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  "type": "article",
  "title": "बाजरे की बंपर पैदावार चाहिए तो बुवाई से पहले अपनाएं ये तरीके, आमदनी में होगा सीधा फायदा",
  "summary": "राजस्थान में मानसून आते ही खरीफ की तैयारी तेज है और प्रदेश में करीब 45 लाख हेक्टेयर में बाजरा बोया जाता है। सही समय पर बुवाई, बीज उपचार और संतुलित पोषण से किसान कम पानी में अच्छी पैदावार ले सकते हैं।",
  "content": "राजस्थान में मानसून की पहली फुहारों के साथ ही खेतों में हलचल बढ़ गई है और किसान खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गए हैं। इन फसलों में बाजरा प्रदेश की सबसे अहम फसलों में से एक है, जिसकी खेती करीब 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। खास बात यह है कि बाजरा कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है, यही वजह है कि इसे सही समय पर और वैज्ञानिक तरीके से बोना किसान की कमाई के लिहाज से बहुत मायने रखता है।\n\nकृषि अधिकारी कैलाश चंद्र शर्मा के मुताबिक बाजरे की बुवाई के लिए मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक का समय सबसे बेहतर रहता है। उनका कहना है कि पहली अच्छी बारिश के बाद बीज डालने पर अंकुरण ज्यादा अच्छा होता है और पौधों की बढ़वार भी बेहतर रहती है।\n\nकैसी मिट्टी और कौन सी किस्में देंगी अच्छा नतीजा\nबाजरे के लिए बलुई दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली जमीन सबसे मुफीद मानी जाती है। बुवाई से पहले खेत की ठीक से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए, ताकि बीज को जमने में आसानी हो। पैदावार बढ़ाने में किस्म का चुनाव भी बड़ी भूमिका निभाता है। किसानों को RHB-173, RHB-177, RHB-223, RHB-228, RHB-233 (बायोफोर्टिफाइड) और RHB-234 (बायोफोर्टिफाइड) जैसी उन्नत किस्मों को चुनने की सलाह दी जाती है। एक हेक्टेयर के लिए करीब 4 किलोग्राम प्रमाणित बीज काफी रहता है।\n\nबुवाई से पहले बीजों का उपचार न भूलें\nअच्छी फसल की नींव बीज उपचार से ही पड़ती है। गूंदिया और चैंपा रोग से बचाव के लिए बीजों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में पांच मिनट तक डुबोकर रखें, इससे हल्के और खराब बीज ऊपर तैरकर अलग हो जाते हैं। इसके बाद बीजों को साफ पानी से धोकर छाया में सुखा लें। सफेद लट और दीमक से फसल को बचाने के लिए बुवाई से पहले बीजों का उपचार इमिडाक्लोप्रिड या क्लोथियानिडिन से करना चाहिए।\n\nकैलाश चंद्र शर्मा बताते हैं कि बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 40 से 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। इसके बाद बुवाई के 15 से 20 दिन बाद छंटाई कर पौधों के बीच की दूरी करीब 15 सेंटीमीटर कर देनी चाहिए, ताकि हर पौधे को पूरा पोषण मिल सके।\n\nसंतुलित खाद और ब्लास्ट रोग से बचाव\nफसल को भरपूर पोषण देने के लिए बुवाई से पहले खेत में 10 से 12 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या 2.5 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर डालना फायदेमंद रहता है। रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल इलाके की बारिश को देखते हुए करना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय दें, जबकि बची हुई नत्रजन की मात्रा 25 से 30 दिन बाद बारिश होने पर डालें।\n\nअगर फसल में ब्लास्ट रोग के लक्षण दिखें तो देर किए बिना अनुशंसित फफूंदनाशक का छिड़काव कर देना चाहिए। कुल मिलाकर सही समय पर बुवाई, बीज उपचार और संतुलित पोषण इन तीन बातों को अपनाकर किसान बाजरे की अच्छी पैदावार ले सकते हैं और अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: बाजरा उगाने वाले किसान सही समय पर बुवाई, बीज उपचार और संतुलित खाद अपनाकर कम पानी में भी ज्यादा पैदावार और बेहतर मुनाफा ले सकते हैं।\n• राजस्थान में: करीब 45 लाख हेक्टेयर में बाजरा बोने वाले प्रदेश के किसानों के लिए मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक का समय और उन्नत किस्में सीधे फसल और आमदनी पर असर डालेंगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बाजरे की बुवाई का सबसे सही समय क्या है?\nमध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक का समय बाजरे की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। पहली अच्छी बारिश के बाद बुवाई करने से अंकुरण बेहतर होता है।\n\n2. एक हेक्टेयर के लिए कितना बीज चाहिए?\nएक हेक्टेयर के लिए करीब 4 किलोग्राम प्रमाणित बीज पर्याप्त रहता है।\n\n3. बाजरे की कौन सी उन्नत किस्में बोई जा सकती हैं?\nRHB-173, RHB-177, RHB-223, RHB-228, RHB-233 (बायोफोर्टिफाइड) और RHB-234 (बायोफोर्टिफाइड) जैसी उन्नत किस्मों का उपयोग किया जा सकता है।\n\n4. बीज उपचार कैसे करें?\nगूंदिया और चैंपा रोग से बचाव के लिए बीजों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में पांच मिनट डुबोकर खराब बीज अलग कर लें, फिर साफ पानी से धोकर छाया में सुखाएं। सफेद लट और दीमक से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड या क्लोथियानिडिन से उपचार करें।\n\n5. पौधों और कतारों के बीच कितनी दूरी रखनी चाहिए?\nकतार से कतार की दूरी 40 से 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। बुवाई के 15 से 20 दिन बाद छंटाई कर यह दूरी करीब 15 सेंटीमीटर कर दें।\n\n6. खाद और उर्वरक कितनी मात्रा में डालें?\nबुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 से 12 टन सड़ी गोबर खाद या 2.5 टन वर्मीकम्पोस्ट डालें। नत्रजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय, बाकी नत्रजन 25 से 30 दिन बाद बारिश पर डालें।\n\n7. ब्लास्ट रोग दिखने पर क्या करें?\nफसल में ब्लास्ट रोग के लक्षण दिखते ही तुरंत अनुशंसित फफूंदनाशक का छिड़काव कर देना चाहिए।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-25",
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