# बहराइच की लालपरी ने रासायनिक यूरिया को किया किनारा, जैविक घनजीवामृत से बदल रही खेती की तस्वीर

> बहराइच जिले की महिला किसान लालपरी रासायनिक खादों से तौबा कर खुद घनजीवामृत बना रही हैं और सैकड़ों किसानों को जहर-मुक्त खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bahraich-ki-lalapari-ne-rasayanika-urea-ko-kiya-kinara-jaivika-ghandhwamrit-se-badala-rahi-kheti-ki-tasvira-33148 · **Language:** Hindi
**Tags:** बहराइच, जैविक खेती, कृषि सखी, घनजीवामृत, प्राकृतिक खाद, तेजवापुर

बहराइच जिले में खेती की पारंपरिक और जहरीली होती जा रही पद्धतियों के बीच एक प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले के तेजवापुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली मिर्जापुर ग्राम पंचायत की निवासी लालपरी ने रासायनिक उर्वरकों का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प ढूंढ निकाला है। कृषि सखी के रूप में कार्य कर रही लालपरी न केवल अपने खेतों में जैविक खेती कर रही हैं, बल्कि आसपास के सैकड़ों किसानों को भी इसके लिए प्रेरित और प्रशिक्षित कर रही हैं।

## गोबर और प्राकृतिक तत्वों से तैयार होती है खाद
कृषि में यूरिया और अन्य रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन की सेहत लगातार गिर रही है। इस समस्या से निपटने के लिए लालपरी ने घनजीवामृत का निर्माण शुरू किया है। यह पूरी तरह से गोबर और अन्य प्राकृतिक घटकों से तैयार की जाने वाली एक सूखी जैविक खाद है। फसलों के विकास के लिए इसे किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है और यह यूरिया का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है। इसके प्रयोग से फसलों की वृद्धि तेजी से होती है और कुल पैदावार में भी सुधार दर्ज किया जाता है।

## घनजीवामृत बनाने की सरल और प्रभावी विधि
रासायनिक खादों के विपरीत घनजीवामृत का इस्तेमाल करने से न तो जमीन खराब होती है और न ही पौधों को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है। महज 1 क्विंटल घनजीवामृत खाद करीब 5 बीघे जमीन के लिए पर्याप्त साबित होती है। कृषि सखी लालपरी के बताए गए नुस्खे के अनुसार इस खाद को तैयार करने के लिए 100 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और सूक्ष्मजीवों से युक्त थोड़ी सी जीवित मिट्टी की आवश्यकता होती है।

इन सभी सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिला लिया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण के छोटे-छोटे लड्डू बनाए जाते हैं या इसे धूप में सुखाया जाता है। अच्छी तरह सूख जाने के बाद इसे डंडे से कूटकर एक बारीक पाउडर के रूप में तैयार किया जाता है। इस तैयार जैविक खाद को बोरों में भरकर आगामी 6 महीनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर किसान इसे आसानी से अपने खेतों में छिड़ककर उपयोग में ला सकते हैं।

## किसानों को मिल रही है आत्मनिर्भरता की ट्रेनिंग
घनजीवामृत में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले फायदेमंद बैक्टीरिया मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं। बहराइच की रहने वाली लालपरी अब केवल अपने खेतों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी इस विशेष खाद को बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक अन्नदाताओं को रासायनिक जहर से मुक्त खेती की तरफ मोड़ना है, जिससे पर्यावरण और इंसानी सेहत दोनों को बचाया जा सके।

## इसका आप पर असर
यह पहल रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने वाले किसानों के लिए सीधे तौर पर लागत में कमी और मिट्टी की सेहत में सुधार लाती है।

- **भारत में:** देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते खर्च से जूझ रहे किसानों को इस तरह की कम लागत वाली जैविक तकनीकों से आर्थिक राहत मिलती है।
- **बहराइच में:** तेजवापुर और आसपास के स्थानीय किसानों को अब बाजार से महंगी खाद खरीदने के बजाय खुद जैविक खाद तैयार करने का व्यावहारिक विकल्प मिल रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की घटती उपजाऊ शक्ति और महंगे बाजारू उत्पादों के विकल्प की तलाश ने इस प्राकृतिक बदलाव को जन्म दिया है।

- **सीधा कारण:** खेतों में यूरिया और अन्य रसायनों के लगातार प्रयोग से जमीन बंजर होने की कगार पर पहुंच रही थी, जिससे जैविक विकल्पों की आवश्यकता पड़ी।
- **पारंपरिक ज्ञान:** गोबर, गोमूत्र और गुड़ जैसे स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक तत्वों का उपयोग सदियों से भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है।
- **जागरूकता का प्रसार:** कृषि सखी के रूप में प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण देने से पारंपरिक जैविक विधियों को पुनर्जीवित करने में मदद मिल रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. घनजीवामृत बनाने के लिए मुख्य रूप से किन चीजों की आवश्यकता होती है?
इसे बनाने के लिए 100 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और सूक्ष्मजीवों वाली थोड़ी सी जीवित मिट्टी चाहिए।

### 2. 1 क्विंटल घनजीवामृत खाद कितने खेतों के लिए पर्याप्त होती है?
1 क्विंटल घनजीवामृत खाद लगभग 5 बीघे खेत के लिए काफी होती है।

### 3. तैयार की गई खाद को कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है?
तैयार खाद को बोरों में भरकर 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

### 4. लालपरी किस क्षेत्र की रहने वाली हैं और वे क्या काम करती हैं?
लालपरी बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक की मिर्जापुर ग्राम पंचायत की रहने वाली एक कृषि सखी हैं।

## प्रेरणा और सबक
बहराइच की लालपरी की यह सफलता दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपने समुदाय में स्थायी बदलाव की नींव रख सकता है।

- **स्थानीय संसाधनों का उपयोग:** महंगे रासायनिक उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय आसपास मिलने वाली प्राकृतिक सामग्रियों से बेहतर विकल्प तैयार किए जा सकते हैं।
- **समुदाय का नेतृत्व:** खुद पहल करने के बाद अपने ज्ञान को दूसरों तक पहुंचाना पूरे क्षेत्र की कृषि स्थिति को बदल सकता है।
- **जहर-मुक्त जीवनशैली:** पर्यावरण और स्वास्थ्य को बचाने के लिए पारंपरिक और टिकाऊ तरीकों की ओर लौटना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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