# बैंगन की 6 खास किस्मों से राजस्थान के किसानों को मिलेगा हेक्टेयर पर 650 क्विंटल तक उत्पादन

> राजस्थान कृषि महाविद्यालय के मुताबिक बैंगन की छह उन्नत और संकर किस्में राज्य की जलवायु में 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती हैं, जिससे किसानों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/baingana-ki-6-khasa-kismon-se-rajasthan-ke-kisanon-ko-milega-hekteyara-para-650-kvintala-taka-utpadana-4504 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंगन की खेती, राजस्थान किसान, उन्नत किस्में, कृषि तकनीक, सब्जी की खेती, फसल उत्पादन

राजस्थान में बैंगन की खेती अब किसानों के लिए फायदे का सौदा बनती जा रही है, बशर्ते वे सही किस्म का चुनाव करें. राजस्थान कृषि महाविद्यालय की जानकारी के मुताबिक राज्य की जलवायु में बैंगन की कुछ उन्नत और संकर किस्में ऐसी हैं, जो प्रति हेक्टेयर 350 से 650 क्विंटल तक उपज दे सकती हैं. इनमें से कई किस्में रोग और कीटों से लड़ने में भी सक्षम हैं, जिससे फसल का नुकसान घटता है और किसानों की कमाई बढ़ती है.

## सही किस्म चुनना ही सफलता की पहली शर्त
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बैंगन की खेती में मुनाफा कमाने के लिए सबसे पहले सही किस्म का चुनाव करना जरूरी है. प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, सही समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक और सही सिंचाई व्यवस्था अपनाकर किसान पैदावार के साथ-साथ फल की गुणवत्ता भी बेहतर बना सकते हैं.

## रसिका और शामली, खरीफ सीजन की दो भरोसेमंद किस्में
खरीफ सीजन में रसिका और शामली को हाईब्रिड किस्मों में सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. रसिका किस्म के फल लंबे और देखने में आकर्षक होते हैं, और यह किस्म 400 से 580 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है. वहीं शामली किस्म की उत्पादन क्षमता इससे भी ज्यादा है, यह 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देने में सक्षम है. दोनों ही किस्मों की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर सिर्फ 150 से 200 ग्राम बीज ही काफी होता है, जिससे बीज की लागत भी ज्यादा नहीं बढ़ती.

## गोल और छोटे बैंगन के लिए VNR-51C बेहतर विकल्प
जिन इलाकों में बाजार में छोटे और गोल आकार के बैंगन की मांग ज्यादा रहती है, वहां के किसानों के लिए VNR-51C किस्म फायदेमंद साबित हो सकती है. यह हाईब्रिड किस्म करीब 450 से 500 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है. इसके फल आकार में लगभग एक जैसे निकलते हैं, इसलिए बाजार में इन्हें अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद रहती है. इसे भी खरीफ मौसम में आसानी से उगाया जा सकता है और इसके लिए भी प्रति हेक्टेयर 150 से 200 ग्राम बीज पर्याप्त रहता है. बेहतर पैदावार और गुणवत्ता की वजह से यह किस्म किसानों में तेजी से पसंद की जा रही है.

## तीनों मौसम में खेती चाहने वालों के लिए HABH-8
जो किसान साल भर अलग-अलग मौसम में बैंगन उगाना चाहते हैं, उनके लिए HABH-8 किस्म एक अच्छा विकल्प है. इसकी खासियत यह है कि इसे खरीफ, रबी और जायद, तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है. छोटे और गोल फल देने वाली यह किस्म 375 से 544 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है.

## बीमारियों से लड़ने में माहिर है PB-70
PB-70 किस्म को खासतौर पर इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जाना जाता है. यह फोमोप्सिस झुलसा, बैक्टीरियल विल्ट के साथ-साथ तना और फल छेदक जैसे प्रमुख रोगों व कीटों के खिलाफ काफी हद तक प्रतिरोधी है, जिससे फसल का नुकसान कम होता है. इसकी उत्पादन क्षमता करीब 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और इसे भी खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है.

## गहरे बैंगनी रंग और लंबे फलों वाली DBL-02
लंबे आकार और गहरे बैंगनी रंग के फलों की वजह से DBL-02 किस्म भी राजस्थान के किसानों के बीच अच्छा विकल्प मानी जाती है. इसकी उत्पादन क्षमता 370 से 390 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के बीच रहती है. यह किस्म खरीफ और वसंत मौसम में अच्छी पैदावार देती है. फलों का आकर्षक रंग और आकार बाजार में इनकी मांग बनाए रखता है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है.

## सिर्फ अच्छी किस्म काफी नहीं, वैज्ञानिक तरीके भी जरूरी
राजस्थान कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञों के मुताबिक अच्छी किस्म के साथ-साथ खेती का तरीका वैज्ञानिक होना भी उतना ही जरूरी है. खेत की सही तैयारी, समय पर पौधरोपण, खाद और उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल, नियमित सिंचाई और रोग-कीट पर पैनी नजर रखने से उत्पादन में साफ बढ़ोतरी देखी जा सकती है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान हमेशा प्रमाणित स्रोतों से ही बीज खरीदें और अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर ही खेती करें.

राजस्थान में सब्जियों की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में बैंगन की इन उन्नत किस्मों की खेती किसानों के लिए मुनाफे का जरिया बन सकती है. अगर किसान अपनी जलवायु और बाजार की मांग के हिसाब से इन छह किस्मों में से सही किस्म चुनें और वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो उन्हें ज्यादा उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता के फल और अच्छा मुनाफा मिल सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ राज्य में सब्जी उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी.

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** बैंगन जैसी सब्जियों की उन्नत किस्मों से उत्पादन बढ़ने पर बाजार में आपूर्ति बेहतर होती है, जिसका असर देशभर में सब्जियों की कीमतों पर पड़ सकता है.
- **राजस्थान में:** राज्य के किसान अगर इन छह उन्नत किस्मों में से सही किस्म चुनकर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो कम लागत में ज्यादा उपज लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. राजस्थान में बैंगन की कौन सी 6 उन्नत किस्में बताई गई हैं?
रसिका, शामली, VNR-51C, HABH-8, PB-70 और DBL-02, ये छह किस्में राजस्थान की जलवायु के लिए उपयुक्त मानी गई हैं.

### 2. बैंगन की खेती से हेक्टेयर पर अधिकतम कितनी पैदावार मिल सकती है?
किस्म के आधार पर उत्पादन क्षमता 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है.

### 3. रसिका और शामली किस्मों की पैदावार क्षमता कितनी है?
रसिका 400 से 580 क्विंटल और शामली 350 से 650 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है.

### 4. कौन सी किस्म रोगों के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी बताई गई है?
PB-70 किस्म फोमोप्सिस झुलसा, बैक्टीरियल विल्ट और तना-फल छेदक जैसे प्रमुख रोगों-कीटों के खिलाफ काफी हद तक प्रतिरोधी है.

### 5. कौन सी किस्में तीनों मौसम, खरीफ, रबी और जायद में उगाई जा सकती हैं?
HABH-8 और PB-70 दोनों किस्मों को खरीफ, रबी और जायद तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है.

### 6. इन किस्मों की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर कितने बीज की जरूरत होती है?
रसिका, शामली और VNR-51C किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 150 से 200 ग्राम बीज पर्याप्त बताया गया है.

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