बैंकिंग जगत की लीडरशिप नर्सरी: शीर्ष वित्तीय संस्थानों की कमान संभाल रहे हैं आईसीआईसीआई बैंक के दिग्गज एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक से लेकर जेपी मॉर्गन तक, देश और दुनिया के कई बड़े वित्तीय संस्थानों के शीर्ष पदों पर आईसीआईसीआई बैंक में काम कर चुके अनुभवी अधिकारी मौजूद हैं। भारतीय वित्तीय क्षेत्र में जब भी शीर्ष प्रबंधन और मजबूत कार्यशैली की चर्चा होती है, आईसीआईसीआई बैंक की प्रतिभा नर्सरी का उदाहरण सबसे आगे रखा जाता है। देश के प्रमुख निजी बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, परिसंपत्ति प्रबंधन फर्मों और नियामक संस्थाओं के शीर्ष नेतृत्व पर नजर डालें तो वहां आईसीआईसीआई बैंक से निकले अधिकारियों की एक लंबी फेहरिस्त दिखाई देती है। संस्थान ने अपने कामकाज के जरिए ऐसे दिग्गजों को तैयार किया है जो आज भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर की दिग्गज वित्तीय संस्थाओं को दिशा दे रहे हैं। निजी बैंकिंग के नए नेतृत्व में आईसीआईसीआई के पूर्व दिग्गजों का दबदबा भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अनूप बाग्ची 27 अक्टूबर, 2026 से एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी और सीईओ) का कार्यभार संभालेंगे। बाग्ची ने अपने करियर के लगभग 30 साल आईसीआईसीआई समूह में गुजारे हैं। इस दौरान उन्होंने आईसीआईसीआई ग्रुप बिजनेस के प्रबंधन के अलावा आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया है। इसी कड़ी में एक और प्रमुख निजी बैंक कोटक महिंद्रा बैंक ने भी अपने शीर्ष नेतृत्व के लिए संस्थान के पूर्व अनुभवी चेहरे पर भरोसा जताया है। अनूप कुमार साहा को 1 जनवरी, 2027 से कोटक महिंद्रा बैंक का एमडी और सीईओ बनाया गया है। साहा ने लगभग 14 वर्षों तक आईसीआईसीआई बैंक में विभिन्न वरिष्ठ पदों पर कार्य किया था। इसके अलावा उन्होंने वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस में भी एमडी और सीईओ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली थी। एक्सिस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को नई ऊंचाई देने वाले चेहरे निजी बैंकिंग क्षेत्र में शिखा शर्मा की पहचान एक मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता के रूप में रही है। शिखा ने आईसीआईसीआई समूह में करीब तीन दशक तक अपनी सेवाएं दीं, जिसमें आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ का नेतृत्व भी शामिल रहा। इसके बाद उन्होंने साल 2009 से लेकर 2018 तक एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ पद की कमान संभाली और बैंक के कारोबार को एक नया विस्तार दिया। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के एमडी और सीईओ वी वैद्यनाथन की कहानी भी आईसीआईसीआई बैंक के सशक्त परिवेश से जुड़ी हुई है। चेन्नई में जन्मे वैद्यनाथन के जीवन में एक दौर ऐसा भी था जब उनके पास नौकरी के साक्षात्कार के लिए ट्रेन का टिकट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल के लाइफ इंश्योरेंस विभाग में सीईओ की जिम्मेदारी संभाली थी और एक्सिस बैंक में खुदरा ऋण तथा कार्ड विभाग को भी लंबे समय तक संभाला था। आज वह देश के तेजी से उभरते निजी बैंक के शीर्ष पर मजबूती से खड़े हैं। वित्तीय सेवाओं और गैर-बैंकिंग कंपनियों में नेतृत्व आईआईटी दिल्ली से शिक्षा प्राप्त करने वाले राजीव सबरवाल के पास बैंकिंग और वित्त जगत में काम करने का लगभग 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। सबरवाल ने साल 2010 से 2017 तक आईसीआईसीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने खुदरा, ग्रामीण और डिजिटल बैंकिंग क्षेत्रों की देखरेख की। इसके बाद उन्होंने साल 2018 में टाटा कैपिटल के एमडी और सीईओ के रूप में कमान संभाली। आदित्य बिड़ला कैपिटल की कमान संभाल रहीं विशाखा मूले भी इसी संस्थान की देन हैं। मुंबई विश्वविद्यालय से बीकॉम पूरा करने के बाद उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में काम किया और आईसीआईसीआई बैंक में एक लंबा कार्यकाल बिताया। साल 2022 में उन्हें आदित्य बिड़ला कैपिटल का एमडी और सीईओ बनाया गया, जहां वह वर्तमान में 85 हजार करोड़ रुपये की विशाल वित्तीय सेवा कंपनी का संचालन कर रही हैं। नियामक संस्था से लेकर वैश्विक निवेश बैंकों तक उपस्थिति संस्थान से निकले अधिकारियों का प्रभाव केवल वाणिज्यिक बैंकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नियामक और वैश्विक स्तर पर भी स्पष्ट दिखा। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन रहीं माधबी पुरी बुच ने भी पूर्व में आईसीआईसीआई बैंक में बतौर कार्यकारी निदेशक कार्य किया था। इसके अलावा वह सेबी की पूर्णकालिक सदस्य भी रहीं। उनका कार्यकाल इस बात को प्रमाणित करता है कि यहां से निकली प्रतिभाओं ने जटिल वित्तीय व विनियामक व्यवस्थाओं में भी बड़ी भूमिका निभाई है। वैश्विक स्तर पर वॉल स्ट्रीट की शीर्ष वित्तीय संस्थाओं में भी पूर्व अधिकारियों का प्रभाव दिखता है। संजोय चटर्जी, जो पहले आईसीआईसीआई बैंक के पूर्णकालिक निदेशक थे, वर्तमान में गोल्डमैन सॉक्स (इंडिया सिक्योरिटीज) के चेयरमैन और सीईओ हैं। इसी तरह कल्पना मोरपरिया ने जेपी मॉर्गन में बड़ा पद हासिल किया और वह जेपी मॉर्गन के भारतीय ऑपरेशंस की कमान संभालती हैं। इनके अतिरिक्त कई अन्य प्रमुख चेहरे भी वित्तीय दुनिया में शीर्ष स्तर पर सक्रिय हैं। इनमें कोटक एसेट के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह, मल्टीपल्स की एमडी और सीईओ रेनुका रामनाथ तथा स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की एमडी जरीन दारूवाला शामिल हैं। यह सभी प्रतिष्ठित चेहरे किसी न किसी दौर में आईसीआईसीआई बैंक के साथ जुड़े रहे और आज स्वतंत्र रूप से भारतीय व अंतरराष्ट्रीय वित्तीय जगत को नई दिशा दे रहे हैं। इसका आप पर असर वित्तीय संस्थानों के शीर्ष प्रबंधन में हो रहे इन बड़े बदलावों और अनुभवी नेतृत्व का सीधा असर आम बैंकिंग उपभोक्ताओं और निवेशकों की सेवाओं पर पड़ता है। • बैंकिंग सेवाओं पर असर: अनुभवी नेतृत्व आने से विभिन्न बैंकों में खुदरा कर्ज, डिजिटल बैंकिंग और ग्राहक सेवाओं की रणनीतियों में स्थिरता आती है। इससे आम खाताधारकों को नई तकनीकों और बेहतर बैंकिंग उत्पादों का लाभ मिल सकता है। • शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड: अनुभवी दिग्गजों के हाथों में कमान होने से सूचीबद्ध बैंकों और गैर-बैंकिंग कंपनियों के संचालन पर निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। परिसंपत्ति प्रबंधन फर्मों में मजबूत प्रबंधन निवेशकों की पूंजी की सुरक्षा और रिटर्न को प्रभावित करता है। • ऋण और वित्तीय उत्पाद: खुदरा और ग्रामीण वित्तीय क्षेत्रों के अनुभवी अधिकारियों के शीर्ष पर रहने से व्यक्तिगत ऋण, आवास ऋण और एमएसएमई कर्ज के नियम अधिक व्यवहारिक बन सकते हैं। इससे सामान्य ग्राहकों को अपनी जरूरतों के अनुसार ऋण प्राप्त करने में सहूलियत होती है। • नियामक और अनुपालन भरोसा: वित्तीय प्रणाली में उच्च पदों पर अनुभवी अधिकारियों की उपस्थिति से वित्तीय अनुशासन और नियमों के पालन को मजबूती मिलती है। यह जमाकर्ताओं और छोटे निवेशकों के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसा क्यों हुआ आईसीआईसीआई बैंक दशकों से वित्तीय क्षेत्र के लिए एक मजबूत प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास केंद्र के रूप में उभरा है, जिसके चलते उसके पूर्व अधिकारी आज शीर्ष पदों पर पहुंच रहे हैं। • व्यापक व्यावसायिक अनुभव: बैंक ने अपने अधिकारियों को खुदरा बैंकिंग, बीमा, प्रतिभूतियों और ग्रामीण वित्त जैसे विविध क्षेत्रों में व्यापक स्वायत्तता के साथ काम करने का अवसर दिया। इस बहुमुखी अनुभव ने उन्हें स्वतंत्र रूप से जटिल वित्तीय संस्थानों को चलाने के योग्य बनाया। • उद्योग में नेतृत्व की मांग: भारतीय वित्तीय क्षेत्र के तेजी से विस्तार के चलते ऐसे कुशल और अनुभवी प्रबंधकों की भारी मांग रही है जिन्होंने बड़े संकटों और तीव्र प्रतिस्पर्धा में काम किया हो। आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारी इन पैमानों पर स्वाभाविक रूप से खरे उतरते हैं। • विस्तृत कॉरपोरेट संस्कृति: बैंक में प्रदर्शन आधारित कार्यशैली और जोखिम प्रबंधन की मजबूत परंपरा रही है, जिससे अधिकारियों में निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई। यही कारण है कि प्रतिस्पर्धी बैंक और वैश्विक संस्थान उनके नेतृत्व पर भरोसा जताते रहे हैं। सवाल-जवाब 1. अनूप बाग्ची एचडीएफसी बैंक की कमान कब संभालेंगे? अनूप बाग्ची 27 अक्टूबर, 2026 से एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ की जिम्मेदारी संभालेंगे। 2. अनूप कुमार साहा कोटक महिंद्रा बैंक में कब पदभार ग्रहण करेंगे? अनूप कुमार साहा 1 जनवरी, 2027 से कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ का पद संभालेंगे। 3. विशाखा मूले वर्तमान में किस संस्था का नेतृत्व कर रही हैं? विशाखा मूले वर्तमान में आदित्य बिड़ला कैपिटल की एमडी और सीईओ हैं और 85 हजार करोड़ रुपये की कंपनी का संचालन करती हैं। 4. राजीव सबरवाल ने टाटा कैपिटल में कब जिम्मेदारी संभाली थी? राजीव सबरवाल ने साल 2018 में टाटा कैपिटल के एमडी और सीईओ का पद संभाला था। 5. शिखा शर्मा किस प्रमुख बैंक की एमडी और सीईओ रह चुकी हैं? शिखा शर्मा साल 2009 से 2018 तक एक्सिस बैंक की एमडी और सीईओ की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। 6. वैश्विक स्तर पर गोल्डमैन सॉक्स और जेपी मॉर्गन से कौन से पूर्व अधिकारी जुड़े हैं? संजोय चटर्जी गोल्डमैन सॉक्स (इंडिया सिक्योरिटीज) के चेयरमैन व सीईओ हैं, जबकि कल्पना मोरपरिया जेपी मॉर्गन के भारतीय ऑपरेशंस संभालती हैं। https://trendkia.com/business/bainkinga-jagata-ki-lidarashipa-narsari-shirsha-vittiya-snsthanon-ki-kamana-snbhala-rahe-hain-icici-bank-ke-diggaja-41956 TrendKia — Har trend, sabse pehle.