# बलिया के किसान ज्ञानचंद ने एप्पल बेर की खेती से पलटी किस्मत, सालाना 12 लाख रुपये तक का टर्नओवर

> उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के किसान ज्ञानचंद शर्मा ने बाल सुंदरी और मिस इंडिया बेर की खेती कर एक मिसाल कायम की है। बंगाल से मंगाए गए इन खास पौधों से उन्हें लाखों रुपये की कमाई हो रही है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/baliya-ke-kisana-gyanchand-ne-eppala-bera-ki-kheti-se-palati-kismata-salana-12-lakha-rupaye-taka-ka-tarnaovara-39717 · **Language:** Hindi
**Tags:** एप्पल बेर खेती, बलिया किसान, बागवानी, कृषि लाभ, बाल सुंदरी बेर, मिस इंडिया बेर

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के बेल्थरा रोड स्थित सियर ब्लॉक के पडरी गांव के रहने वाले किसान ज्ञानचंद शर्मा ने अनोखी खेती की मिसाल पेश की है। उन्होंने पारंपरिक फसलों से हटकर एप्पल बेर यानी बाल सुंदरी और मिस इंडिया किस्म के बेर की बागवानी शुरू की है। इन दुर्लभ प्रजातियों के पौधों को वह विशेष तौर पर बंगाल से मंगवाकर अपने खेतों में लेकर आए थे। बाजार में इस आधुनिक फल की भारी मांग बनी हुई है और इनकी पैदावार से किसान को बंपर मुनाफा मिल रहा है। ज्ञानचंद शर्मा ने करीब दो साल पहले अपनी इस कृषि यात्रा की शुरुआत की थी, जिसके तहत उन्होंने बाल सुंदरी प्रजाति के 200 पौधे और मिस इंडिया प्रजाति के 200 पौधे रोपे थे। इस प्रकार कुल 400 पौधे लगाकर इस बाग की नींव रखी गई थी। इन पौधों से पहले ही एक बार बंपर पैदावार मिल चुकी है और वर्तमान स्थिति यह है कि दोबारा हर एक पौधे पर भारी संख्या में फूल खिले हुए हैं, जिससे बंपर फसल की पूरी उम्मीद बंध गई है।

## सालों साल उत्पादन और आसान देखभाल
ज्ञानचंद शर्मा ने इन खास बेर के पौधों की खूबियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उनके अनुसार इन पौधों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार जमीन में रोपने के बाद ये लगातार 5 से 7 साल तक फल देते रहते हैं। इसके रखरखाव में भी ज्यादा मेहनत की आवश्यकता नहीं होती है और हर साल सिर्फ एक बार जीरो कटिंग करनी पड़ती है। सबसे खास बात यह है कि ये पौधे रोपण के महज एक साल के भीतर ही फल देना शुरू कर देते हैं। पौधों का आकार झाड़ीनुमा होता है, जिसके कारण इनकी देखभाल करना बेहद सरल हो जाता है। पिछली बार की पैदावार में उन्हें उम्मीद से कहीं अधिक फल प्राप्त हुए थे और इस बार पौधों पर आए फूलों को देखकर बंपर उत्पादन की पूरी संभावना जताई जा रही है।

## लाखों की बंपर कमाई और बाजार में जबरदस्त मांग
एप्पल बेर की ये उन्नत किस्में किसानों को बहुत बेहतरीन रिटर्न देने के लिए जानी जाती हैं। खेती की शुरुआत करने के लिए एक पौधा लगभग 45 रुपये की कीमत पर मिल जाता है। सामान्य देखभाल करने पर भी एक पौधे से कम से कम 40 से 50 किलो तक फल आसानी से मिल जाते हैं। किसान का दावा है कि यदि थोड़ी अतिरिक्त मेहनत और उचित देखभाल की जाए, तो एक पौधे से एक से सवा क्विंटल तक भी पैदावार हासिल की जा सकती है। इन बेरों का गूदा अत्यधिक रसीला, बेहद मीठा और खाने में कुरकुरा होता है। यदि न्यूनतम आंकड़ों के हिसाब से भी जोड़ा जाए और एक पौधे से 50 किलोग्राम फल मिलते हैं, तो बाजार में 60 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचने पर एक पौधे से 3000 रुपये की आय होती है। इस तरह कुल 400 पौधों से 12 लाख रुपये तक का शानदार टर्नओवर आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

## इसका आप पर असर
यह सफलता देश के किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा बागवानी और आधुनिक फल उत्पादन की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

- **उत्तर प्रदेश में:** बलिया और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने वाली एप्पल बेर जैसी फसलों को आजमाने का मौका मिलता है।
- **भारत में:** देश भर के छोटे किसान बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर भी इस तरह की झाड़ीनुमा फसलों को उगाकर अपनी आय में बड़ा इजाफा कर सकते हैं।
- **लागत और मुनाफा:** मात्र 45 रुपये प्रति पौधे के निवेश से शुरू होने वाली इस खेती में प्रति पौधा 40 से 50 किलो उत्पादन और 60 रुपये प्रति किलो तक का बाजार भाव मिलता है।
- **उत्पादन अवधि:** एक बार पौधे लगाने पर अगले 5 से 7 साल तक बिना किसी बड़े अतिरिक्त निवेश के लगातार फसल और मुनाफा मिलता रहता है।
- **बाजार मांग:** इन मीठे और रसीले फलों की बाजार में लगातार ऊंची मांग होने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई परेशानी नहीं होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
एप्पल बेर की खेती की यह सफलता इसके पौधों की विशेष जैविक विशेषताओं और बढ़ती बाजार लोकप्रियता के कारण संभव हुई है।

- **पौधों की प्रजाति:** बाल सुंदरी और मिस इंडिया जैसी उन्नत प्रजातियां कम समय में झाड़ीनुमा रूप में तेजी से विकसित होती हैं और रोपण के पहले साल ही फल देना शुरू कर देती हैं।
- **आसान प्रबंधन:** इन पौधों को जीवित रहने और फल देने के लिए न्यूनतम देखभाल की आवश्यकता होती है, जिसमें केवल सालाना जीरो कटिंग का काम शामिल है।
- **उच्च उत्पादन क्षमता:** उचित देखभाल मिलने पर प्रत्येक पौधा 40 से 50 किलोग्राम या उससे भी अधिक फल पैदा करने की क्षमता रखता है।
- **उपभोक्ता पसंद:** इन फलों का अत्यधिक रसीला, मीठा और कुरकुरा स्वाद ग्राहकों को आकर्षित करता है, जिससे बाजार में इनके दाम अच्छे मिलते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. ज्ञानचंद शर्मा ने कौन से फल की खेती की है?
उन्होंने एप्पल बेर की बाल सुंदरी और मिस इंडिया किस्मों की खेती की है।

### 2. ये पौधे कहां से मंगाए गए थे?
इन दुर्लभ प्रजाति के पौधों को विशेष तौर पर बंगाल से लाया गया था।

### 3. कुल कितने पौधे रोपे गए थे?
किसान ने बाल सुंदरी और मिस इंडिया के 200-200 पौधे मिलाकर कुल 400 पौधे रोपे थे।

### 4. एक पौधे से कितना फल मिल जाता है?
एक पौधे से कम से कम 40 से 50 किलो फल प्राप्त होते हैं, जिसे अधिक देखभाल से सवा क्विंटल तक बढ़ाया जा सकता है।

### 5. इन पौधों से कितने साल तक उत्पादन मिलता है?
एक बार पौधे लगाने के बाद ये लगातार 5 से 7 साल तक फल देते हैं।

### 6. इस खेती से कुल कितना टर्नओवर हो सकता है?
400 पौधों से 12 लाख रुपये तक का सालाना टर्नओवर हो सकता है।

## प्रेरणा और सबक
ज्ञानचंद शर्मा की यह सफलता उन सभी किसानों और युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है जो कृषि क्षेत्र में कुछ नया करना चाहते हैं।

- **नवाचार अपनाएं:** पारंपरिक फसलों से हटकर बाजार की मांग के अनुसार दुर्लभ या उन्नत किस्मों की बागवानी करने से कई गुना अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
- **कम लागत में बड़ा लाभ:** सीमित पूंजी और थोड़े से पौधों के साथ भी योजनाबद्ध तरीके से खेती शुरू करके बड़ा व्यापार खड़ा किया जा सकता है।
- **आसान देखरेख का फायदा:** कम देखरेख और कम पानी या श्रम की जरूरत वाली फसलें चुनकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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