बहराइच में धान की 20 किस्मों का वैज्ञानिक परीक्षण, स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल बीज चुनने की पहल बहराइच के कृषि विज्ञान केंद्र ने 1984 से जारी अपनी शोध परंपरा के तहत धान की 20 किस्मों का परीक्षण शुरू किया है, ताकि किसानों की लागत घटे और पैदावार बढ़ सके। बहराइच जिले के किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत में कमी लाने के उद्देश्य से स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। वर्ष 1984 में स्थापित यह केंद्र देश के सबसे पुराने कृषि अनुसंधान संस्थानों में से एक माना जाता है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने अपने फार्म पर धान की लगभग 20 अलग-अलग किस्मों की बुवाई की है। इस परीक्षण का मुख्य ध्येय बहराइच की विशिष्ट मिट्टी और यहां के मौसम के अनुसार सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली धान की प्रजातियों की पहचान करना है। स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुकूल किस्मों का परीक्षण वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह के अनुसार धान की 20 किस्मों को एक साथ लगाने का उद्देश्य यह देखना है कि कौन सा बीज स्थानीय भूमि और वातावरणीय परिस्थितियों में सबसे अधिक पैदावार देने में सक्षम है। वैज्ञानिक दल विभिन्न किस्मों की बढ़वार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मौसम के उतार-चढ़ाव को झेलने की शक्ति का सूक्ष्म अध्ययन कर रहा है। जब इस शोध के नतीजे पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे, तब परिणाम के आधार पर ही किसानों को उन खास किस्मों की खेती करने की सलाह दी जाएगी। किसानों के लिए दोहरे फायदे और लागत में कमी वैज्ञानिकों के इस अनूठे प्रयास से क्षेत्र के अन्नदाताओं को दो बड़े लाभ मिलेंगे। पहली बात यह कि स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल धान की प्रजाति चुनने से फसलों में बेवजह कीटनाशक, अतिरिक्त खाद और अत्यधिक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे किसानों का खेती पर होने वाला फिजूल खर्च काफी हद तक कम होगा। दूसरी ओर, सही और उन्नत किस्म का चयन प्रति एकड़ फसल उत्पादन को बढ़ाएगा। जब पैदावार अधिक होगी और लागत कम लगेगी, तो स्वाभाविक रूप से किसानों का शुद्ध मुनाफा और वार्षिक आमदनी बढ़ेगी। भविष्य का मार्गदर्शन और दीर्घकालिक सहयोग वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र का मूल ध्येय किसानों को एक ऐसी उन्नत और सक्षम धान की किस्म उपलब्ध कराना है, जिससे वे कम से कम निवेश में अधिकतम मुनाफा कमा सकें। परीक्षण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें मिट्टी की प्रकृति के अनुसार सर्वश्रेष्ठ किस्मों की जानकारी साझा की जाएगी। कृषि विज्ञान केंद्र न केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि किसानों के साथ निरंतर जुड़कर उन्हें आधुनिक और समृद्ध किसान बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। कृषि से जुड़ी किसी भी समस्या या सलाह के लिए किसान भाई किसी भी समय केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा मिट्टी और मौसम के अनुसार अनुसंधान मॉडल को बढ़ावा देने से देशभर के किसानों को वैज्ञानिक खेती की नई दिशा मिलती है। • बहराइच में: 20 धान किस्मों के सफल परीक्षण से स्थानीय किसानों का खाद, पानी और कीटनाशक पर खर्च घटेगा तथा प्रति एकड़ पैदावार बढ़ेगी। सवाल-जवाब 1. बहराइच कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना कब हुई थी? बहराइच में कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना वर्ष 1984 में हुई थी और यह भारत के सबसे पुराने कृषि विज्ञान केंद्रों में से एक है। 2. कृषि विज्ञान केंद्र में धान की कितनी किस्मों का परीक्षण किया जा रहा है? संस्थान के वैज्ञानिकों ने बहराइच की मिट्टी और जलवायु के अनुकूलन की जांच के लिए धान की लगभग 20 अलग-अलग किस्मों की बुवाई की है। 3. धान की 20 किस्मों को एक साथ बोने का मुख्य उद्देश्य क्या है? मुख्य उद्देश्य यह पहचानना है कि बहराइच की विशेष भूमि और मौसम में कौन सी प्रजाति न्यूनतम लागत में सबसे अधिक पैदावार देने में सक्षम है। 4. इस वैज्ञानिक परीक्षण से बहराइच के किसानों को क्या लाभ होगा? उपयुक्त किस्म चुनने से अनावश्यक खाद, पानी और कीटनाशकों की खपत कम होगी, जिससे लागत घटेगी और प्रति एकड़ फसल उत्पादन बढ़ने से मुनाफा अधिक होगा। 5. किसानों को इन किस्मों की सिफारिश कब की जाएगी? वैज्ञानिक परीक्षणों के पूर्ण होने और परिणाम सामने आने के बाद ही किसानों को उनकी मिट्टी के हिसाब से सबसे उपयुक्त धान की किस्म की सिफारिश की जाएगी। https://trendkia.com/business/bahraich-men-dhana-ki-20-kismon-ka-vaijnanika-parikshana-sthaniya-mitti-aura-jalavayu-ke-anukula-bija-chunane-ki-pahala-11833 TrendKia — Har trend, sabse pehle.