# बागेश्वर में क्यों छाई है प्रेमा कोरंगा की यह खास छाछ, हर दिन बिक जाती है इतनी मात्रा

> बागेश्वर के सरस मार्केट स्थित बागनाथ डेयरी में स्थानीय दूध और दही से तैयार होने वाली पारंपरिक छाछ की मांग इन दिनों काफी तेजी से बढ़ रही है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bageshwar-mein-kyon-chhai-hai-prema-koranga-ki-yeh-khas-chhas-21237 · **Language:** Hindi
**Tags:** बागेश्वर, छाछ, पशुपालन, डेयरी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, उत्तराखंड

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पशुपालन ग्रामीण महिलाओं के जीवनयापन और आजीविका का एक मुख्य आधार बना हुआ है। यहां की महिलाएं गाय और भैंस पालकर केवल दूध का उत्पादन ही नहीं करतीं, बल्कि उससे घी, दही और छाछ जैसे तमाम पारंपरिक उत्पाद भी खुद तैयार करती हैं। इससे उन्हें घर बैठे ही रोजगार के अवसर और नियमित कमाई का जरिया मिल जाता है। बागेश्वर जिले में भी स्थानीय स्तर पर बनने वाले ऐसे डेयरी उत्पादों की लोकप्रियता लगातार बनी हुई है और लोग इनकी गुणवत्ता पर भरोसा करते हैं।

बागेश्वर के सरस मार्केट में चलने वाली बागनाथ डेयरी अपने शुद्ध और स्थानीय उत्पादों के लिए आसपास के क्षेत्र में जानी जाती है। इस डेयरी का संचालन प्रेमा कोरंगा द्वारा किया जाता है, जो ग्रामीण इलाकों से आने वाले दूध और दही का सही उपयोग कर रही हैं। इस डेयरी तक बागेश्वर के आसपास के विभिन्न गांवों से ताजा दूध और दही पहुंचाया जाता है, जिससे रोजाना बिल्कुल फ्रेश छाछ तैयार की जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि छाछ को हर सुबह बिल्कुल ताजा तैयार किया जाता है और फिर पूरे दिन ग्राहकों को बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाता है.

डेयरी संचालिका प्रेमा कोरंगा के मुताबिक, यहां बनने वाली छाछ पूरी तरह से शुद्ध स्थानीय दूध और दही से मथकर तैयार की जाती है। गर्मियों के मौसम में इस पारंपरिक पेय की मांग में और भी ज्यादा तेजी देखने को मिलती है। उन्होंने जानकारी दी कि इस डेयरी में रोजाना लगभग 20 से 30 लीटर छाछ आसानी से बिक जाती है। केवल स्थानीय निवासी ही नहीं, बल्कि बाजार में आने वाले तमाम दूसरे लोग भी इस ताजी और ठंडी छाछ को बड़े चाव से खरीदकर ले जाते हैं।

बागनाथ डेयरी में मिलने वाली इस छाछ की कीमत बहुत किफायती रखी गई है, जो करीब 30 रुपये प्रति लीटर है। कम दाम में बिल्कुल ताजा और मिलावटमुक्त स्थानीय पेय मिल जाने के कारण ग्राहक इसे बहुत पसंद कर रहे हैं। बाजार में बिकने वाले केमिकल और पैकेटबंद ठंडे पेय पदार्थों के मुकाबले कई लोग इस पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक छाछ को कहीं ज्यादा बेहतर विकल्प मानते हैं.

पारंपरिक तरीके से तैयार की जाने वाली इस छाछ को बनाने के लिए ताजे दही को अच्छी तरह मथा जाता है। इसके बाद इसमें जरूरत के हिसाब से पानी की उचित मात्रा मिलाई जाती है ताकि यह पीने में सही लगे, और फिर स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नमक आदि का इस्तेमाल किया जाता है। गर्मी के मौसम में छाछ शरीर को भीतर से ठंडक देने का एक बेहतरीन पारंपरिक जरिया मानी जाती है। इसमें दूध से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्वों के साथ-साथ भरपूर तरल पदार्थ भी होता है, जिससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन से बचने में काफी मदद मिलती है।

इस तरह के स्थानीय उत्पादों का बाजार में बिकना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। गांवों से निकलने वाले दूध के डेयरी तक पहुंचने से पशुपालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए एक पक्का बाजार मिल जाता है, जबकि शहर के उपभोक्ताओं को एकदम ताजा सामान मिल जाता है। बागनाथ डेयरी में तैयार होने वाली यह छाछ इसी मजबूत स्थानीय जुड़ाव की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है। अपनी उच्च ताजगी और किफायती दाम के कारण यह छाछ अब बागेश्वर के बाजार में अपनी एक अलग और खास पहचान बना चुकी है।

## इसका आप पर असर
**बागेश्वर में:** स्थानीय निवासियों और बाजार आने वाले लोगों को केवल 30 रुपये प्रति लीटर की किफायती कीमत पर बिल्कुल ताजा और शुद्ध पारंपरिक छाछ आसानी से मिल जाती है।

**भारत में:** ग्रामीण स्तर पर ऐसे स्थानीय डेयरी उत्पादों के चलन से पशुपालकों को सीधे बाजार मिलता है और ग्रामीण आजीविका व अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

## सवाल-जवाब

### 1. बागनाथ डेयरी कहाँ स्थित है?
बागनाथ डेयरी बागेश्वर के सरस मार्केट में स्थित है।

### 2. इस डेयरी में रोजाना कितनी छाछ बिक जाती है?
इस डेयरी में रोजाना करीब 20 से 30 लीटर छाछ आसानी से बिक जाती है।

### 3. इस छाछ की कीमत कितनी है?
बागनाथ डेयरी में तैयार होने वाली छाछ की कीमत करीब 30 रुपये प्रति लीटर रखी गई है।

### 4. यह छाछ किससे तैयार की जाती है?
यह छाछ पूरी तरह से स्थानीय गांवों से आने वाले दूध और दही से तैयार की जाती है।

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