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  "type": "article",
  "title": "बैंक चेक पर धनराशि दर्ज करने के बाद ओनली लिखना क्यों माना जाता है बेहद जरूरी",
  "summary": "चेक में राशि भरने के बाद ओनली शब्द लिखना केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जालसाजी और अनधिकृत बदलाव रोकने का एक अहम सुरक्षा कवच है।",
  "content": "बैंकिंग लेन-देन में चेक जारी करते समय अथवा किसी से चेक के जरिए भुगतान प्राप्त करते समय आपने गौर किया होगा कि रकम दर्ज करने के तुरंत बाद 'ओनली' शब्द लिखा जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी चेक पर 10 हजार की धनराशि भरी जाती है, तो शब्दों में इसे '10 हजार ओनली' के रूप में अंकित किया जाता है। अधिकांश लोग इसे एक पुरानी बैंकिंग औपचारिकता या महज कागजी आदत मानकर अपनाते रहते हैं, किंतु इस प्रक्रिया के पीछे एक ठोस वित्तीय सुरक्षा कारण मौजूद है जो खाताधारक को भारी आर्थिक नुकसान से बचाता है।\n\nरकम के बाद ओनली जोड़ने का मुख्य सुरक्षा उद्देश्य\nजब भी कोई खाताधारक चेक की पर्ची पर शब्दों में राशि अंकित करता है, तो शब्दों अथवा अक्षरों के बीच खाली जगह छूट जाने की संभावना बनी रहती है। यदि शब्दों के अंत में कोई सीमा रेखा तय न की जाए, तो कोई भी असामाजिक तत्व उस खाली जगह का अनुचित लाभ उठाकर अतिरिक्त शब्द जोड़ सकता है और भुगतान की राशि को कई गुना बढ़ा सकता है। शब्दों के अंत में 'ओनली' अथवा हिंदी में 'मात्र' लिखने से वाक्य पूरी तरह बंद हो जाता है। इसका स्पष्ट संदेश यह होता है कि लिखी गई राशि अंतिम है और इसमें आगे किसी भी प्रकार का नया शब्द जोड़ना संभव नहीं है। वित्तीय संस्थान हमेशा यह परामर्श देते हैं कि शब्दों में दर्ज विवरण अंकों में लिखे आंकड़े से हूबहू मेल खाना चाहिए, ताकि दोनों के मिलान से किसी विसंगति की गुंजाइश न बचे।\n\nवित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली और स्पष्ट निर्देश\nयद्यपि भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से चेक पर 'ओनली' शब्द अनिवार्य रूप से लिखने को लेकर कोई विशिष्ट पृथक दिशानिर्देश नहीं जारी किया गया है, तथापि निजी क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों जैसे एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक ने अपनी मानक ग्राहक सेवा नियमावली में इसे स्पष्ट रूप से शामिल किया हुआ है। ये बैंक अपने खाताधारकों को यह ताकीद करते हैं कि शब्दों में धनराशि लिखने के पश्चात अंत में अनिवार्य तौर पर 'ओनली' दर्ज करें। वर्तमान में लगभग सभी वाणिज्यिक बैंकों ने इसे एक अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल के तौर पर अपनी सामान्य कार्यप्रणाली में अंगीकार कर लिया है। बैंक यह भी सुनिश्चित कराते हैं कि चेक जारीकर्ता शब्दों एवं अंकों, दोनों ही प्रभागों में शुद्धता के साथ एक समान राशि दर्ज करे ताकि किसी तीसरे व्यक्ति के लिए उसमें हेरफेर करना पूरी तरह असंभव हो जाए।\n\nहस्ताक्षर से पूर्व आवश्यक सावधानियों की सूची\nचेक पर अंतिम रूप से हस्ताक्षर करने और उसे आहरणकर्ता को सौंपने से पहले खाताधारकों को कुछ अत्यंत आवश्यक बातों की पड़ताल अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि चेक खारिज होने अथवा धोखाधड़ी की नौबत न आए।\n\n• खाली स्थान की जांच: चेक पर पेई का नाम और शब्दों में रकम लिखने के बाद बची हुई खाली जगह पर एक सीधी लकीर खींच देनी चाहिए, ताकि कोई नया अक्षर या अंक वहां न डाला जा सके।\n• विवरणों का सत्यापन: हस्ताक्षर करने से पहले यह भली-भांति जांच लें कि भुगतान पाने वाले का नाम, लेन-देन की तिथि और भुगतान की जाने वाली राशि पूरी तरह सही दर्ज है।\n• अंकों और शब्दों का मिलान: चेक के बॉक्स में अंकों में भरी गई संख्या और मुख्य पंक्ति में शब्दों में लिखी गई धनराशि एक दूसरे से पूरी तरह मेल खानी चाहिए।\n• काट-छांट से बचाव: चेक पर किसी भी प्रकार की ओवरराइटिंग या स्याही की लीपापोती नहीं होनी चाहिए, क्योंकि मामूली सी गलती या दोहरी लिखावट मिलने पर बैंक चेक को तुरंत निरस्त कर सकते हैं।\n\nचेक जारी करते समय सभी निर्धारित प्रविष्टियों को सावधानीपूर्वक और स्पष्ट अक्षरों में भरने से किसी भी संभावित वित्तीय छेड़छाड़ अथवा जालसाजी का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nचेक जारी करते समय छोटी सी लापरवाही भी आपके बैंक खाते में अनाधिकृत कटौती अथवा वित्तीय हेरफेर का कारण बन सकती है।\n\n• खाताधारकों के लिए: चेक में रकम दर्ज करने के बाद ओनली लिखने से किसी भी व्यक्ति द्वारा अतिरिक्त अंक या शब्द जोड़कर राशि बढ़ाने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। जब भी आप किसी को चेक सौंपें, यह सुनिश्चित करें कि राशि के तुरंत बाद ओनली लिखा हो ताकि आपका बैंक खाता सुरक्षित रहे।\n• लेन-देन के समय: अंकों और शब्दों में दर्ज राशि में अंतर पाए जाने पर बैंक आपके चेक को भुगतान किए बिना सीधे अस्वीकार कर सकते हैं। समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए दोनों जगहों पर एक समान रकम दर्ज करना बेहद आवश्यक है।\n• हस्ताक्षर से पहले: खाली जगहों पर सीधी रेखा खींचने और ओवरराइटिंग से बचने की आदत चेक बाउंस होने के प्रशासनिक झंझट से बचाती है। किसी भी गलती की स्थिति में पुराना चेक रद्द कर नया चेक जारी करना अधिक सुरक्षित विकल्प है।\n• बैंकिंग सुरक्षा के लिए: निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के इन सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने से धोखाधड़ी का जोखिम लगभग शून्य हो जाता है। यह छोटी सी सावधानी खाताधारक को बड़े कानूनी और वित्तीय विवादों से बचाती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nचेक में खाली स्थान छोड़े जाने के कारण पूर्व में कई बार जालसाजों द्वारा शब्दों और अंकों में बदलाव कर बैंकों से अनधिकृत निकासी के मामले सामने आते रहे हैं। इस सुरक्षा जोखिम को समाप्त करने के उद्देश्य से ही बैंकों ने इस अभ्यास को अपनी कार्यप्रणाली का मुख्य हिस्सा बनाया है।\n\n• हेराफेरी की आशंका: चेक पर शब्दों के बीच अथवा अंत में छोड़ी गई खाली जगह पर धोखेबाज अतिरिक्त शब्द जोड़कर 10 हजार को एक लाख में बदलने का प्रयास कर सकते थे। अंत में ओनली दर्ज कर देने से यह स्पष्ट हो जाता है कि इसके आगे कोई अन्य राशि नहीं जोड़ी जा सकती।\n• बैंकों के आंतरिक नियम: एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक जैसे संस्थानों ने खाताधारकों को वित्तीय नुकसान से सुरक्षित रखने के लिए इसे अपनी मानक चेक गाइडलाइन का हिस्सा बनाया। धीरे-धीरे सभी बैंकों ने इसे ग्राहकों के लिए एक जरूरी प्रथा के रूप में लागू कर दिया।\n• अंक और शब्द का विरोधाभास: अंकों की तुलना में शब्दों में दर्ज राशि को कानूनी रूप से अधिक प्रामाणिक माना जाता है, इसलिए शब्दों के अंत को सुरक्षित करना अनिवार्य हो गया। इस नियम के पालन से चेक क्लीयरिंग के दौरान किसी भी प्रकार का संशय उत्पन्न नहीं होता।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चेक पर रकम लिखने के बाद ओनली लिखना क्यों जरूरी है?\nयह चेक में सुरक्षा कारणों से लिखा जाता है ताकि कोई भी व्यक्ति खाली जगह का फायदा उठाकर राशि में अतिरिक्त शब्द जोड़कर हेरफेर न कर सके।\n\n2. क्या भारतीय रिज़र्व बैंक ने चेक पर ओनली लिखना अनिवार्य किया है?\nइस संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक की कोई विशिष्ट गाइडलाइन नहीं है, लेकिन एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक जैसे बैंक अपने ग्राहकों को इसका स्पष्ट निर्देश देते हैं।\n\n3. चेक पर शब्दों और अंकों में लिखी राशि अलग होने पर क्या होगा?\nचेक पर शब्दों और अंकों में लिखी राशि आपस में मेल खानी चाहिए, अन्यथा विसंगति पाए जाने पर बैंक चेक को अस्वीकार या कैंसिल कर सकता है।\n\n4. चेक पर हस्ताक्षर करने से पहले किन मुख्य बातों की जांच करनी चाहिए?\nहस्ताक्षर से पहले पेई का नाम, तारीख, अंकों व शब्दों में दर्ज राशि की शुद्धता जांच लें और सुनिश्चित करें कि चेक पर कहीं खाली जगह या ओवरराइटिंग न हो।",
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