आवाज और चेहरे की नकल कर ठगी कर रहे साइबर अपराधी, पंजाब नेशनल बैंक ने जारी किया अलर्ट पंजाब नेशनल बैंक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से हो रहे डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड को लेकर खाताधारकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में डिजिटल धोखाधड़ी के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं, जिसे देखते हुए पंजाब नेशनल बैंक ने अपने सभी खाताधारकों के लिए एक अहम सुरक्षा परामर्श जारी किया है। बैंक ने आगाह किया है कि साइबर जालसाज अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI का सहारा लेकर आम लोगों की आवाज की नकल तैयार कर रहे हैं, डीपफेक वीडियो बना रहे हैं और फिशिंग मैसेज के जरिए गोपनीय वित्तीय डेटा चुराने की कोशिश में जुटे हैं। ग्राहकों को साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि किसी भी अनजान अथवा संदिग्ध कॉल और संदेश पर बिना पूरी पड़ताल किए कतई भरोसा न करें। तकनीक का दुरुपयोग कर असली जैसी धोखाधड़ी रच रहे अपराधी हर साल अक्टूबर का महीना राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के तौर पर मनाया जाता है। इसी अवसर पर जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाते हुए पंजाब नेशनल बैंक ने बताया कि ठग अब बेहद अत्याधुनिक डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन उन्नत तकनीकों की वजह से उनके द्वारा रचे गए फर्जीवाड़े इतने सटीक और वास्तविक दिखाई देते हैं कि सामान्य लोगों के लिए सच और झूठ के बीच फर्क कर पाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। मानवीय भावनाओं और जल्दबाजी का फायदा उठा रहे ठग धोखाधड़ी के नए तौर-तरीकों पर विस्तार से बात करते हुए पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अशोक चंद्रा ने ग्राहकों को विशेष सावधानी बरतने का संदेश दिया है। अशोक चंद्रा ने कहा, "आजकल साइबर फ्रॉड के कई मामलों में लोगों के व्यवहार, खासकर भरोसे, डर, जल्दबाजी और रोजमर्रा की डिजिटल आदतों का फायदा उठाया जाता है।" उन्होंने आगे समझाया कि जालसाज तकनीक का सहारा लेकर किसी परिवार के सदस्य, करीबी रिश्तेदार, दोस्त या अन्य भरोसेमंद व्यक्तियों की आवाज और चेहरे की हूबहू नकल तैयार कर लेते हैं। इसके बाद वे किसी बड़ी इमरजेंसी या अचानक आई मुसीबत का बहाना बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का मानसिक दबाव डालते हैं। घबराहट और हड़बड़ाहट के कारण पीड़ित व्यक्ति बिना सोचे-समझे रकम ट्रांसफर कर बैठता है। फर्जी ईमेल और मैसेज से पैदा किया जा रहा डर अशोक चंद्रा के अनुसार, साइबर अपराधी अब ऐसे ईमेल, एसएमएस और डिजिटल संदेश तैयार करते हैं जो सीधे तौर पर बैंक के आधिकारिक संदेशों जैसे प्रतीत होते हैं। इन संदेशों में खाताधारक की निजी जानकारियों का इस तरह इस्तेमाल किया जाता है कि वे बिल्कुल असली लगते हैं। इनका मुख्य मकसद खाते में गड़बड़ी या कार्ड ब्लॉक होने जैसी मनगढ़ंत बातें कहकर ग्राहक के भीतर डर पैदा करना होता है। इस अचानक उत्पन्न हुए तनाव के कारण ग्राहक घबराकर बिना किसी शाखा या आधिकारिक हेल्पलाइन से पुष्टि किए संवेदनशील विवरण साझा कर देते हैं अथवा फर्जी लिंक पर क्लिक कर बैठते हैं। सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने में जुटे सरकारी और निजी बैंक देशभर में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए अब केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि तकनीकी मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के वित्तीय संस्थान आधुनिक AI से उत्पन्न होने वाले खतरों और क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित जोखिमों का सामना करने के लिए अपने आईटी बुनियादी ढांचे को लगातार अपग्रेड कर रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय किए गए कड़े नियामकीय मानकों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए बैंक साइबर सुरक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी कर रहे हैं। सावधानी और सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार पंजाब नेशनल बैंक के प्रमुख ने दोहराया कि बैंक अपने सभी ग्राहकों की गाढ़ी कमाई और उनकी निजी जानकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, तकनीकी सुरक्षा दीवारों के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर बरती जाने वाली सतर्कता ही वित्तीय धोखाधड़ी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। बैंक ने अपील की है कि किसी भी आपातकालीन कॉल या वित्तीय अनुरोध पर धन भेजने से पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करके मामले की सच्चाई अवश्य जांच लें। इसका आप पर असर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए आम बैंक खाताधारकों को अपने रोजमर्रा के लेन-देन में तत्काल अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। • आपातकालीन कॉल्स की पुष्टि: यदि किसी रिश्तेदार या दोस्त की आवाज में कॉल कर अचानक पैसे की मांग की जाए, तो तत्काल भुगतान करने से बचें। तुरंत उस व्यक्ति के दूसरे नंबर पर कॉल करके या किसी अन्य परिचित से संपर्क करके स्थिति की सत्यता जांचें। • संदिग्ध लिंक से दूरी: बैंक खाता बंद होने या केवाईसी अपडेट करने का दावा करने वाले किसी भी एसएमएस या ईमेल पर दिए गए लिंक पर क्लिक न करें। किसी भी सेवा या स्पष्टीकरण के लिए हमेशा आधिकारिक बैंकिंग ऐप या नजदीकी बैंक शाखा से ही संपर्क करें। • ओटीपी और पिन की सुरक्षा: किसी भी परिस्थिति में बैंक कर्मचारी बनकर बात करने वाले कॉलर को अपना ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड साझा न करें। बैंक कभी भी फोन या व्यक्तिगत मैसेज के जरिए गोपनीय पासवर्ड नहीं मांगते हैं। • तुरंत शिकायत दर्ज करें: यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अनधिकृत लेन-देन का पता चले, तो बिना समय गंवाए बैंक के हेल्पलाइन नंबर और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं। समय पर सूचना देने से धोखाधड़ी की गई रकम को ब्लॉक कराने में मदद मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ साइबर जालसाज आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों का सहारा लेकर लोगों की भावनाओं और विश्वास का अनुचित लाभ उठा रहे हैं, जिसके चलते बैंकिंग क्षेत्र को व्यापक परामर्श जारी करना पड़ा है। • उन्नत एआई उपकरणों की उपलब्धता: डीपफेक सॉफ्टवेयर और वॉयस क्लोनिंग तकनीकें अब अपराधियों के लिए आसानी से सुलभ हो गई हैं। जालसाज इंटरनेट पर उपलब्ध छोटी-छोटी ऑडियो और वीडियो क्लिप्स का विश्लेषण कर किसी भी व्यक्ति की सटीक आवाज और चेहरा तैयार कर लेते हैं। • मानवीय मनोविज्ञान का दुरुपयोग: अपराधी पीड़ित के मन में अचानक डर, घबराहट या अत्यधिक तात्कालिकता की भावना पैदा करते हैं। इस मानसिक दबाव में आकर व्यक्ति किसी स्वतंत्र माध्यम से पुष्टि किए बिना धन भेजने जैसा गलत कदम उठा लेता है। • सख्त नियामक निर्देश: भारतीय रिजर्व बैंक के कड़े साइबर सुरक्षा नियमों और क्वांटम कंप्यूटिंग के संभावित खतरों के कारण बैंकों को अपनी तकनीकी सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने के साथ-साथ ग्राहकों को भी लगातार सतर्क करना पड़ रहा है। सवाल-जवाब 1. पंजाब नेशनल बैंक ने ग्राहकों के लिए क्या चेतावनी जारी की है? बैंक ने ग्राहकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और नकली बैंकिंग मैसेज के जरिए हो रही धोखाधड़ी से सावधान रहने को कहा है। 2. साइबर ठग डीपफेक और आवाज की नकल का उपयोग कैसे करते हैं? वे किसी परिचित या रिश्तेदार की आवाज और चेहरे की नकल कर अचानक पैसे की आपातकालीन जरूरत बताकर लोगों से धन ठग लेते हैं। 3. पीएनबी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कौन हैं? पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक चंद्रा हैं। 4. साइबर सुरक्षा जागरूकता माह किस महीने में मनाया जाता है? राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह हर साल अक्टूबर के महीने में मनाया जाता है। 5. बैंक साइबर सुरक्षा पर अपना निवेश क्यों बढ़ा रहे हैं? बैंक आधुनिक एआई खतरों, क्वांटम कंप्यूटिंग के जोखिमों और भारतीय रिजर्व बैंक के कड़े नियमों का पालन करने के लिए सुरक्षा पर निवेश बढ़ा रहे हैं। https://trendkia.com/business/avaja-aura-chehare-ki-nakala-kara-thagi-kara-rahe-saibara-aparadhi-punjab-national-bank-ne-jari-kiya-alarta-49922 TrendKia — Har trend, sabse pehle.