अमेठी की रसोइयों की चमकी किस्मत, बढ़ा मानदेय और मिला 5 लाख तक का मुफ्त इलाज अमेठी जिले के परिषदीय विद्यालयों में खाना बनाने वाली 3891 रसोइयों का मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही इन्हें 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज और 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी मिलेगा। अमेठी के परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों के लिए भोजन तैयार करने वाली और उनकी देखभाल में जुटी महिला रसोइयों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से तमाम आर्थिक चुनौतियों और कम मेहनताना के बीच काम कर रही इन महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब न केवल इनके मासिक मानदेय में इजाफा किया गया है, बल्कि इन्हें कई तरह के सामाजिक सुरक्षा कवच से भी लैस किया गया है। इस नई व्यवस्था से अमेठी क्षेत्र की करीब 3800 से अधिक महिला रसोइयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की पूरी उम्मीद है, जिससे उन्हें पैसों की तंगी और स्वास्थ्य संबंधी अनिश्चितताओं से काफी हद तक राहत मिलेगी। मानदेय में क्रमिक बढ़ोतरी और अन्य सुरक्षा लाभ जिले के 1570 से ज्यादा परिषदीय विद्यालयों में कुल 3891 रसोइयां अपनी सेवाएं दे रही हैं। इन महिलाओं के मेहनताना में सरकार और प्रशासन के स्तर पर समय-समय पर संशोधन किया गया है। शुरुआत में इन्हें बेहद मामूली रकम मिलती थी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 500 रुपये, फिर 1000 रुपये और बाद में 2000 रुपये किया गया था। अब इस मानदेय को बढ़ाकर सीधे 3000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। बढ़ी हुई इस वित्तीय सहायता के अलावा इन सभी रसोइयों को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ और 5 लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज की सुविधा भी प्रदान की जा रही है, जो इनके और इनके परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा साबित होगी। रसोइयों ने बयां की अपनी खुशी और पुरानी मुश्किलें इस कल्याणकारी पहल के लागू होने के बाद से रसोइयों में काफी उत्साह और खुशी का माहौल देखा जा रहा है। रीता देवी नाम की एक रसोइया का कहना है कि यह कदम उनके वर्ग के लिए बेहद सराहनीय है और सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब उन्हें इलाज के लिए यहां-वहां भटकना नहीं पड़ेगा क्योंकि 5 लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार मिल जाएगा। उनका यह भी कहना है कि पहले मिलने वाला मानदेय बेहद कम था और बुनियादी सुविधाएं न के बराबर थीं। एक अन्य रसोइया प्रभा देवी ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि सुविधाओं के दायरे में विस्तार होना उनके लिए बहुत सुखद अनुभव है। पहले के मुकाबले आय तो बढ़ी ही है, साथ ही स्वास्थ्य बीमा मिल जाने से उन्हें किसी के आगे आर्थिक मदद के लिए हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। सुमन देवी ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि इस नई व्यवस्था के तहत मिलने वाला 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, मुफ्त चिकित्सा और बढ़ा हुआ वेतन उन सभी के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा, क्योंकि पहले कम पैसों में गुजारा करना काफी कठिन होता था। प्रशासन की ओर से निरंतर प्रयासों का भरोसा इस पूरे मामले को लेकर जिले के एमडीएम प्रभारी अरुण त्रिपाठी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि रसोइयों के कल्याण और हितों को ध्यान में रखते हुए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि ये रसोइयां स्कूलों में पूरी ईमानदारी और भोजन की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हुए अपना कार्य करती हैं। प्रशासन की यह प्राथमिकता रही है कि इन सभी मेहनतकश महिलाओं को अधिक से अधिक और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। शासन स्तर से भविष्य में जैसे भी नए निर्देश प्राप्त होंगे, उनके अनुरूप आगे भी आवश्यक कार्य और कदम उठाए जाएंगे ताकि इन वर्कर्स का जीवन और सुगम हो सके। इसका आप पर असर भारत में: देश भर के विभिन्न राज्यों में स्कूली रसोइयों के मानदेय और कल्याणकारी नीतियों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह स्थानीय स्तर पर एक बड़ा सुधार है। अमेठी में: अमेठी जिले के 1570 से अधिक परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत 3,891 महिला रसोइयों को अब बढ़ा हुआ 3000 रुपये मासिक वेतन, 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज और 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा मिलेगा। सवाल-जवाब 1. अमेठी में कितनी रसोइयों को इस नई पहल का लाभ मिलेगा? अमेठी जिले के परिषदीय विद्यालयों में काम करने वाली कुल 3,891 महिला रसोइयों को इस पहल का सीधा लाभ मिलेगा। 2. रसोइयों का मानदेय बढ़ाकर कितना कर दिया गया है? रसोइयों का मासिक मानदेय पहले के मुकाबले बढ़ाकर अब सीधे 3000 रुपये कर दिया गया है। 3. रसोइयों को स्वास्थ्य और दुर्घटना से जुड़ी क्या सुविधाएं मिलेंगी? इन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस इलाज और 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा। 4. अमेठी में कितनी शालाओं या विद्यालयों में ये रसोइयां तैनात हैं? जिले की ये रसोइयां 1570 से अधिक परिषदीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। प्रेरणा और सबक रसोइयों के संघर्ष और इस पहल से मिलने वाले मुख्य सबक: • धैर्य और निरंतरता: कम मानदेय और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते रहना अंततः सकारात्मक बदलाव लाता है। • सामूहिक आवाज: जमीनी स्तर पर काम करने वाले श्रमिकों के अधिकारों और सुविधाओं के लिए प्रशासनिक स्तर पर होने वाले प्रयास उनके जीवन को सुरक्षित बनाते हैं। • आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा: किसी भी कामकाजी व्यक्ति के लिए बीमा और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुरक्षा का होना उनके भविष्य को सुरक्षित करता है। https://trendkia.com/business/amethi-ki-rasoiya-honorarium-hike-medical-cover-21542 TrendKia — Har trend, sabse pehle.