# अमरूद की खेती से हर साल 12 लाख की कमाई: गया के किसान शशि रंजन ने बताया सफलता का मंत्र

> बिहार के गया जिले के रहने वाले किसान शशि रंजन सिंह ने 14 एकड़ में अमरूद के बाग लगाकर एक मिसाल कायम की है। वे खेती की आधुनिक तकनीकों और सही देखभाल के जरिए सालाना 12 लाख रुपये कमा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/amaruda-ki-kheti-se-hara-sala-12-lakha-ki-kamai-gaya-ke-kisana-shashi-ranjan-ne-bataya-saphalata-ka-mntra-7017 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमरूद की खेती, कृषि, बिहार, गया, शशि रंजन, बागवानी, किसान, आय

बिहार के गया जिले के खरहरी गांव में रहने वाले शशि रंजन सिंह ने अमरूद की बागवानी में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने करीब 14 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में अमरूद की विभिन्न उन्नत किस्मों के पौधे लगा रखे हैं। अपनी मेहनत और सही तकनीक के बल पर वे आज प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। अमरूद की खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए शशि रंजन सिंह ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिनका पालन कर कोई भी किसान अपनी पैदावार और आय में इजाफा कर सकता है।

## खेत की तैयारी और सफाई का महत्व
शशि रंजन के अनुसार, अमरूद की बागवानी की शुरुआत करने से पहले खेत का चयन करना बेहद जरूरी है। किसानों को ऐसे खेत को प्राथमिकता देनी चाहिए जहां घास और खरपतवार की समस्या कम हो। अमरूद का पौधा अपनी जड़ों और मिट्टी के माध्यम से ऑक्सीजन ग्रहण करता है। यदि खेत में घास अधिक होगी, तो यह पोषक तत्वों और ऑक्सीजन के लिए पौधों से प्रतिस्पर्धा करेगी, जिससे पौधों का विकास धीमा पड़ सकता है। इसे रोकने के लिए नियमित अंतराल पर खेत की निराई-गुड़ाई करना अनिवार्य है, ताकि मिट्टी भुरभुरी बनी रहे और पौधों को पर्याप्त हवा मिल सके। आवश्यकता पड़ने पर खरपतवार नष्ट करने वाले कीटनाशकों का प्रयोग भी किया जा सकता है।

## पौधे लगाने की वैज्ञानिक विधि
अमरूद का पौधा लगाने के लिए शशि रंजन सिंह एक विशेष तरीका अपनाते हैं। सबसे पहले जमीन में लगभग डेढ़ फुट गहरा गड्ढा खोदा जाता है। इस गड्ढे को कम से कम एक सप्ताह के लिए खाली और खुला छोड़ दिया जाता है, ताकि सूरज की रोशनी से मिट्टी के हानिकारक तत्व खत्म हो जाएं। इसके बाद गड्ढे में गोबर की खाद, सरसों की खली, नीम की खली और जरूरी दवाओं का मिश्रण भरकर पौधा रोपा जाता है। यह प्रक्रिया पौधे की शुरुआती वृद्धि के लिए पोषण का आधार तैयार करती है और जड़ों को मजबूती प्रदान करती है।

## उचित पोषण और नियमित सिंचाई
पौधों की स्वस्थ वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से खाद देना आवश्यक है। शशि रंजन गोबर की खाद के साथ-साथ मुर्गी की बीट और सरसों की खली जैसे प्राकृतिक पोषक तत्वों का उपयोग करने की सलाह देते हैं। पौधा रोपने के बाद नियमित सिंचाई भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि जब तक पौधा पूरी तरह से विकसित होकर परिपक्व न हो जाए, तब तक उसे समय-समय पर पर्याप्त पानी देना चाहिए।

## फल लेने का सही समय
अमरूद के पेड़ को दीर्घकालिक उत्पादक बनाने के लिए धैर्य रखना बहुत जरूरी है। जब पौधे में पहली बार फूल आएं, तो उन्हें तोड़कर हटा देना चाहिए ताकि सारा ऊर्जा संचार पेड़ के तने और जड़ों को मजबूत बनाने में लग सके। जब दूसरी बार पौधे में फूल विकसित हों, तभी फलों को बढ़ने देना चाहिए। यह सावधानी पेड़ को लंबे समय तक बेहतर गुणवत्ता और अधिक पैदावार देने में सक्षम बनाती है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** अमरूद की बागवानी में वैज्ञानिक तरीकों और समय पर खाद-पानी का उपयोग करने से छोटे किसान भी अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।

**गया में:** जिले के किसान शशि रंजन सिंह की सफलता से प्रेरित होकर अन्य स्थानीय किसान बंजर या कम उपयोग वाली भूमि पर अमरूद लगाकर अपनी आजीविका में सुधार ला सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. शशि रंजन सिंह ने कितने एकड़ में अमरूद की खेती की है?
शशि रंजन सिंह ने 14 एकड़ भूमि में अमरूद की बागवानी कर रखी है।

### 2. अमरूद की बागवानी से सालाना कितनी कमाई हो रही है?
इस बागवानी से वे सालाना करीब 12 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।

### 3. पौधा लगाने के लिए गड्ढा कितना गहरा होना चाहिए?
पौधा लगाने के लिए करीब डेढ़ फुट गहरा गड्ढा खोदना चाहिए।

### 4. पौधे की पहली बार आई फूल क्यों तोड़ देने चाहिए?
पहली बार आए फूलों को तोड़ने से पेड़ की ऊर्जा जड़ों और तने को मजबूत बनाने में लगती है, जिससे भविष्य में अच्छी पैदावार मिलती है।

## प्रेरणा और सबक
- **धैर्य का महत्व:** पहले फूल को हटाना पेड़ को भविष्य में मजबूत बनाने के लिए जरूरी है।
- **मिट्टी की तैयारी:** गड्ढों को रोपाई से पहले धूप में छोड़ना रोगों से बचाने का एक प्रभावी जैविक तरीका है।
- **जैविक खाद:** गोबर, सरसों की खली और मुर्गी की बीट का उपयोग रासायनिक खादों के विकल्प के रूप में फायदेमंद है।
- **नियमित निगरानी:** खरपतवार हटाना और निराई-गुड़ाई करना पौधे की जड़ों को सांस लेने में मदद करता है।

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