बरसात में थनैला रोग से गाय-भैंस को बचाने के आसान उपाय, दूध निकालते ही रखें इस बात का ध्यान बरसात के दिनों में दुधारू पशुओं में थनैला रोग यानी मैस्टाइटिस का खतरा काफी बढ़ जाता है। पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दूध निकालने के तुरंत बाद पशुओं को कम से कम 30 मिनट तक बैठने न देने से इस खतरनाक संक्रमण से बचाया जा सकता है। सुल्तानपुर में पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए बरसात का मौसम कई तरह की चुनौतियों लेकर आता है। इस दौरान वातावरण में नमी और चारों तरफ गंदगी बढ़ने के कारण दुधारू पशुओं की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। खासकर मैस्टाइटिस यानी थनैला रोग इस मौसम की एक बहुत ही गंभीर समस्या बन जाता है, जो सीधे पशुओं के थनों को नुकसान पहुंचाता है और समय रहते इलाज न मिलने पर दूध का उत्पादन भी काफी हद तक घट जाता है। दूध निकालने के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. दिवाकर कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि जब गाय या भैंस का दूध निकाला जाता है, तो उस प्रक्रिया के तुरंत बाद थन का द्वार कुछ देर के लिए खुला रहता है। यदि इस नाज़ुक समय में पशु फौरन किसी नम या गंदी जमीन पर बैठ जाता है, तो आसपास मौजूद हानिकारक कीटाणु खुले हुए रास्ते से थन के अंदर आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। इससे मवेशियों में संक्रमण फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। थनैला रोग से बचाव का सबसे आसान तरीका इस खतरनाक संक्रमण से बचाव के लिए डॉ. दिवाकर कुमार ने सलाह दी है कि दूध दोहन का काम पूरा होने के बाद गाय या भैंस को करीब 30 मिनट तक बैठने नहीं देना चाहिए। इस आधे घंटे के दौरान पशु का ध्यान बंटाने और उसे खड़े रखने के लिए हरा चारा या उसका नियमित दाना-भूसा दिया जा सकता है, ताकि वह आराम से खड़ा होकर भोजन करता रहे। इस छोटी सी सावधानी से पशु के थन तुरंत गंदे फर्श के संपर्क में आने से बच जाते हैं। इसके साथ ही पशुपालकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस जगह पर दूध निकाला जा रहा है, वह स्थान पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए। यदि फर्श पर गोबर, गंदा पानी या कीचड़ जमा रहता है, तो बैक्टीरिया और कीटाणुओं के फैलने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। थनैला रोग के शुरुआती लक्षण और पहचान यदि किसी पशु को मैस्टाइटिस की समस्या हो जाए, तो उसके थनों में सूजन, गर्माहट, लालिमा या कड़ापन जैसी दिक्कतें साफ नजर आने लगती हैं। इसके अलावा दूध की मूल बनावट में भी बदलाव देखा जा सकता है, जैसे कि दूध में छोटे-छोटे थक्के या अन्य असामान्य कण तैरते हुए दिखाई देना। ऐसी स्थिति सामने आने पर पशुपालकों को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से कोई दवा नहीं देनी चाहिए। ऐसे लक्षण दिखते ही फौरन योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क कर जांच करवानी चाहिए और उनकी देखरेख में ही पूरा इलाज शुरू करना चाहिए। पशुशाला की साफ-सफाई और स्वच्छता का महत्व पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि उनके बैठने के स्थान की नियमित रूप से सफाई की जाए। फर्श पर किसी भी प्रकार की गंदगी, गोबर या पानी को इकट्ठा न होने दें। मौसम की स्थिति को देखते हुए पशुशाला की अच्छी तरह से साफ-सफाई और सैनिटाइजेशन का काम करते रहें। फर्श पर चूने का छिड़काव या अन्य स्वीकृत कीटाणुनाशक उत्पादों का इस्तेमाल हमेशा स्थानीय पशु चिकित्सक के मार्गदर्शन और सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए। दूध दोहन के दौरान स्वच्छता के नियम केवल फर्श ही नहीं, बल्कि दूध निकालने की पूरी प्रक्रिया के दौरान भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। दूध निकालने वाले व्यक्ति को अपने हाथ अच्छी तरह धोने चाहिए, दूध रखने के बर्तन पूरी तरह साफ होने चाहिए और थनों की स्वच्छता का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए। थनों की बेहतर देखभाल के लिए किसी भी तरह के विशेष डिप या लोशन का प्रयोग करने से पहले पशु चिकित्सक की राय जरूर लेनी चाहिए। बरसात के दिनों में पशुशाला को सूखा रखने और दूध निकालने के बाद आधे घंटे तक पशु को खड़ा रखने की यह आदत मवेशियों को गंभीर बीमारियों से बचाने में काफी मददगार साबित हो सकती है। नियमित देखरेख और सतर्कता से पशुधन को सुरक्षित रखा जा सकता है। इसका आप पर असर भारत में: दुधारू पशु रखने वाले किसानों और पशुपालकों को मानसून के दौरान थनैला रोग से बचाव के लिए साफ-सफाई और दूध निकालने के बाद 30 मिनट तक पशुओं को खड़ा रखने के नियमों का पालन करना चाहिए जिससे दूध उत्पादन सुरक्षित रहे। सुल्तानपुर में: स्थानीय पशुपालक बरसात के मौसम में नमी और कीचड़ के कारण होने वाले संक्रमण से अपने मवेशियों को बचाने के लिए विशेष रूप से पशुशालाओं को सूखा और सैनिटाइज्ड रख सकते हैं। सवाल-जवाब 1. थनैला रोग या मैस्टाइटिस क्या है? यह दुधारू पशुओं के थनों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर संक्रमण है, जो नमी और गंदगी के कारण होता है और समय पर ध्यान न देने पर दूध उत्पादन को घटा देता है। 2. दूध निकालने के बाद पशु को कितनी देर तक बैठने नहीं देना चाहिए? पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार दूध दोहन के बाद गाय या भैंस को करीब 30 मिनट तक बैठने से रोकना चाहिए। 3. दूध निकालने के तुरंत बाद पशु के बैठने से क्या खतरा होता है? दूध निकालते समय थन का छेद कुछ समय के लिए खुला रहता है, और तुरंत बैठने से गंदी जमीन के कीटाणु थन के रास्ते अंदर प्रवेश कर सकते हैं। 4. थनैला रोग के क्या लक्षण दिखाई देते हैं? इस बीमारी में पशु के थन में सूजन, गर्माहट, लालिमा या दर्द होता है तथा दूध में थक्के या अन्य असामान्य पदार्थ नजर आ सकते हैं। https://trendkia.com/business/barasata-men-mastitis-roga-se-cow-buffalo-ko-bachane-ke-asana-upaya-dudha-nikalate-hi-rakhen-isa-bata-ka-dhyana-20036 TrendKia — Har trend, sabse pehle.