बड़े यूपीआई भुगतानों पर लगने वाले नए शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे व्यापारी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा, लेकिन पंजाब एंड सिंध बैंक के शीर्ष अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह लागत पूरी तरह दुकानदार वहन करेंगे। डिजिटल लेन-देन की व्यवस्था में आगामी 15 अक्टूबर से होने वाले अहम बदलाव को लेकर आम उपभोक्ताओं की शंकाओं का समाधान सामने आया है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाया जाएगा। इस नए नियम के बाद उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ रहा था कि क्या खरीदारी करते समय दुकानदार इस अतिरिक्त शुल्क को बिल में जोड़कर उनसे वसूलेंगे। पंजाब एंड सिंध बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्वरूप कुमार साहा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि इस चार्ज का भार आम खरीदारों पर कतई नहीं डाला जा सकता और यह पूरी तरह व्यापारियों का दायित्व होगा। खुदरा ग्राहकों के लिए नहीं बदलेगी सामान की प्रदर्शित कीमत व्यापारियों द्वारा ग्राहकों से अतिरिक्त वसूली की आशंका को खारिज करते हुए स्वरूप कुमार साहा ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने वाले किसी भी कारोबारी को एमडीआर ग्राहकों से लेने की अनुमति नहीं है। नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी वस्तु या सेवा के लिए ग्राहक केवल वही मूल्य चुकाएगा जो उस पर प्रदर्शित या तय किया गया है। खुदरा खरीदारों को 15 अक्टूबर की समयसीमा बीतने के बाद भी किसी भी उत्पाद के लिए कोई अतिरिक्त अधिभार नहीं देना होगा। प्रति लेन-देन अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये तय नए ढांचे के तहत व्यक्ति से व्यापारी (P2M) के बीच होने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर ही 0.4 प्रतिशत की दर से एमडीआर काटा जाएगा। इस व्यवस्था में सुरक्षा उपाय के तौर पर प्रति लेन-देन अधिकतम शुल्क की सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है। स्वरूप कुमार साहा ने कहा, "व्यवस्था ये सुनिश्चित करती है कि ग्राहक सिर्फ वस्तु पर प्रदर्शित कीमत का ही भुगतान करें।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दो व्यक्तियों के बीच होने वाले आपसी लेन-देन (P2P) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और यह सेवा पूर्ववत पूरी तरह निशुल्क बनी रहेगी। दैनिक उपयोग वाले 95 प्रतिशत लेन-देन पर कोई असर नहीं छोटे व्यापारियों और रोजमर्रा की खरीदारी करने वाले आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेंगे। स्वरूप कुमार साहा ने बताया कि कुल व्यापारिक यूपीआई लेन-देन में 2,000 रुपये से कम राशि वाले भुगतानों की हिस्सेदारी 95 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में भारी बहुमत वाले रोजमर्रा के छोटे भुगतानों पर इस नियम का कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस संतुलित एमडीआर व्यवस्था को लागू करने का मुख्य उद्देश्य यूपीआई को आम जनता के लिए सुलभ बनाए रखते हुए पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और टिकाऊ बनाना है। डिजिटल भुगतान को सामान्य परिचालन लागत मानते हैं व्यापारी बाजार के वास्तविक व्यवहार पर प्रकाश डालते हुए शीर्ष बैंक अधिकारी ने रेखांकित किया कि भुगतान स्वीकार करने में आने वाला खर्च किसी भी व्यवसाय के सामान्य परिचालन खर्च का हिस्सा होता है। ऐतिहासिक रुझान दर्शाते हैं कि व्यापारी अपने कारोबार के विस्तार के लिए इस मामूली डिजिटल लागत को स्वयं वहन करते हैं। डिजिटल माध्यमों से लेन-देन की सुविधा देने पर दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है, प्रति ग्राहक औसत खरीद मूल्य में इजाफा होता है और भारी नकदी संभालने के साथ जुड़े जोखिमों तथा लागत में कमी आती है, जिससे एमडीआर की भरपाई आसानी से हो जाती है। विशेष नागरिक सेवाओं और उपयोगिताओं के लिए सिर्फ 5 रुपये का सीमित शुल्क आवश्यक सेवाओं से जुड़े भुगतानों को राहत देने के लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। रेलवे टिकट बुकिंग, टेलीकॉम बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम और पेट्रोल-डीजल की खरीद जैसी निर्धारित श्रेणियों के व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर अधिकतम एमडीआर केवल 5 रुपये तय किया गया है। इन आवश्यक श्रेणियों में भी ग्राहक केवल अपने वास्तविक बिल या निर्धारित दर का ही भुगतान करेंगे और अतिरिक्त शुल्क का भार संबंधित संस्थानों द्वारा ही वहन किया जाएगा। इसका आप पर असर 15 अक्टूबर से लागू हो रहे यूपीआई एमडीआर नियमों का आम खरीदारों की जेब पर कोई अतिरिक्त सीधा बोझ नहीं पड़ेगा। • आम खरीदारों के लिए: दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करके 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करते समय आपको बिल पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। यदि कोई दुकानदार आपसे एमडीआर के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगता है, तो आप केवल प्रदर्शित कीमत चुकाने के अपने अधिकार पर अड़े रह सकते हैं। • दुकानदारों और व्यापारियों के लिए: 2,000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर बैंक द्वारा काटा जाएगा, जो अधिकतम 300 रुपये तक हो सकता है। व्यापारियों को इस खर्च को सामान्य व्यावसायिक परिचालन लागत मानते हुए खुद वहन करना होगा। • रोजमर्रा के छोटे भुगतानों पर: 2,000 रुपये तक की सभी खरीदारी और आपसी लेन-देन पूरी तरह निशुल्क बने रहेंगे। चाय, दूध, सब्जी और किराना जैसे 95 प्रतिशत से अधिक लेन-देन पर कोई कटौती या नियम लागू नहीं होगा। • यूटिलिटी और यात्रा बिलों पर: रेलवे टिकट, पेट्रोल, मोबाइल बिल और इंश्योरेंस जैसे भुगतानों पर 2,000 रुपये से ऊपर होने पर भी एमडीआर अधिकतम 5 रुपये ही लगेगा। इस वर्ग में भी ग्राहक को केवल अपना वास्तविक बिल ही चुकाना है। ऐसा क्यों हुआ डिजिटल भुगतान अवसंरचना को लंबे समय तक वित्तीय रूप से सक्षम और टिकाऊ बनाए रखने के उद्देश्य से यह नीतिगत कदम उठाया गया है। • टिकाऊ भुगतान ढांचा तैयार करना: बड़े लेन-देन पर सीमित एमडीआर लगाने का सीधा कारण यूपीआई नेटवर्क और बैंकों के तकनीकी खर्चों की भरपाई करना है। इससे डिजिटल भुगतान की बुनियादी प्रणाली बिना सरकारी निर्भरता के दीर्घकाल तक सुचारू रूप से कार्य कर सकेगी। • छोटे लेन-देन और आम जनता की सुरक्षा: 2,000 रुपये तक के भुगतानों को शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा गया है ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी न हो। कुल व्यापारिक लेन-देन में 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा छोटे भुगतानों का होने के कारण व्यापक जनता प्रभावित नहीं होगी। • व्यापारियों द्वारा लागत वहन का तर्क: डिजिटल लेन-देन से व्यापारियों को नकद संभालने की मशक्कत और जोखिम से मुक्ति मिलती है और बिक्री बढ़ती है। इसलिए नियामक और बैंकिंग व्यवस्था मानती है कि मामूली लागत को कारोबारी परिचालन खर्च मानकर खुद समायोजित करें। सवाल-जवाब 1. क्या 15 अक्टूबर के बाद यूपीआई से भुगतान करने पर ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा? नहीं, ग्राहकों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। उन्हें केवल वस्तु या सेवा की प्रदर्शित कीमत का ही भुगतान करना है। 2. एमडीआर शुल्क किस राशि के लेन-देन पर लागू होगा? एमडीआर शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से लगेगा। 3. एक लेन-देन पर अधिकतम कितना एमडीआर काटा जा सकता है? सामान्य लेन-देन पर अधिकतम एमडीआर सीमा 300 रुपये रखी गई है, जबकि रेलवे, ईंधन, बिल और इंश्योरेंस पर यह अधिकतम 5 रुपये है। 4. क्या दो दोस्तों या परिजनों के बीच पैसे भेजने पर कोई चार्ज लगेगा? नहीं, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले व्यक्तिगत लेन-देन (P2P) पर कोई एमडीआर या अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। 5. 2,000 रुपये से कम के भुगतान पर क्या नियम है? 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेंगे, जो कुल बाजार लेन-देन का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। https://trendkia.com/business/bare-upi-bhugatanon-para-lagane-vale-nae-shulka-ko-grahakon-para-nahin-dala-sakenge-vyapari-44050 TrendKia — Har trend, sabse pehle.