आजमगढ़: केले की उन्नत खेती से राकेश राय ने बदली तकदीर, ऐसे कमा रहे हैं लाखों का मुनाफा आजमगढ़ के तहबरपुर निवासी किसान राकेश राय ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर केले की व्यावसायिक खेती से बंपर कमाई की राह दिखाई है। उन्हें सरकारी योजनाओं के माध्यम से अनुदान का लाभ भी मिल रहा है। खेती के पारंपरिक तरीकों में आए बदलाव और आधुनिक तकनीकों के समावेश ने किसानों की कार्यक्षमता और आय के नए रास्ते खोल दिए हैं। आज के दौर में किसान केवल अपनी जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाकर फसलों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत में कमी आई है और मुनाफा कई गुना तक बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में कई ऐसे किसान मौजूद हैं जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कम समय और कम लागत में फलों और सब्जियों की खेती से शानदार सफलता हासिल की है। इनमें से एक उदाहरण तहबरपुर इलाके के रहने वाले प्रगतिशील किसान राकेश राय का है, जो केले की खेती को व्यावसायिक रूप देकर काफी लाभ कमा रहे हैं। केले की बागवानी और उत्पादन क्षमता राकेश राय ने अपने लगभग 2 बीघे के खेत में केले के करीब 1 हजार पौधे लगाए हैं। वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हुए उनका अनुमान है कि हर एक केले के पेड़ से उन्हें औसतन 30 से 35 किलो तक पैदावार प्राप्त होगी। इस भारी मात्रा में उत्पादन के चलते, वे एक ही सीजन में लाखों रुपये की कमाई करने की स्थिति में हैं। बाजार में केले के भाव मौसम और मांग के अनुसार बदलते रहते हैं, और अक्सर यह 20 से 25 रुपये प्रति किलो की दर तक बिकता है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। सरकार से मिल रहा प्रोत्साहन और अनुदान राकेश राय का मानना है कि जो खेती पहले केवल जीवनयापन का साधन मानी जाती थी, अब उसे सही प्रबंधन और व्यावसायिक दृष्टि से करने पर यह आय का एक बड़ा जरिया बन गई है। मुख्य फसल के अलावा, वे समय-समय पर अन्य सब्जियां भी उगाते हैं। इस काम में उन्हें सरकारी सहयोग भी मिल रहा है। विशेष रूप से, नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के जरिए उद्यान विभाग केले की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है। नियमानुसार, किसान इस योजना के तहत खेती के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं, जिससे लागत का बोझ काफी कम हो जाता है। खेती में अतिरिक्त आय का विकल्प केले की खेती की एक बड़ी खूबी यह है कि इसमें किसान एक ही समय में एक से अधिक फसलों का लाभ ले सकते हैं। केले के पौधों के बीच खाली बची हुई जमीन का इस्तेमाल किसान विभिन्न प्रकार की सब्जियों की बुवाई के लिए कर सकते हैं। इससे उन्हें केले के साथ-साथ सब्जी उत्पादन से अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होती है, जो उनके आर्थिक स्तर को और मजबूती प्रदान करती है। इसका आप पर असर भारत में: बागवानी फसलों के लिए सरकार द्वारा मिलने वाले अनुदान और नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन जैसी योजनाएं छोटे किसानों की लागत कम कर उन्हें व्यावसायिक खेती की ओर प्रोत्साहित कर रही हैं। आजमगढ़ में: जिले के स्थानीय किसान केले की खेती में खाली बची जगह पर सह-फसल के रूप में सब्जियों को उगाकर एक साथ दोहरी कमाई कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. राकेश राय ने कितने क्षेत्र में केले की खेती शुरू की है? राकेश राय ने अपने 2 बीघे के खेत में केले की खेती की है। 2. एक केले के पेड़ से कितनी पैदावार होने की उम्मीद है? अनुमान के मुताबिक, प्रति पेड़ से 30 से 35 किलो तक केले की पैदावार आसानी से मिल सकती है। 3. नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के तहत कितना अनुदान मिल सकता है? इस मिशन के अंतर्गत किसान केले की खेती के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। 4. क्या केले के साथ अन्य फसलें भी उगाई जा सकती हैं? हां, किसान केले के पौधों के बीच बची हुई जगह में विभिन्न प्रकार की सब्जियां लगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। प्रेरणा और सबक सफलता और सीख: • तकनीक को अपनाएं: पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करना लागत को घटाकर मुनाफा बढ़ाने में मदद करता है। • व्यावसायिक दृष्टिकोण: खेती को केवल भरण-पोषण नहीं, बल्कि एक व्यावसायिक उद्यम (बिज़नेस) के रूप में देखें। • सरकारी योजनाओं का लाभ: नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन जैसे सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी रखें और समय पर अनुदान के लिए आवेदन करें। • विविधता लाएं: मुख्य फसल के साथ-साथ खाली जगह पर अन्य सब्जियां उगाकर आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करें। https://trendkia.com/business/azamgarh-kele-ki-unnata-kheti-se-rakesh-rai-ne-badali-takadira-aise-kama-rahe-hain-lakhon-ka-munapha-3458 TrendKia — Har trend, sabse pehle.