# बहराइच में सुगंधित काला नमक धान उगा रहे किसानों को सही मार्केटिंग से मिल सकता है तीन गुना तक अधिक मुनाफा

> बहराइच में काला नमक धान की खेती करने वाले किसान उचित बाजार जानकारी के अभाव में औने-पौने दाम पर फसल बेच रहे हैं, जबकि सीधी मार्केटिंग से वे भारी मुनाफा कमा सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bahraich-men-sugndhita-kala-namaka-dhana-uga-rahe-kisanon-ko-sahi-marketinga-se-mila-sakata-hai-tina-guna-taka-adhika-munapha-48528 · **Language:** Hindi
**Tags:** काला नमक धान, बहराइच, कृषि विज्ञान केंद्र, धान की खेती, किसान की आमदनी, कृषि विपणन

बहराइच जिले में खेतों के भीतर धान की बालियां अब तेजी से पकने की दिशा में बढ़ रही हैं। इस बीच विशेष सुगंध और औषधीय गुणों से भरपूर काला नमक धान पैदा करने वाले काश्तकारों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका सिंह ने कई उपयोगी जानकारियां साझा की हैं। बहराइच के किसानों ने पिछले एक से दो वर्षों के दौरान ही इस पारंपरिक किस्म की बुवाई में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि पैदावार हाथ में आने के बाद सही मंडी, उचित खरीददार और बाजार भाव की सटीक समझ न होने के कारण कई उत्पादक अपनी उपज बेहद कम दामों में बेचने के लिए विवश हो जाते हैं।

## स्वास्थ्य के लिए वरदान और स्वाद में लाजवाब
कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी डॉ. प्रियंका सिंह के मुताबिक काला नमक धान की मांग आम उपभोक्ता वर्ग के बीच बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे मुख्यतः तीन प्रमुख खूबियां शामिल हैं। सबसे पहली बात यह है कि यह चावल मधुमेह के मरीजों के लिए बेहद लाभकारी और स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। इसके अलावा इसमें एक कुदरती और मन को भाने वाली महक होती है, जो पकाने पर चारों तरफ फैल जाती है। तीसरा बड़ा कारण इसका विशिष्ट स्वाद है, जो रोजमर्रा खाए जाने वाले सामान्य चावल की तुलना में काफी उम्दा होता है। इन्हीं खूबियों के चलते घरेलू स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी कीमत में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है।

## जानकारी की कमी से उत्पादकों को उठाना पड़ रहा भारी घाटा
सही बाजार रणनीति न होने की वजह से काश्तकारों को अपनी कड़ी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। फसल खलिहान से निकलते ही अधिकांश किसान पैसों की तात्कालिक जरूरत या जानकारी के अभाव में धान को 6000 रुपये से लेकर 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को सौंप देते हैं। इसके विपरीत जब यही अनाज प्रसंस्कृत होकर बाजार में खुदरा स्तर पर पहुंचता है, तब यह 200 रुपये से 250 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है। इस हिसाब से तैयार चावल का मूल्य 20,000 रुपये से 25,000 रुपये प्रति क्विंटल तक जा पहुंचता है। बिचौलियों के हाथों होने वाले इस भारी अंतर को अगर व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जाए, तो किसानों की जेब में वास्तविक मुनाफा पहुंच सकता है।

## मंडी की नब्ज पहचानें और सीधे उपभोक्ता तक पहुंचें
किसानों को अपनी उपज का वाजिब दाम दिलाने के लिए कृषि विशेषज्ञ ने दो बेहद अहम रणनीतियों पर अमल करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि किसानों को खुद एक सामान्य ग्राहक बनकर स्थानीय और बड़े बाजारों का दौरा करना चाहिए। जब वे खुद बाजार में जाकर यह देखेंगे कि काला नमक चावल किस भाव पर आम खरीदारों को दिया जा रहा है, तब उन्हें अपनी उपज की वास्तविक ताकत और बाजार मूल्य का सटीक अंदाजा लग सकेगा।

इसके अलावा दूसरी अहम जरूरत खरीददार और किसान के बीच की खाई को पाटने की है। जब तक बिचौलियों का दखल बना रहेगा, तब तक अधिकतम मुनाफा व्यापारियों की जेब में ही जाएगा। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार किसान चाहें तो संबंधित सरकारी विभागों से तालमेल बैठाकर अपनी उपज की खुद ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग करा सकते हैं। अपने उत्पाद को सीधे बाजार और उपभोक्ताओं तक उतारने से बिचौलियों की निर्भरता समाप्त हो जाएगी, जिससे काश्तकारों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी तय है।

## इसका आप पर असर
काला नमक धान की खेती करने वाले काश्तकारों के लिए यह सलाह सीधे तौर पर उनकी फसल के दाम बढ़ाने और बिचौलियों के चंगुल से बचने का व्यावहारिक रास्ता दिखाती है।

- **बहराइच में:** जिले के काश्तकार अपनी उपज को 6,000 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के सस्ते दाम पर बेचने के बजाय सीधे खुदरा दरों पर बेच सकते हैं। इससे उन्हें बाजार में प्रति क्विंटल 20,000 से 25,000 रुपये तक की ऊंची कीमत हासिल करने का अवसर मिलेगा।
- **भारत में:** धान उत्पादक पारंपरिक मंडियों पर पूरी तरह निर्भर रहने के स्थान पर पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जुड़कर अपने उत्पाद का मूल्य संवर्धन कर सकते हैं। इससे देश भर के किसान सीधे उपभोक्ता नेटवर्क से जुड़कर कृषि क्षेत्र में अपनी कमाई कई गुना बढ़ा सकते हैं।
- **उपभोक्ताओं के लिए:** सीधे किसानों से खरीदारी की व्यवस्था बनने पर आम लोगों और मधुमेह के मरीजों को शुद्ध सुगंधित चावल वाजिब दाम पर उपलब्ध हो सकेगा। इससे गुणवत्ता की गारंटी मिलेगी और बाजार में मिलने वाली मिलावट से भी बचाव होगा।
- **कृषि विभागों से जुड़ाव:** किसानों को अपनी उपज की आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग करने के लिए संबंधित सरकारी विभागों से संपर्क स्थापित करना होगा। समय रहते इन योजनाओं की जानकारी लेकर किसान आगामी कटाई सत्र में ही बेहतर मुनाफा सुनिश्चित कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
बहराइच के किसानों द्वारा काला नमक धान की खेती हाल ही में शुरू की गई है, जिसके चलते वे इसके वास्तविक बाजार मूल्य और बिक्री तंत्र से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। उचित मार्गदर्शन के अभाव में वे अपनी उपज औने-पौने दामों में बिचौलियों को सौंप रहे हैं।

- **हालिया शुरुआत:** बहराइच के किसानों ने काला नमक धान की खेती बीते एक-दो वर्षों के भीतर ही शुरू की है। नई किस्म होने के चलते स्थानीय स्तर पर किसानों के पास स्थापित खरीदार नेटवर्क और मूल्य निर्धारण की स्पष्ट समझ उपलब्ध नहीं थी।
- **बाजार जागरूकता का अभाव:** फसल तैयार होते ही काश्तकार जल्दबाजी में इसे 6,000 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच देते हैं। उन्हें इस बात की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती कि यही चावल बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।
- **बिचौलियों की मध्यस्थता:** किसान और अंतिम उपभोक्ता के बीच सीधी पहुंच न होने के कारण मध्यस्थ सारा मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों के स्तर पर पैकेजिंग और ब्रांडिंग की सुविधा न होने से वे थोक व्यापारियों को सस्ती उपज बेचने को मजबूर हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. काला नमक धान की बाजार में इतनी अधिक मांग क्यों है?
यह चावल मधुमेह के मरीजों के लिए गुणकारी माना जाता है, इसमें प्राकृतिक सुगंध होती है और इसका स्वाद आम चावल से काफी बेहतर होता है।

### 2. बहराइच के किसान अपनी उपज किस दर पर बेच रहे हैं?
जागरूकता की कमी के कारण किसान तैयार धान को 6,000 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर बेच रहे हैं।

### 3. बाजार में काला नमक चावल का खुदरा मूल्य कितना है?
बाजार में यह चावल 200 से 250 रुपये प्रति किलो यानी 20,000 से 25,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकता है।

### 4. कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को क्या सलाह दी है?
डॉ. प्रियंका सिंह ने किसानों को खुद बाजार जाकर दरें समझने और सरकारी विभागों के सहयोग से अपनी ब्रांडिंग व पैकेजिंग कर सीधे बेचने की सलाह दी है।

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