बंपर फसल से थमी महंगाई की रफ्तार, संसद में बी.एल. वर्मा ने दी बड़ी जानकारी संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और मजबूत सरकारी बफर स्टॉक की बदौलत अनाज और दालों की खुदरा कीमतें नियंत्रण में बनी हुई हैं। हालांकि खाद्य तेलों और कुछ सब्जियों के दाम में तेजी जरूर दर्ज की गई है। देशभर में खुदरा महंगाई के आंकड़े भले ही पांच फीसदी के आसपास पहुंच रहे हों और रिजर्व बैंक की तय सीमा को पार कर रहे हों, लेकिन अन्नदाताओं की बंपर पैदावार ने आम आदमी के लिए राहत के दरवाजे खोल दिए हैं। संसद में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने एक अहम बयान देते हुए यह साफ किया है कि कृषि क्षेत्र के बंपर उत्पादन और सरकार के पास मौजूद मजबूत बफर स्टॉक के कारण खाने-पीने की चीजों के दाम बेकाबू होने से बचे हुए हैं। पिछले एक साल के दौरान अनाज और दालों की खुदरा कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, जिससे महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को बड़ी राहत मिली है। सब्जियों और खाद्यान्न की कीमतों का हाल संसदीय पटल पर दी गई जानकारी के अनुसार, सब्जियों के बाजार में आलू की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं, जबकि टमाटर और प्याज के मामलों में केवल थोड़ा बहुत मौसमी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले 579 मूल्य निगरानी केंद्रों के जरिए कुल 41 प्रमुख खाद्य वस्तुओं की हर दिन की खुदरा कीमतों पर कड़ी नजर रखती है। इन आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2025-26 के दौरान कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसी बंपर पैदावार और पर्याप्त सरकारी स्टॉक की बदौलत पिछले एक साल में अनाज और दालों के बाजार भाव संतुलित रहे हैं। चावल, गेहूं और दालों के खुदरा दाम विभिन्न अनाजों और दालों की कीमतों के आंकड़े देखें तो 28 जुलाई तक खुदरा चावल के भाव में साल-दर-साल 5.18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 44.89 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर गेहूं का आटा 1.03 फीसदी की हल्की तेजी के साथ 37.14 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा है। दालों के मोर्चे पर उड़द दाल का भाव 5.46 फीसदी बढ़कर 121.12 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जबकि अरहर दाल 2.97 फीसदी की बढ़त के साथ 123.09 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। इसके अलावा मसूर दाल 2.21 फीसदी बढ़कर 90.36 रुपये प्रति किलोग्राम और मूंग दाल महज 0.92 फीसदी की हल्की तेजी के साथ 111.71 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। खाद्य तेलों में सबसे ज्यादा तेजी एक तरफ जहां अनाज और दालें नियंत्रण में हैं, वहीं खाद्य तेलों ने रसोई का बजट जरूर बिगाड़ा है क्योंकि देश को अपनी जरूरत का तेल आयात करना पड़ता है। पैक्ड सूरजमुखी तेल की कीमतों में सबसे अधिक 18.03 फीसदी का उछाल आया है और यह 189.42 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। पैक्ड पाम तेल भी 14.09 फीसदी महंगा होकर 148.5 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है। सोया तेल 11.69 फीसदी की तेजी के साथ 164.19 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, मूंगफली का तेल 9.16 फीसदी बढ़कर 205.73 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है, और सरसों का तेल 7.26 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 196.44 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर दर्ज किया गया है। सब्जियां, दूध और आगे की सरकारी रणनीति सब्जियों और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की बात करें तो प्याज के दाम 25.43 फीसदी उछलकर 35.07 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए, हालांकि इसके विपरीत आलू और टमाटर की कीमतों में 11 फीसदी से अधिक की गिरावट देखने को मिली है। इसी अवधि के दौरान दूध के दाम 3.12 फीसदी बढ़कर 60.89 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं और अंडे की कीमतें 12.50 फीसदी की तेजी के साथ 86.84 रुपये प्रति दर्जन दर्ज की गई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह बाजार की बदलती स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए है और यदि भविष्य में किसी भी तरह की अनुचित मूल्य अस्थिरता सामने आती है, तो जरूरी वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इसका आप पर असर आम उपभोक्ता पर इस खबर का सीधा असर और व्यावहारिक अर्थ: • भारत में: देश भर के आम नागरिकों को अनाज और दालों की कीमतें स्थिर रहने से राहत मिली है, हालांकि खाद्य तेल और प्याज खरीदने के लिए जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी होगी। • बाजार और नीति पर: सरकार की बफर स्टॉक नीति और रिकॉर्ड पैदावार के कारण देश में व्यापक स्तर पर खाद्यान्न की कमी का संकट टला हुआ है। सवाल-जवाब 1. संसद में महंगाई और खाद्यान्न उत्पादन की यह जानकारी किसने दी? यह जानकारी खाद्य और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने राज्यसभा में दी। 2. वर्ष 2025-26 में कुल खाद्यान्न उत्पादन कितना दर्ज किया गया है? वर्ष 2025-26 के दौरान कुल खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 3. किन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है? खाद्य तेलों (विशेषकर सूरजमुखी और पाम ऑयल) और प्याज की कीमतों में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई है। 4. देशभर में खुदरा कीमतों पर नजर रखने के लिए कितने निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं? उपभोक्ता मामलों का विभाग देशभर में 579 मूल्य निगरानी केंद्रों के माध्यम से कीमतों पर नजर रखता है। https://trendkia.com/business/b-bumper-fasal-se-thami-mehangai-ki-raftar-parliament-me-b-l-verma-ka-bayan-13649 TrendKia — Har trend, sabse pehle.