अस्त्र मार्क-2 का बड़े पैमाने पर उत्पादन: निजी कंपनियों को मिलेगा मौका, इंडोनेशिया के ऑर्डर से मिली नई रफ्तार भारत अब अस्त्र मार्क-2 मिसाइल के उत्पादन के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को आमंत्रित कर रहा है ताकि इंडोनेशिया जैसे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। इस रणनीति का लक्ष्य रक्षा उत्पादन की गति बढ़ाकर चीन की मिसाइल तकनीक का मुकाबला करना है। भारत अपने रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल प्रणालियों की बिक्री को लेकर हुआ समझौता इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक के रूप में वैश्विक पटल पर उभर रहा है। इसी रणनीति के तहत रक्षा मंत्रालय ने डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित अत्याधुनिक अस्त्र मार्क-2 मिसाइल के निर्माण के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। पहली बार इस मिसाइल के उत्पादन में निजी क्षेत्र की कंपनियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। सरकार जल्द ही इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी करने की तैयारी में है, जिसमें टाटा समूह, महिंद्रा, अडानी डिफेंस, भारत फोर्ज और ICOMM जैसी दिग्गज कंपनियां भाग लेने की कतार में हैं। उत्पादन का मॉडल और एएमएसीए (AMCA) से प्रेरणा इस नई पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार उसी मॉडल का अनुसरण कर रही है जिसे भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट, यानी एएमएसीए (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए अपनाया गया था। इस व्यवस्था में डिजाइन और तकनीकी बौद्धिक संपदा सरकारी एजेंसियों के पास सुरक्षित रहती है, जबकि बड़े पैमाने पर विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र के उद्योग उठाते हैं। एएमएसीए परियोजना में पहली बार सरकार ने बड़े स्तर पर निजी साझेदारी का प्रयोग किया था। इसका उद्देश्य केवल एक विमान बनाना नहीं, बल्कि देश में एक ऐसा मजबूत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां सरकारी संस्थान और निजी कंपनियां कंधे से कंधा मिलाकर अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण कर सकें। अब इसी सफल मॉडल को मिसाइल उत्पादन में लागू किया जा रहा है, जिससे न केवल उत्पादन क्षमता में कई गुना इजाफा होगा, बल्कि भारतीय सेना की जरूरतों को समय पर पूरा करना और निर्यात ऑर्डर्स की सप्लाई सुनिश्चित करना भी आसान हो जाएगा। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का एक अनिवार्य हिस्सा बना सकता है। निजी क्षेत्र की आवश्यकता क्यों पड़ी? मौजूदा स्थिति में अस्त्र मिसाइल का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जाता है। हालांकि, भारतीय सशस्त्र बलों की लगातार बढ़ती जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे रक्षा सौदों के प्रस्तावों को देखते हुए अकेले BDL के लिए उत्पादन की इस बढ़ती मांग को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। सरकार उत्पादन आधार को विकेंद्रीकृत करके इसे और अधिक लचीला बनाना चाहती है। निजी कंपनियों के प्रवेश से नई उत्पादन इकाइयां खुलेंगी, जिससे सप्लाई चेन अधिक सुदृढ़ होगी और मिसाइलों की डिलीवरी की गति में अभूतपूर्व तेजी आएगी। इंडोनेशिया की रुचि और सामरिक महत्व अस्त्र मार्क-2 के उत्पादन को रफ्तार देने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण विदेशी देशों की बढ़ती दिलचस्पी भी है। इंडोनेशिया ने भारत की अस्त्र मार्क-2 मिसाइल को खरीदने में काफी रुचि दिखाई है। यह एक बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल प्रणाली है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 180 से 200 किलोमीटर के बीच है। इसकी खासियत यह है कि यह दुश्मन के लड़ाकू विमान को उस दूरी से भी निशाना बना सकती है, जो मानवीय आंखों की सीमा से बहुत दूर है। भारतीय वायुसेना के तेजस मार्क-1ए, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई और नौसेना के राफेल मरीन विमानों पर तैनात होने के लिए यह मिसाइल एक महत्वपूर्ण हथियार साबित होगी। चीन की पीएल-15 (PL-15) को चुनौती रणनीतिक स्तर पर अस्त्र मार्क-2 को चीन की पीएल-15 (PL-15E) लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का सीधा और प्रभावी जवाब माना जा रहा है। ज्ञात हो कि पिछले वर्ष चीन ने इसी मिसाइल तकनीक को पाकिस्तान को उपलब्ध कराया था। ऐसे में अस्त्र मार्क-2 की लंबी रेंज और इसकी एडवांस्ड सीकर तकनीक भारतीय वायुसेना को युद्ध के मैदान में बड़ा सामरिक लाभ प्रदान करेगी। प्रलय मिसाइल की राह सरकार का विजन केवल अस्त्र तक ही सीमित नहीं है। आगामी चरण में 500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली 'प्रलय' बैलिस्टिक मिसाइल के उत्पादन में भी निजी क्षेत्र की कंपनियों को जोड़ा जा सकता है। ध्वनि की गति से करीब छह गुना तेज यह मिसाइल भारत की प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स का मुख्य हिस्सा होगी। इस रक्षा नेटवर्क के दायरे में लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइलें, अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और 300 किलोमीटर तक मार करने वाली एक्सटेंडेड रेंज पिनाका प्रणाली भी शामिल हैं। इसका आप पर असर भारत में: रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्वदेशी हथियारों की उत्पादन लागत कम हो सकती है। निवेशकों के लिए: टाटा, महिंद्रा और अडानी जैसे रक्षा क्षेत्रों से जुड़े समूहों के शेयरों पर इस नीतिगत बदलाव का सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। सवाल-जवाब 1. अस्त्र मार्क-2 मिसाइल क्या है? अस्त्र मार्क-2 एक अत्याधुनिक बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर तक है। 2. सरकार ने मिसाइल उत्पादन में निजी क्षेत्र को क्यों शामिल किया है? भारतीय सेना की बढ़ती जरूरतों और इंडोनेशिया जैसे देशों से मिल रहे निर्यात ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु यह कदम उठाया गया है। 3. अस्त्र मार्क-2 किन लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होगी? इसे भारतीय वायुसेना के तेजस मार्क-1ए, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई और नौसेना के राफेल मरीन विमानों में तैनात किया जाएगा। 4. चीन की किस मिसाइल को अस्त्र मार्क-2 का मुकाबला माना जा रहा है? अस्त्र मार्क-2 को चीन की पीएल-15 (PL-15E) लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल का प्रभावी जवाब माना जा रहा है। https://trendkia.com/business/astra-marka-2-ka-bare-paimane-para-utpadana-niji-knpaniyon-ko-milega-mauka-indoneshiya-ke-astra-mark-2-rdara-se-mili-nai-raphtara-7037 TrendKia — Har trend, sabse pehle.