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  "title": "बर्लिन में बोले पीयूष गोयल: यूरोप में वेयरहाउस स्थापित करने वाले भारतीय कारोबारियों को मदद देगी सरकार",
  "summary": "केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी में प्रवासी भारतीयों से देश के विनिर्माण और निर्यात को गति देने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योग जगत के आगे आने पर सरकार विदेशी धरती पर भंडारण केंद्र बनाने में पूरा सहयोग करेगी।",
  "content": "यूरोपीय बाजारों में घरेलू उत्पादों की पैठ मजबूत करने के लिए भारत सरकार विदेशों में भंडारण और व्यापार सुविधाएं तैयार करने की दिशा में सकारात्मक रुख अपना रही है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यदि उद्योग जगत या प्रवासी संगठन आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभालें, तो केंद्र सरकार विदेशी धरती पर वेयरहाउसिंग नेटवर्क विकसित करने में भरपूर मदद करेगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि सरकारी तंत्र खुद सीधे गोदाम नहीं चलाएगा, बल्कि निजी पहल को नीतिगत और वित्तीय सुरक्षा का मजबूत ढांचा उपलब्ध कराएगा।\n\nप्रवासी समुदाय बने दोनों देशों के बीच व्यापारिक सेतु\nबर्लिन में जुटे भारतीय पेशेवरों और उद्यमियों से संवाद करते हुए केंद्रीय मंत्री ने आग्रह किया कि वे अपने स्थानीय संपर्कों और कारोबारी अनुभव का लाभ उठाकर भारतीय कंपनियों को निर्यात के नए ऑर्डर दिलाने में सहायता करें। उन्होंने प्रवासी समाज को एक ऐसा जीवंत माध्यम बताया जो विदेशी बाजारों में भारतीय सेवाओं और उत्पादों के लिए नए दरवाजे खोल सकता है। जब विदेशों में स्थापित भारतीय पेशेवर अपनी विशेषज्ञता और पूंजी को देश के उद्यमों से जोड़ेंगे, तो इससे घरेलू कंपनियों को वैश्विक स्तर पर सीधे खरीदारों से जुड़ने का मौका मिलेगा।\n\nपीयूष गोयल ने चर्चा के दौरान यह भी साफ किया कि मौजूदा समय में भारत विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों और मजबूत भू-राजनीतिक संबंधों के जरिए अपनी वैश्विक भागीदारी का दायरा लगातार बढ़ा रहा है। उनका कहना था कि भारत के पास विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और सेवा क्षेत्र को विस्तार देने का बेहतरीन अवसर है। हालांकि, इन बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को तभी हासिल किया जा सकता है जब देश के भीतर और बाहर रहने वाले नागरिक सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आगे बढ़ने की आंतरिक ललक जनता के भीतर से ही पैदा होनी चाहिए, उसे कृत्रिम रूप से थोपा नहीं जा सकता।\n\nयूरोप में वेयरहाउस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र का खाका\nछोटे भारतीय कारोबारियों को यूरोपीय खरीदारों से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र और वेयरहाउस बनाने की योजना पर केंद्रीय मंत्री ने ठोस विचार रखे। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव को सरकारी स्तर पर प्रोत्साहन तभी मिल सकेगा, जब कोई प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठन या प्रवासी संघ उसके पेशेवर संचालन का पूरा जिम्मा अपने हाथ में ले। केंद्र सरकार इस पूरी परियोजना में धन की व्यवस्था, आवश्यक बीमा कवर, सुरक्षा मानकों और सुगम परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं में सहयोग करने को तैयार है।\n\nइस प्रस्तावित भंडारण व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि छोटे और मध्यम भारतीय निर्यातक अपना माल पहले से जर्मनी में सुरक्षित रख सकेंगे, जिससे स्थानीय खरीदारों को तुरंत आपूर्ति की जा सकेगी। इससे शिपिंग में लगने वाले समय की बचत होगी और ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह शर्त भी रखी कि ऐसे केंद्र पर देश के सभी निर्यातकों को निष्पक्ष और समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि कोई भी पात्र उद्यमी इस सुविधा से वंचित न रहे।\n\nसुविधा प्रदाता के रूप में सरकार की भूमिका और बढ़ता द्विपक्षीय व्यापार\nआर्थिक प्रगति के पहिए को तेज करने के लिए निजी क्षेत्र की स्वतंत्र भूमिका को रेखांकित करते हुए पीयूष गोयल ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की सफलता की मिसाल दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन का वास्तविक काम कारोबारियों के दैनिक कामकाज में बाधा डालना नहीं, बल्कि उनके लिए अनुकूल कारोबारी माहौल और जरूरी सुविधाएं तैयार करना है। जब नियम पारदर्शी होते हैं और गैर-जरूरी दखलंदाजी बंद होती है, तो उद्योग खुद अपनी रफ्तार पकड़ लेते हैं।\n\nइसी संवाद कार्यक्रम में जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत विनायक गुप्ते ने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच तेजी से मजबूत होते संबंधों पर अहम आंकड़े साझा किए। उन्होंने जानकारी दी कि भारत और जर्मनी के बीच आपसी द्विपक्षीय व्यापार अब 53 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। राजदूत ने बताया कि जर्मनी में भारतीय नागरिकों और मूल के लोगों की कुल संख्या 3.32 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है। यह समुदाय विज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए दोनों देशों के वाणिज्यिक संबंधों को नई मजबूती दे रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nयूरोप में भारतीय वेयरहाउस बनने और बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार से भारतीय निर्यातकों और विनिर्माताओं को सीधे यूरोपीय बाजारों में अपने उत्पाद बेचने का सुनहरा अवसर मिलेगा।\n\n• छोटे निर्यातकों के लिए: जर्मनी में भंडारण सुविधा मिलने से छोटे कारोबारियों को अपनी खेप पहले से वहां रखने की सुविधा मिलेगी। इससे यूरोपीय ग्राहकों को माल जल्दी पहुंचेगा और ऑर्डर रद्द होने का खतरा काफी घट जाएगा।\n• घरेलू विनिर्माण उद्योग के लिए: यूरोपीय संघ के साथ व्यापार बढ़ने से भारतीय कारखानों में उत्पादन की मांग में तेजी आएगी। इससे परिधान, इंजीनियरिंग और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे क्षेत्रों में नए रोजगार सृजित होने का रास्ता साफ होगा।\n• जर्मनी में भारतीय पेशेवरों के लिए: दोनों देशों के बीच 53 अरब डॉलर के व्यापार से पेशेवरों और वित्तीय सलाहकारों के लिए नए अवसर खुलेंगे। वहां रह रहे 3.32 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों की विशेषज्ञता की मांग स्थानीय कंपनियों में बढ़ेगी।\n• वैश्विक बाजार में भारतीय ब्रांड्स के लिए: सरकार द्वारा वेयरहाउस के बीमा और फंडिंग में सहयोग मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना आसान होगा। भारतीय कंपनियां प्रतिस्पर्धी दामों पर सीधे यूरोपीय रिटेलर्स को सप्लाई कर सकेंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पहल यूरोपीय बाजारों में भारतीय सामानों की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने और 53 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने के उद्देश्य से सामने आई है।\n\n• तेज आपूर्ति की मांग: भारतीय निर्यातकों को यूरोप तक माल पहुंचाने में लंबा समुद्री समय लगता है, जिससे कई बार खरीदार हाथ से निकल जाते हैं। स्थानीय वेयरहाउस की मौजूदगी से यह लॉजिस्टिक बाधा सीधे दूर हो जाएगी।\n• प्रवासी नेटवर्क की ताकत: जर्मनी में भारतीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 3.32 लाख से अधिक हो चुकी है, जो विज्ञान, वित्त और प्रौद्योगिकी में स्थापित हैं। सरकार उनके प्रभाव और नेटवर्क का उपयोग भारतीय उद्यमों को विदेशी साझेदार दिलाने में करना चाहती है।\n• मुक्त व्यापार और आर्थिक विस्तार: केंद्र सरकार विभिन्न देशों के साथ व्यापार समझौते कर रही है ताकि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की वैश्विक पहुंच बढ़े। वेयरहाउस और ट्रेड हब की योजना इसी व्यापक आर्थिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जर्मनी में वेयरहाउस स्थापित करने को लेकर पीयूष गोयल ने क्या शर्त रखी है?\nपीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि सरकार सीधे वेयरहाउस नहीं चलाएगी, बल्कि किसी उद्योग संगठन या प्रवासी संघ द्वारा पेशेवर प्रबंधन संभालने पर ही फंडिंग और बीमा में सहयोग करेगी।\n\n2. विदेश में भारतीय वेयरहाउस बनने से छोटे निर्यातकों को क्या लाभ होगा?\nछोटे निर्यातक अपना सामान पहले से जर्मनी में रख सकेंगे, जिससे यूरोपीय ग्राहकों को तुरंत आपूर्ति करना और बिक्री बढ़ाना बेहद आसान हो जाएगा।\n\n3. भारत और जर्मनी के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार का स्तर क्या है?\nराजदूत अजीत विनायक गुप्ते के अनुसार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 53 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।\n\n4. जर्मनी में वर्तमान में भारतीय समुदाय की कुल संख्या कितनी है?\nजर्मनी में भारतीय समुदाय की संख्या 3.32 लाख से अधिक हो चुकी है, जो वहां विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-24",
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