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  "type": "article",
  "title": "अमेठी में आरसेटी दे रहा मोमबत्ती निर्माण की मुफ्त ट्रेनिंग, 8 से 10 हजार रुपये में शुरू हो सकता है कारोबार",
  "summary": "अमेठी में आरसेटी संस्थान महिलाओं और युवाओं को कैंडल मेकिंग का निशुल्क प्रशिक्षण दे रहा है, जिससे महज 8 से 10 हजार रुपये लगाकर स्वरोजगार शुरू किया जा सकता है।",
  "content": "ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और आजीविका के नए रास्ते खोलने के मकसद से स्वरोजगार के छोटे मॉडल्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में अमेठी जिले के भीतर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और स्थानीय बेरोजगार युवाओं को मोमबत्ती निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण मुहैया कराया जा रहा है। आरसेटी संस्थान की ओर से संचालित इस विशेष कार्यक्रम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें हिस्सा लेने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ता। बहुत कम पूंजी लगाकर घर से ही लघु उद्योग स्थापित करने की चाह रखने वालों के लिए यह एक मुफीद विकल्प बनकर उभरा है।\n\nनिर्माण की सरल विधि और जरूरी कच्चा माल\nमोमबत्ती निर्माण की पूरी कार्यप्रणाली बेहद सुगम और सीधी है। स्वयं सहायता समूह की सदस्य पिंकी के अनुसार, इस काम की शुरुआत के लिए सबसे पहले कच्चा मोम जुटाना होता है। इस मोम को एक निश्चित तापमान पर गर्म करके पिघलाया जाता है। इसके समानांतर मोमबत्ती तैयार करने वाले सांचों की विधिवत सफाई की जाती है, ताकि तैयार उत्पाद की बनावट एकदम साफ और आकर्षक निकले। सांचे में बत्ती के लिए धागा व्यवस्थित करने के बाद पिघला हुआ गर्म मोम उसमें उड़ेल दिया जाता है। मोम डालने के बाद लगभग 10 से 15 मिनट तक उसे ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद सांचे से ठोस मोमबत्ती बाहर निकाल ली जाती है।\n\nबाजार में सामान्य उपयोग के लिए बनने वाली मोमबत्तियों के निर्माण में पैराफिन मोम का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है। इसके उत्पादन के लिए मोम के अलावा मजबूत धागा, अलग-अलग डिजाइन के सांचे और कुछ बुनियादी उपकरणों की जरूरत पड़ती है। यह सारा कच्चा माल नजदीकी औद्योगिक केंद्र कानपुर से आसानी से खरीदा जा सकता है। लागत के गणित को समझें तो एक किलोग्राम मोम का बाजार भाव लगभग 180 रुपये पड़ता है, जिससे तकरीबन 100 सामान्य मोमबत्तियां बनकर तैयार हो जाती हैं। यदि मोम को पिघलाते वक्त उसमें विभिन्न रंग मिला दिए जाएं, तो बाजार की मांग के अनुसार रंग-बिरंगी और आकर्षक मोमबत्तियां भी बनाई जा सकती हैं। समूह की सदस्य अर्चना कुमारी का मानना है कि इस विधा को सीखकर महिलाएं न्यूनतम लागत में अपनी गृहस्थी संभालते हुए निजी आमदनी के ठोस रास्ते तैयार कर सकती हैं।\n\nलागत का आकलन और दाखिला प्रक्रिया\nसंस्थान की मास्टर ट्रेनर और फैकल्टी महिमा के मुताबिक, समय की मांग और बाजार के मिजाज को देखते हुए इस तरह के हुनर सिखाए जा रहे हैं। खासकर दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मोमबत्तियों की मांग कई गुना बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने वालों को तगड़ा मुनाफा कमाने का मौका मिलता है। पूरे सेटअप को खड़ा करने के लिए महज 8 से 10 हजार रुपये की शुरुआती कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है।\n\nइस निशुल्क प्रशिक्षण का हिस्सा बनने के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को अपना आधार कार्ड, पासपोर्ट आकार की फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर संस्थान में दर्ज कराना आवश्यक है। यह प्रशिक्षण केंद्र अमेठी स्थित विकास भवन के निकट स्थापित है। संस्थान केवल मुख्यालय तक सीमित न रहकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक भी अपनी पहुंच बना रहा है, जहां जाकर महिलाओं को सीधे तौर पर हुनरमंद बनाया जा सके ताकि वे स्वावलंबन की राह पर तेजी से आगे बढ़ सकें।\n\nइसका आप पर असर\nयह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने के इच्छुक लोगों के लिए बेहद किफायती कारोबारी अवसर प्रदान करता है।\n\n• भारत में: कम पूंजी में लघु उद्योग शुरू करने की चाह रखने वाले लोग मोमबत्ती निर्माण जैसे मॉडल्स को अपनाकर घर बैठे अपनी आजीविका चला सकते हैं। त्योहारों के मौसम में इसकी निरंतर मांग होने से देश भर के ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आय बढ़ाने का यह कारगर तरीका बन सकता है।\n• अमेठी में: जिले के स्थानीय निवासियों, खासकर महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को आरसेटी में बिना किसी शुल्क के व्यावहारिक हुनर सीखने का सीधा मौका मिल रहा है। इच्छुक व्यक्ति अपने आधार कार्ड, फोटो और मोबाइल नंबर के साथ विकास भवन के पास स्थित केंद्र में जाकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।\n• लागत और आमदनी: शुरुआत करने के लिए केवल 8 से 10 हजार रुपये की पूंजी चाहिए, जिससे कच्चा माल और सांचे आसानी से खरीदे जा सकते हैं। एक किलो मोम 180 रुपये में लेकर उससे करीब 100 मोमबत्तियां बनाई जा सकती हैं, जिससे प्रति यूनिट बेहतरीन बचत संभव होती है।\n• सामग्री उपलब्धता: आवश्यक कच्चा माल जैसे पैराफिन मोम और सांचे नजदीकी औद्योगिक शहर कानपुर से आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। इस सुगम आपूर्ति व्यवस्था के कारण ग्रामीण कारीगरों को उत्पादन चक्र जारी रखने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आती।\n\nऐसा क्यों हुआ\nग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को गति देने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में संस्थागत पहल के तहत यह कदम उठाया गया है।\n\n• स्वरोजगार का विस्तार: ग्रामीण और अर्धशहरी आबादी को आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के लिए आरसेटी जैसी संस्थाएं व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित करती हैं। इसका उद्देश्य लोगों को बिना वित्तीय बोझ के व्यावहारिक हुनर सिखाकर उन्हें उद्यमी बनने के काबिल बनाना है।\n• न्यूनतम पूंजी की अनुकूलता: अधिकांश ग्रामीण परिवारों के पास भारी निवेश के साधन नहीं होते, इसलिए मोमबत्ती निर्माण जैसे कम खर्चीले विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है। 8 से 10 हजार रुपये की लागत में उत्पादन शुरू होना इसे बेहद सुलभ और व्यावहारिक बनाता है।\n• त्योहारी मांग का लाभ: दीपावली और अन्य सामाजिक उत्सवों में मोमबत्तियों की निरंतर मांग बनी रहती है, जिससे स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों की बिक्री आसान हो जाती है। बाजार के इसी रुख को देखते हुए प्रशिक्षण सत्रों की योजना तैयार की गई है।\n• ग्रामीण महिलाओं तक सीधी पहुंच: कई महिलाएं दूरी और संसाधनों के अभाव में शहरों तक नहीं आ पाती हैं, जिसके चलते संस्थान के प्रशिक्षक सीधे गांवों में जाकर कक्षाएं आयोजित कर रहे हैं। इससे स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी में तेजी से इजाफा हुआ है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेठी में मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण किस संस्थान द्वारा दिया जा रहा है?\nयह निशुल्क प्रशिक्षण आरसेटी (RSETI) संस्थान द्वारा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को प्रदान किया जा रहा है।\n\n2. इस मोमबत्ती निर्माण व्यवसाय को शुरू करने में कितनी शुरुआती लागत आती है?\nइस व्यवसाय की शुरुआत लगभग 8 से 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी लगाकर की जा सकती है।\n\n3. एक किलो मोम की कीमत कितनी है और इससे कितनी मोमबत्तियां बन सकती हैं?\nएक किलो मोम की कीमत लगभग 180 रुपये है और इससे करीब 100 सामान्य मोमबत्तियां तैयार की जा सकती हैं।\n\n4. मोमबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल कहां से खरीदा जा सकता है?\nपैराफिन मोम, धागा, सांचे और अन्य आवश्यक कच्चा माल कानपुर से आसानी से खरीदा जा सकता है।\n\n5. आरसेटी में प्रशिक्षण के लिए आवेदन करने हेतु किन दस्तावेजों की आवश्यकता है?\nइच्छुक उम्मीदवारों को अपना आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर संस्थान में दर्ज कराना होता है।\n\n6. सांचे में डालने के बाद मोमबत्ती कितनी देर में तैयार हो जाती है?\nपिघला हुआ मोम सांचे में डालने के बाद लगभग 10 से 15 मिनट में ठंडा होकर मोमबत्ती के रूप में तैयार हो जाता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nअमेठी की महिलाओं द्वारा न्यूनतम पूंजी के साथ घरेलू स्तर पर लघु उद्योग स्थापित करने का प्रयास ग्रामीण स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल है।\n\n• सीमित पूंजी से शुरुआत: बड़ा कारोबार खड़ा करने के लिए बहुत अधिक पैसों की जरूरत नहीं होती, बल्कि 8 से 10 हजार रुपये के छोटे बजट से भी मजबूत शुरुआत की जा सकती है। अपने उपलब्ध संसाधनों के भीतर कदम बढ़ाना ही व्यावहारिक उद्यमिता है।\n• कौशल विकास पर जोर: पिंकी और अर्चना कुमारी जैसी महिलाओं ने पहले सही तकनीक सीखी और फिर उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया। कोई भी नया काम शुरू करने से पहले उसके बुनियादी हुनर को समझना जोखिम को घटा देता है।\n• सामूहिक सहयोग का महत्व: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से एक साथ जुड़कर काम करने से व्यक्तिगत आत्मविश्वास और सौदेबाजी की ताकत बढ़ती है। साझा मंच पर महिलाएं एक दूसरे के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ सकती हैं।\n• स्थानीय संसाधनों की पहचान: नजदीकी बाजारों जैसे कानपुर से कच्चा माल जुटाकर और स्थानीय मांग का अध्ययन करके टिकाऊ कारोबार बनाया जा सकता है। अवसर हमेशा हमारे आसपास ही मौजूद रहते हैं।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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