कागजी नींबू के पौधे लगाए हैं। प्रेरणा और सबक • नई किस्मों का चयन: पारंपरिक खेती के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुरूप उन्नत किस्मों की खोज करना। • प्रयोग करना: विजय यादव की तरह छोटे स्तर पर बीज का परीक्षण करना और सफल होने पर ही बड़े निवेश का निर्णय लेना। • जैविक खाद का उपयोग: गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने के लिए रसायनों के बजाय जैविक खाद को प्राथमिकता देना। • समय का प्रबंधन: ऐसी फसलों को चुनना जो पूरे साल फल दें, ताकि आय का प्रवाह बना रहे। https://trendkia.com/business/ama-lichi-ko-chhora-kisana-apana-rahe-banarasi-kagzi-ninbu-eka-pera-se-hi-ho-rahi-bnpara-kamai-6376 TrendKia — Har trend, sabse pehle.