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  "title": "बाजरे की बंपर पैदावार का पूरा फॉर्मूला: नागौर के एक्सपर्ट से जानें बीज से लेकर खाद तक हर जरूरी कदम",
  "summary": "राजस्थान में करीब 45 लाख हेक्टेयर में होने वाली बाजरे की फसल अभी बुवाई के दौर में है। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक सही किस्म, बीजोपचार और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।",
  "content": "राजस्थान के खेतों में खरीफ का मौसम दस्तक दे चुका है और इसके साथ ही बाजरे की बुवाई की तैयारी जोरों पर है। प्रदेश में यह फसल सिर्फ एक अनाज नहीं, बल्कि लाखों किसान परिवारों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान में करीब 45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा बोया जाता है, और यही वजह है कि इसकी सही बुवाई का असर सीधे किसान की जेब पर पड़ता है। अहम बात यह है कि अभी का समय इसकी बुवाई के लिहाज से बिल्कुल मुफीद है।\n\nनागौर के एग्रीकल्चर एक्सपर्ट बजरंग चौधरी का कहना है कि बाजरे में अच्छी पैदावार का राज मानसून की पहली अच्छी बारिश में छिपा है। उनके मुताबिक जैसे ही पहली बढ़िया बारिश हो, उसी के साथ बुवाई कर देने पर बीज का अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन भी ज्यादा मिलता है। वे जोड़ते हैं कि सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि उन्नत किस्मों का चुनाव, बुवाई से पहले बीजोपचार और फसल का सही प्रबंधन मिलकर उपज को कई गुना बढ़ा देते हैं।\n\nकैसी मिट्टी और खेत की तैयारी सबसे जरूरी\nबाजरे के लिए जमीन का चुनाव शुरुआती और सबसे अहम कदम है। चौधरी बताते हैं कि इस फसल के लिए जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत को तैयार करते वक्त मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी है, इसके लिए गर्मियों में देसी हल से एक गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद जरूरत के हिसाब से मिट्टी पलटने वाले हल या हैरो से एक से दो जुताई और कर लेनी चाहिए। यह मेहनत दोहरा फायदा देती है, एक तरफ खरपतवार पर लगाम लगती है तो दूसरी तरफ खेत में नमी भी बनी रहती है।\n\nकौन सी किस्में चुनें और बीजोपचार कैसे करें\nकिस्म का सही चुनाव पैदावार की नींव रखता है। चौधरी के मुताबिक बाजरे की खेती के लिए आरएचबी-173, आरएचबी-177, आरएचबी-223 और आरएचबी-228 के साथ ही बायोफोर्टिफाइड किस्में आरएचबी-233 और आरएचबी-234 सबसे उपयुक्त रहती हैं। बीज की मात्रा की बात करें तो किसान प्रति हेक्टेयर करीब चार किलोग्राम प्रमाणित बीज इस्तेमाल कर सकते हैं।\n\nबुवाई से पहले बीजोपचार को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गूंदिया और चैंपा रोग से बचाव के लिए बीजों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में पांच मिनट तक डुबोकर रखें, इससे हल्के और संक्रमित बीज ऊपर तैरकर अलग हो जाते हैं और उन्हें निकाल देना चाहिए। इसके बाद बीजों को साफ पानी से धोकर छाया में सुखा लें। वहीं सफेद लट और दीमक जैसे कीटों से फसल को बचाने के लिए प्रति किलो बीज पर इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस की 8.75 मिली या क्लोथायोनिडीन 50 डब्ल्यूडीजी की 7.5 ग्राम मात्रा से उपचार करना चाहिए। एक खास सावधानी यह है कि उपचारित बीजों की बुवाई दो घंटे के भीतर कर देनी चाहिए। समय की बात करें तो बाजरे की बुवाई का उपयुक्त वक्त मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक माना जाता है, हालांकि सबसे बेहतर नतीजे पहली बारिश के साथ की गई बुवाई से ही मिलते हैं।\n\nकतार की दूरी और खाद का सही गणित\nबुवाई के दौरान पौधों के बीच का फासला तय करना भी पैदावार पर सीधा असर डालता है। कतार से कतार की दूरी 40 से 50 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। बुवाई के 15 से 20 दिन बाद पौधों की छंटाई कर उनके बीच की दूरी 15 सेंटीमीटर बनाए रखना जरूरी है। जिन जगहों पर पौधों की संख्या कम रह गई हो, वहां किसान छांटे गए पौधों का रोपण करके खाली जगह भर सकते हैं।\n\nखाद के प्रबंधन में भी संतुलन जरूरी है। बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 से 12 टन गोबर की सड़ी खाद या 2.5 टन वर्मी कम्पोस्ट खेत में डालनी चाहिए। इसके अलावा सिंचित क्षेत्रों में 90 किलोग्राम नत्रजन और 30 किलोग्राम फॉस्फोरस प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है, जबकि कम वर्षा वाले इलाकों में 50 से 60 किलोग्राम नत्रजन और 20 से 30 किलोग्राम फॉस्फोरस पर्याप्त रहता है। ध्यान रहे कि नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय दें और बची हुई आधी मात्रा 25 से 30 दिन बाद बारिश होने पर डालें।\n\nरोग और कीट से फसल कैसे बचाएं\nअच्छी पैदावार तभी हाथ लगती है जब फसल को रोग और कीटों से समय रहते बचाया जाए। चौधरी सलाह देते हैं कि ब्लास्ट रोग के लक्षण दिखते ही प्रोपिकोनाजोल या फिर ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल आधारित फफूंदनाशक का छिड़काव कर देना चाहिए। सफेद लट पर काबू पाने के लिए बुवाई के करीब 20 दिन बाद अनुशंसित दवा का इस्तेमाल कारगर रहता है। इसी तरह अरगट रोग को रोकने के लिए बालियां निकलने के समय समय-समय पर दवा का छिड़काव जरूरी है। इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर राजस्थान के किसान बाजरे की फसल को नुकसान से बचाते हुए कम लागत में बंपर मुनाफा कमा सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: बाजरा बोने वाले किसान सही किस्म, बीजोपचार और संतुलित खाद अपनाकर कम लागत में बेहतर अंकुरण और ज्यादा पैदावार पा सकते हैं।\n• राजस्थान में: करीब 45 लाख हेक्टेयर में बाजरा बोने वाले प्रदेश के किसानों के लिए मानसून की पहली बारिश के साथ बुवाई और समय पर रोग-कीट नियंत्रण सीधे मुनाफे से जुड़ा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बाजरे की बुवाई का सही समय क्या है?\nबाजरे की बुवाई का उपयुक्त समय मध्य जून से जुलाई के तीसरे सप्ताह तक माना जाता है, और मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ बुवाई सबसे बेहतर रहती है।\n\n2. बाजरे की कौन सी किस्में सबसे उपयुक्त हैं?\nआरएचबी-173, आरएचबी-177, आरएचबी-223, आरएचबी-228 के साथ बायोफोर्टिफाइड किस्में आरएचबी-233 और आरएचबी-234 खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई हैं।\n\n3. प्रति हेक्टेयर कितना बीज और खाद चाहिए?\nकिसान प्रति हेक्टेयर करीब चार किलोग्राम प्रमाणित बीज इस्तेमाल कर सकते हैं, और बुवाई से पहले 10 से 12 टन गोबर की सड़ी खाद या 2.5 टन वर्मी कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर देनी चाहिए।\n\n4. सफेद लट और दीमक से बचाव कैसे करें?\nप्रति किलो बीज पर इमिडाक्लोप्रिड 600 एफएस की 8.75 मिली या क्लोथायोनिडीन 50 डब्ल्यूडीजी की 7.5 ग्राम मात्रा से बीजोपचार करें और उपचारित बीज दो घंटे के भीतर बो दें।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-16",
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