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  "title": "अमरो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में हलचल, डिफेंस कंपनी के नए दांव से बाजार में चर्चा",
  "summary": "शौर्यास्त्र डिफेंस सिस्टम्स में हिस्सेदारी खरीदने के ऐलान के बाद अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में जोरदार कारोबार देखने को मिला।",
  "content": "घरेलू शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर निवेशकों की पैनी नजर बनी हुई है। इसी कड़ी में अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों ने सोमवार के सत्र के दौरान निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कंपनी की ओर से एक अहम कारोबारी अपडेट सामने आने के बाद शुरुआती घंटों में इसके शेयरों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि, कारोबार के अंतिम क्षणों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला जिसके चलते शेयर ने अपने शुरुआती फायदे का एक बड़ा हिस्सा गंवा दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर यह शेयर 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 385 रुपये के भाव पर बंद हुआ।\n\nकारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव और शेयर का प्रदर्शन\nसोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान इस डिफेंस स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव भरा माहौल रहा। कारोबार के दौरान शेयर ने 397.65 रुपये के अपने intraday उच्च स्तर को छुआ, जबकि इसका intraday निचला स्तर 383.85 रुपये दर्ज किया गया। दोपहर 3:51 बजे बीएसई पर यह शेयर मामूली कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था। अगर पिछले कुछ समय के रिटर्न पर नजर डालें, तो इस डिफेंस स्टॉक ने बीते छह महीनों के दौरान निवेशकों को 61 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है। इसके अलावा, साल 2026 में अब तक इस शेयर ने करीब 39 प्रतिशत का मुनाफा दिया है, जबकि पिछले दो वर्षों में इसने लगभग 265 प्रतिशत का छलांग लगाने वाला रिटर्न दर्ज किया है।\n\nशौर्यास्त्र डिफेंस सिस्टम्स के साथ नया करार\nइस हलचल के पीछे मुख्य वजह अपोलो माइक्रो सिस्टम्स द्वारा शौर्यास्त्र डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड में 3,400 इक्विटी शेयरों का सब्सक्रिप्शन लेना है। कंपनी ने हाल ही में इस नई इकाई के गठन की घोषणा की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के लिए पूर्ण हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की प्रणालियों और संपूर्ण रक्षा प्लेटफॉर्म का डिजाइन तैयार करना और उनका विकास करना है। इस नई कंपनी का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और भविष्य की सैन्य जरूरतों के हिसाब से अत्याधुनिक समाधान तैयार करना है।\n\nबी. करुणाकर रेड्डी का बयान\nइस नए उपक्रम को लेकर कंपनी के भीतर उत्साह का माहौल है। इस संदर्भ में बी. करुणाकर रेड्डी ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि इस नई इकाई का मकसद पहले से मौजूद उत्पादों के साथ बाजार में प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि शौर्यास्त्र का जन्म एक दृढ़ संकल्प के साथ हुआ है, जो हमारे सशस्त्र बलों की उन अनसुलझी समस्याओं और परिचालन चुनौतियों का समाधान करेगा जिनके स्वदेशी जवाब लंबे समय से प्रतीक्षित हैं और जो कल के युद्धक्षेत्रों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होंगे।\n\nमार्केट कैपिटलाइजेशन और वित्तीय आंकड़े\nबीते 24 अगस्त को बीएसई पर अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का शेयर 385.05 रुपये पर बंद हुआ था और उस समय इसका कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 14,308.44 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस शेयर ने बीते 3 जुलाई 2026 को 466.70 रुपये के अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ था। वहीं दूसरी ओर, गत 30 अगस्त 2026 को यह लुढ़ककर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर 180.80 रुपये पर आ गया था। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE 15.67 प्रतिशत है, जो इसके वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने किस नई कंपनी में हिस्सेदारी ली है?\nकंपनी ने शौर्यास्त्र डिफेंस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड में 3,400 इक्विटी शेयरों का सब्सक्रिप्शन लिया है।\n\n2. सोमवार के सत्र में बीएसई पर शेयर का बंद भाव क्या रहा?\nशेयर 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 385 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ।\n\n3. इस डिफेंस स्टॉक ने पिछले छह महीनों में कितना रिटर्न दिया है?\nइस डिफेंस स्टॉक ने पिछले छह महीनों में 61 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।\n\n4. कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन कितना दर्ज किया गया था?\n24 अगस्त को कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 14,308.44 करोड़ रुपये था।",
  "url": "https://trendkia.com/business/apollo-micro-systems-shares-volatile-after-acquisition-update-in-defence-sector-21220",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-24",
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    "अपोलो माइक्रो सिस्टम्स",
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