भैंस खरीदने की सोच रहे हैं तो दांतों से परखें उम्र, इन खास बातों का रखें ध्यान नया पशु खरीदने से पहले केवल शरीर या दूध की क्षमता पर भरोसा न करें, बल्कि उसके दांत देखकर उम्र का सही आकलन करें। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पशु की सेहत, चाल और खानपान की जांच करना भी बेहद आवश्यक है। पशु बाजार में मवेशी खरीदने का निर्णय लेते वक्त लोग अक्सर केवल उसकी शारीरिक बनावट या मौजूदा दूध देने की क्षमता को ही मुख्य पैमाना मानते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अनुभवी पशुपालक पीढ़ियों से मवेशी की उम्र का सटीक अंदाजा लगाने के लिए उसके दांतों की बनावट का अध्ययन करते आए हैं। यदि आप भी अपने डेयरी फार्म के लिए कोई नया पशु लाने की योजना बना रहे हैं, तो केवल ऊपरी दिखावे पर जाने के बजाय उसके मुंह के अंदर झांककर उम्र का आकलन करना सबसे भरोसेमंद और पारंपरिक तरीका साबित होता है। उम्र के साथ कैसे बदलते हैं दांत जैसे-जैसे मवेशी की आयु बढ़ती है, उसके जबड़े के अगले हिस्से में दूध के दांत टूटने लगते हैं और उनकी जगह स्थायी दांत उभरने लगते हैं। लगभग दो वर्ष की आयु पूरी होने पर बीच वाले स्थायी दांत बाहर आते हैं, जिसके बाद अगले छह महीनों से एक वर्ष के अंतराल पर आसपास की जोड़ियां भी बदल जाती हैं। लगभग पांच से छह साल का होने तक पशु के सामने के सभी आठ स्थायी दांत पूरी तरह विकसित हो चुके होते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि खानपान और नस्ल के हिसाब से दांत निकलने की इस सामान्य प्रक्रिया में मामूली अंतर आ सकता है, इसलिए केवल इसी एक संकेत पर पूरी तरह निर्भर रहना समझदारी नहीं है. घिसे हुए दांतों से उम्र का संकेत उम्रदराज पशुओं के दांतों में प्राकृतिक रूप से घिसावट साफ तौर पर नजर आने लगती है। लगातार चारे को चबाने की प्रक्रिया के कारण दांतों की ऊपरी चपटी सतह घिस जाती है और वे जवानी के दिनों की तुलना में आकार में छोटे नजर आने लगते हैं। कई बार अत्यधिक उपयोग से दांतों के बीच में अंतराल भी दिखने लगता है, जिससे पशु को चारा खाने में कठिनाई महसूस हो सकती है। हालांकि यह घिसावट केवल उम्र का पैमाना नहीं है, बल्कि पशु किस तरह का सख्त या नरम चारा खाता है, इस बात पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इसलिए केवल घिसे दांत देखकर किसी नतीजे पर पहुंचने से बचना चाहिए। पशु चिकित्सा वैज्ञानिक की सलाह कृषि विज्ञान केंद्र, सुलतानपुर में अपनी सेवाएं दे रहे पशु चिकित्सा वैज्ञानिक दिवाकर कुमार ने स्पष्ट किया है कि दांतों के जरिए उम्र का अंदाजा लगाना एक प्राथमिक कदम है, लेकिन इसके साथ पशु की संपूर्ण शारीरिक स्थिति की गहन जांच करना अनिवार्य है। खरीदारी से पहले इस बात की तस्दीक जरूर करें कि पशु की आंखें पूरी तरह साफ और चमकदार हों, उसकी सांस लेने की गति सामान्य बनी हो और चलते समय वह किसी भी प्रकार से लगड़ा न रहा हो। मवेशी के पूरे शरीर पर किसी पुराने घाव, किसी प्रकार की सूजन या त्वचा से जुड़े किसी असामान्य स्राव की मौजूदगी को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि आप दुधारू पशु ले रहे हैं, तो मौके पर खुद दूध निकलवाकर उसकी वास्तविक मात्रा की परख करें और थन की बनावट में किसी भी गांठ या दर्द के लक्षणों को अच्छी तरह टटोल लें। खरीद से पहले विशेषज्ञ की लें मदद केवल मवेशी के मुंह के भीतर देखकर उसकी सेहत का पूर्ण प्रमाण पत्र नहीं मिल सकता, क्योंकि कई बीमारियां अंदरूनी हो सकती हैं। इसलिए किसी भी अंतिम समझौते पर पहुंचने से पहले अपने नजदीकी पशु चिकित्सक से मवेशी का पूरा स्वास्थ्य परीक्षण जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा पिछले खानपान के तौर-तरीकों और पुराने स्वास्थ्य इतिहास की जानकारी जुटाने से आपको भविष्य में किसी भी आर्थिक नुकसान से बचने में बड़ी मदद मिलेगी। एक पेशेवर डॉक्टर की सलाह से आप एक स्वस्थ और सही उम्र के पशु का चुनाव कर पाएंगे जो आपके निवेश को सुरक्षित रखेगा। इसका आप पर असर भैंस खरीदने की योजना बना रहे पशुपालकों के लिए उम्र और स्वास्थ्य की सही जांच करना सीधा वित्तीय सुरक्षा से जुड़ा है। • आर्थिक सुरक्षा: गलत उम्र का पशु खरीदने से आपको कम दूध उत्पादन और शुरुआती स्वास्थ्य खर्चों का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। • स्वास्थ्य जोखिम: बिना डॉक्टर की जांच के पशु खरीदने से फार्म के बाकी स्वस्थ मवेशियों में बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा रहता है। • उत्पादन क्षमता: मौके पर दूध खुद निकलवाने से आपको दूध की वास्तविक मात्रा का सही अनुमान मिल जाता है और विक्रेता के दावों की सच्चाई परख जाती है। • दस्तावेज और इतिहास: पशु का पुराना स्वास्थ्य इतिहास जानने से भविष्य में अचानक आने वाले इलाज के खर्चों से बचा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ पशुओं की उम्र तय करने के लिए दांतों का अध्ययन करने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है क्योंकि शारीरिक विकास के साथ दांतों में निश्चित बदलाव आते हैं। • शारीरिक परिवर्तन: मवेशियों के जबड़े की बनावट और दांतों का निकलना एक तय जैविक क्रम का पालन करता है जिससे उम्र का अंदाजा लगता है। • आहार का प्रभाव: लगातार कड़ा चारा चबाने के कारण दांतों की ऊपरी परत समय के साथ घिस जाती है जो उम्र बढ़ने का संकेत देती है। • पारंपरिक अनुभव: ग्रामीण इलाकों के किसानों ने लंबे समय के अनुभवों से यह पहचाना है कि दांतों की स्थिति मवेशी की युवावस्था या वृद्धावस्था को दर्शाती है। • व्यावसायिक जरूरत: बाजार में धोखे से बचने और उचित दाम चुकाने के लिए मवेशी की वास्तविक आयु का पता लगाना अनिवार्य हो जाता है। सवाल-जवाब 1. भैंस की उम्र का पता लगाने के लिए सबसे आसान तरीका क्या है? भैंस के सामने के दांतों की संख्या, उनके आकार और घिसावट को देखकर उसकी उम्र का अनुमान लगाया जाता है। 2. भैंस के स्थायी दांत कब निकलने शुरू होते हैं? आमतौर पर करीब दो साल की उम्र में बीच के स्थायी दांत निकलने शुरू होते हैं और पांच से छह साल तक सभी आठ दांत स्थायी हो जाते हैं। 3. दांतों के अलावा खरीदते समय किन शारीरिक अंगों की जांच करनी चाहिए? खरीदते समय आंखें साफ होनी चाहिए, सांस सामान्य होनी चाहिए और पैरों में किसी तरह का लंगड़ापन नहीं होना चाहिए। 4. डॉ. दिवाकर कुमार ने दूध खरीदते समय क्या सलाह दी है? उन्होंने खुद दूध निकलवाकर मात्रा की पुष्टि करने और थन में गांठ या सूजन की जांच करने की सलाह दी है। 5. खरीदने से पहले किसकी सलाह लेना जरूरी है? खरीदने से पहले किसी अनुभवी पशु चिकित्सक से भैंस की पूरी स्वास्थ्य जांच जरूर करवानी चाहिए। https://trendkia.com/business/bhainsa-kharidane-ki-socha-rahe-hain-to-danton-se-parakhen-umra-ina-khasa-baton-ka-rakhen-dhyana-49185 TrendKia — Har trend, sabse pehle.