भागलपुर में डेयरी बिजनेस का कमाल, इन खास गायों को पालकर होगी बंपर कमाई डेयरी बिजनेस शुरू करने वाले युवाओं के लिए गाय की सही नस्ल चुनना बहुत जरूरी है। पशु विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार और डेयरी समिति के हिसाब से सही नस्ल पालने पर दूध का बेहतर दाम मिलता है। भागलपुर के युवा अब पारंपरिक नौकरियों से मुंह मोड़कर कृषि और पशुपालन जैसे स्वरोजगार की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इस बदलते दौर में मुर्गी पालन और बकरी पालन के साथ-साथ डेयरी फार्मिंग यानी गाय पालन के प्रति युवाओं का रुझान काफी बढ़ रहा है। आज के समय में यह व्यवसाय कमाई का एक बेहतरीन जरिया बनता जा रहा है, जिसमें थोड़ी सी सूझबूझ से बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। हालांकि, नया डेयरी फार्म शुरू करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही नस्ल की गाय चुनने की होती है। कई बार सही जानकारी के अभाव में लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा, यह भी तय करना जरूरी होता है कि दूध को खुले बाजार में बेचना है या किसी डेयरी कलेक्शन समिति को सौंपना है, क्योंकि दोनों के लिए पशुओं का चयन अलग-अलग मानदंडों पर आधारित होता है। डेयरी समिति के लिए कौन सी नस्लें हैं बेहतर अधिक मात्रा में दूध पाने की चाहत में अक्सर लोग एचएफ यानी होलस्टीन फ्राइशियन गायों का चयन कर लेते हैं। लेकिन जब यही दूध स्थानीय डेयरी समितियों में बेचा जाता है, तो वहां खरीद फैट और एसएनएफ की मात्रा के आधार पर तय होती है। एचएफ या क्रॉस ब्रीड गायों के दूध में इन तत्वों की मात्रा कम पाई जाती है, जिसके कारण बाजार में इनका दाम केवल 34 से 35 रुपये ही मिल पाता है। पशु चिकित्सक शुभम कुमार का कहना है कि अगर आप अपना दूध सीधे डेयरी समिति में देना चाहते हैं, तो हमेशा देशी नस्ल की गायों का ही चुनाव करना चाहिए। देशी नस्ल का दूध गुणवत्ता के मामले में बेहतर होता है और इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं। इसके लिए साहीवाल, गिर, राठी और कांकरेज जैसी प्रसिद्ध भारतीय नस्लों को पालना सबसे फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि इन गायों के दूध की बाजार में बहुत अच्छी कीमत मिलती है। इसका आप पर असर यह जानकारी डेयरी का व्यवसाय शुरू करने वाले पशुपालकों के लिए आर्थिक रूप से बेहद उपयोगी है। • भारत में: सही नस्ल का चयन करने से देश भर के पशुपालकों को दूध का सही और अधिक मुनाफा मिल सकेगा। • भागलपुर में: स्थानीय युवा किसान कम लागत में बेहतर नस्ल चुनकर अपनी आय को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। • दूध के दाम: फैट और एसएनएफ के आधार पर दूध बेचने से किसानों को औने-पौने दामों से मुक्ति मिलेगी। • नस्ल चुनाव: साहीवाल और गिर जैसी नस्लें पालने से समितियों में दूध का अधिक मूल्य प्राप्त होता है। ऐसा क्यों हुआ डेयरी व्यवसाय में सही नस्ल का चयन करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अलग-अलग नस्लों के दूध की गुणवत्ता और रासायनिक बनावट में बड़ा अंतर होता है। • दूध की गुणवत्ता: एचएफ और क्रॉस ब्रीड गायें अधिक मात्रा में दूध देती हैं, लेकिन उनके दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा कम होती है। • समिति के नियम: डेयरी समितियां और संग्रह केंद्र दूध की कीमत उसमें मौजूद फैट के आधार पर तय करती हैं, जिससे कम फै and वाले दूध का भाव गिर जाता है। • देशी नस्लों की खासियत: साहीवाल और गिर जैसी भारतीय नस्लों का दूध गाढ़ा होता है और उनमें फैट अधिक पाया जाता है, जिससे उनके दाम बेहतर मिलते हैं। सवाल-जवाब 1. युवा किस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं? युवा पारंपरिक नौकरियों को छोड़कर फार्मिंग जैसे कि गाय पालन, मुर्गी पालन और बकरी पालन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। 2. गाय फार्मिंग में सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है? सबसे बड़ी चुनौती सही नस्ल का चयन करना और यह तय करना होता है कि दूध बाजार में बेचना है या डेयरी समिति को देना है। 3. एचएफ गायों का दूध डेयरी समिति में कम कीमत पर क्यों बिकता है? एचएफ और क्रॉस ब्रीड गायों के दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा कम होती है, इसलिए समिति में इसका भाव 34 से 35 रुपये ही मिलता है। 4. डेयरी समिति में दूध देने के लिए कौन सी गायें पालनी चाहिए? पशु चिकित्सक शुभम कुमार के अनुसार, समिति में दूध देने के लिए साहीवाल, गिर, राठी और कांकरेज जैसी देशी नस्लों का पालन करना चाहिए। https://trendkia.com/business/bhagalpur-me-dairy-business-ka-kamaal-in-khaas-gaiyo-ko-paalkar-hogi-bumper-kamai-32991 TrendKia — Har trend, sabse pehle.