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  "title": "बरसात में मिल्की मशरूम की खेती से पाएं बंपर कमाई, जानें बैग तैयार करने का पूरा तरीका",
  "summary": "सहारनपुर में किसान अब पारंपरिक फसलों के बजाय मिल्की मशरूम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जो बरसात के अनुकूल तापमान में अधिक मुनाफा देती है। इसके लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान सबसे उपयुक्त माना गया है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जनपद मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में एक अग्रणी स्थान बना चुका है। यहां के युवा किसान अब पारंपरिक नौकरियों की तलाश करने के बजाय स्वरोजगार को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। मशरूम की खेती में बढ़ती रुचि इसी बदलाव का प्रमाण है। यह एक ऐसी खेती है जिसके लिए बंद झोपड़ी या एक विशेष कमरे की आवश्यकता होती है। जैसे-जैसे जुलाई में बरसात का मौसम आता है, किसानों के मन में यह सवाल उठता है कि कौन सी किस्म का चुनाव करना चाहिए ताकि कम समय में अच्छी आय प्राप्त की जा सके।\n\nतापमान का महत्व और मुनाफे की गणित\nमशरूम उत्पादन में तापमान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बरसात के दौरान सहारनपुर का तापमान आमतौर पर 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और प्रोफेसर डॉक्टर आई.के. कुशवाहा के अनुसार, सहारनपुर का स्थानीय वातावरण मशरूम की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। यही कारण है कि जिले के ग्रामीण युवा बड़ी संख्या में इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। मशरूम की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें लागत कम आती है, लेकिन मंडी में इसके दाम अन्य पारंपरिक फसलों के मुकाबले काफी अधिक मिलते हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।\n\nमिल्की मशरूम की खेती की प्रक्रिया\nबरसात के मौसम के लिए मिल्की मशरूम (Calocybe indica) को सबसे बेहतरीन माना गया है, क्योंकि यह 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान में अच्छी पैदावार देती है। इसकी खेती के लिए जमीन या रैक पर बैग रखे जा सकते हैं। बैग तैयार करने के लिए मुख्य सामग्री के रूप में गन्ने की पत्तियां, गेहूं का भूसा, सरसों की तुड़ी या किसी भी दलहन-तिलहन की तुड़ी का उपयोग किया जा सकता है।\n\nध्यान रखने योग्य बात यह है कि उपयोग की जाने वाली सामग्री सूखी होनी चाहिए। सबसे पहले इस फसल अवशेष को शोधित करने के लिए हवादार आलू के कट्टों में भरें और उन्हें 18 घंटे के लिए पानी में डुबोकर रखें। निर्धारित समय के बाद सामग्री को बाहर निकालें और इसमें मिल्की मशरूम का स्पान (बीज) मिला दें। इस मिश्रण को छोटे बैगों में भरें और एक बंद कमरे में रखें। लगभग 15 से 20 दिनों में यह पूरी तरह रन होने लगता है। इसके बाद, बैग के ऊपर लगभग डेढ़ इंच की केसर मिट्टी की परत चढ़ाई जाती है, जिसके एक सप्ताह के भीतर मशरूम निकलना शुरू हो जाते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: मशरूम की खेती किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त और लाभदायक स्रोत बनती जा रही है, जो बाजार में अधिक मूल्य पर बिकती है।\n\nसहारनपुर में: स्थानीय किसानों के लिए 25-35 डिग्री सेल्सियस के तापमान में मिल्की मशरूम उगाना कम लागत में बेहतर मुनाफा सुनिश्चित करने का एक बड़ा अवसर है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बरसात के मौसम के लिए कौन सा मशरूम सबसे अच्छा है?\nबरसात के मौसम में मिल्की मशरूम (Calocybe indica) की खेती करना सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान में बहुत अच्छी पैदावार देता है।\n\n2. मशरूम के बैग तैयार करने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है?\nइसके लिए आप गन्ने की पत्तियां, गेहूं का भूसा, सरसों की तुड़ी या दलहन/तिलहन की तुड़ी का उपयोग कर सकते हैं।\n\n3. मशरूम की बुवाई से कटाई तक कितना समय लगता है?\nबैग तैयार करने के बाद 15 से 20 दिन में स्पान रन होने लगते हैं और उसके बाद केसर मिट्टी की परत चढ़ाने के 7 दिन के अंदर मशरूम निकलना शुरू हो जाते हैं।\n\n4. क्या मशरूम की खेती के लिए किसी विशेष स्थान की आवश्यकता होती है?\nहाँ, मशरूम एक फफूंद आधारित फसल है जिसे उगाने के लिए एक बंद झोपड़ी या कमरे की आवश्यकता होती है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/barasata-men-milky-mushroom-ki-kheti-se-paen-bnpara-kamai-janen-baiga-taiyara-karane-ka-pura-tarika-7072",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-12",
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    "मशरूम की खेती",
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