# नई दिल्ली के भारत मंडपम में औद्योगिक उपकरणों की बड़ी प्रदर्शनी शुरू, देश के MSME को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने पर दिया जा रहा है जोर

> दिल्ली में 'टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026' का आयोजन शुरू हो गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को डिजिटल तकनीकों और इंडस्ट्री 4.0 से जोड़ना है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bharat-mandapam-men-audyogika-upakaranon-ki-bari-pradarshani-shuru-desha-ke-msme-ko-takaniki-rupa-se-adhunika-banane-para-diya-ja--33234 · **Language:** Hindi
**Tags:** एमएसएमई, भारत मंडपम, इंडस्ट्री 4.0, रैंप योजना, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल एकीकरण, कौशल विकास

आने वाले समय में भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। देश के छोटे उद्योगों को तकनीकी रूप से सशक्त और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से नई दिल्ली के प्रसिद्ध प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में ‘टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026’ का आयोजन शुरू हो गया है। इस महत्वपूर्ण औद्योगिक आयोजन में देश-विदेश के कई शीर्ष उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और सरकारी अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। ये सभी दिग्गज मिलकर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने और इसके विकास को गति देने पर गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं। इस एक्सपो के दौरान मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि भारतीय विनिर्माण उद्योग को पारंपरिक तरीकों से हटाकर डिजिटल एकीकरण और 'इंडस्ट्री 4.0' की ओर ले जाना बेहद जरूरी हो चुका है ताकि वैश्विक बाजार में देश की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया जा सके।

 

## अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और तकनीकी समाधानों का प्रदर्शन

इस विशिष्ट औद्योगिक प्रदर्शनी का आयोजन ‘इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया’ द्वारा किया गया है। 'टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026' (TAEE) में विनिर्माण से जुड़े कई आधुनिक और उन्नत तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इस एक्सपो में आने वाले आगंतुकों और उद्यमियों को हैंड टूल्स, पावर टूल्स, कटिंग एवं वेल्डिंग तकनीकों के साथ-साथ अत्याधुनिक स्मार्ट ऑटोमेशन से जुड़े आधुनिक उपकरण देखने को मिल रहे हैं। भारत के इस औद्योगिक अभियान को वैश्विक स्तर पर भी मजबूत समर्थन मिल रहा है, क्योंकि इस प्रदर्शनी में जर्मनी, चीन, ताइवान और हांगकांग जैसे अग्रणी देशों की कंपनियां अपनी तकनीकों के साथ भागीदारी कर रही हैं। इन अंतरराष्ट्रीय देशों की भागीदारी से भारतीय विनिर्माताओं को अपनी तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर उन्नत करने और विश्वस्तरीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

 

## इंडस्ट्री 4.0 और IoT के साथ MSME का डिजिटल एकीकरण

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद और उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (NPC-DPIIT) के उप निदेशक यदु कुमार यादव ने इस अवसर पर भारतीय विनिर्माण के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय विनिर्माण के विकास का अगला चरण देश के MSME को एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित होगा। यह पूरा बदलाव मुख्य रूप से लीन मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर 'इंडस्ट्री 4.0' और IoT आधारित स्मार्ट प्रणालियों को अपनाने पर निर्भर करेगा। पिछले लगभग दस वर्षों में सरकार का मुख्य ध्यान लीन मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से MSME के उत्पादों, उनके निर्माण की प्रक्रियाओं और उनकी प्रणालियों को एक व्यवस्थित ढांचे से जोड़ने पर था। हालांकि, अब इस रणनीति में बड़ा बदलाव आया है और पूरा ध्यान इस विनिर्माण ढांचे को डिजिटल एकीकरण के अगले स्तर पर ले जाने पर केंद्रित किया जा रहा है।

इस डिजिटल बदलाव को व्यावहारिक रूप देने के लिए केंद्रीय MSME मंत्रालय की ओर से एक विशेष योजना चलाई जा रही है जिसे ‘रैंप’ (RAMP) योजना के नाम से जाना जाता है। इस RAMP योजना के अंतर्गत वर्तमान समय में गुजरात राज्य की 750 से भी अधिक औद्योगिक इकाइयों को सक्रिय रूप से 'इंडस्ट्री 4.0' के आधुनिक इकोसिस्टम से जोड़ने का काम किया जा रहा है। गुजरात का यह मॉडल केवल एक शुरुआत है, और सरकार की योजना आने वाले समय में देश के अन्य सभी राज्यों और क्षेत्रों में भी इसी तरह के उन्नत डिजिटल इकोसिस्टम का विकास करने की है ताकि देश के कोने-कोने में स्थित छोटे उद्योगों को डिजिटल क्रांति का सीधा लाभ मिल सके।

 

## वैश्विक कटिंग टूल बाजार और भारत के लिए व्यापक अवसर

इंडियन कटिंग टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव पीजी सुब्रमण्यम ने देश के विनिर्माण उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में लगातार बढ़ रहे घरेलू विनिर्माण बाजार की बदौलत भारतीय कटिंग टूल उद्योग इस समय एक बड़े और ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। अगर हम वैश्विक आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्तमान समय में पूरी दुनिया का कटिंग टूल बाजार लगभग 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंका गया है। उद्योग जगत के विश्लेषणों और अनुमानों के अनुसार, साल 2030 तक इस वैश्विक बाजार के बढ़कर लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है। लेकिन इस विशाल वैश्विक बाजार में भारत की वर्तमान हिस्सेदारी केवल 15% के आसपास ही सिमटी हुई है।

यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि भारतीय उत्पादकों और विनिर्माताओं के पास घरेलू स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजार में भी अपना पैर पसारने के बेहद व्यापक और आकर्षक अवसर मौजूद हैं। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए देश के MSME को अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है। वर्तमान में छोटे उद्योगों के विकास और तकनीकी उन्नयन के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगभग 40 विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें नए स्टार्टअप्स के लिए विशेष वित्तीय और तकनीकी समर्थन भी शामिल है। जरूरत इस बात की है कि इन योजनाओं के प्रति छोटे उद्यमियों में जागरूकता बढ़ाई जाए और उन तक इन सरकारी लाभों की पहुंच को अधिक से अधिक सरल और सुलभ बनाया जाए।

 

## MSME के लिए वित्तीय सहायता और देश की जीडीपी में योगदान

यह टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए न केवल नई और उन्नत तकनीकों को करीब से देखने और समझने का एक शानदार जरिया है, बल्कि यह उनकी तकनीकी प्रगति को तेज करने का भी एक बेहतरीन मंच साबित हो रहा है। इस एक्सपो में विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं और वित्तीय पैकेजों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसके तहत पात्र और योग्य MSME को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए बिना किसी गारंटी (कोलैटरल-फ्री) के 100 करोड़ रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस वित्तीय सहायता का उपयोग करके छोटे उद्यम अपने कारखानों में आधुनिक प्लांट स्थापित कर सकते हैं, नई मशीनरी खरीद सकते हैं, अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार कर सकते हैं और बाजार की प्रतिस्पर्धा में खुद को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र के भारी महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि देश में इस समय 9.5 करोड़ से अधिक MSME इकाइयां कार्यरत हैं। ये लघु उद्योग मिलकर भारत की कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 30% से भी अधिक का योगदान देते हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र देश के लगभग 42 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार और आजीविका प्रदान करने का काम करता है। इतने बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक योगदान देने वाले इस क्षेत्र को अगर तकनीकी रूप से आधुनिक बना दिया जाए, तो यह न केवल देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा बल्कि देश में बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसरों का सृजन करने में भी सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

 

## उत्पादकता बढ़ाने के लिए कौशल विकास और स्थानीयकरण पर जोर

औद्योगिक क्षेत्र के अन्य अनुभवी विशेषज्ञों का मानना है कि टूल्स और उपकरण किसी भी विनिर्माण उद्योग की वास्तविक रीढ़ होते हैं। चाहे ऑटोमोटिव क्षेत्र हो या कोई अन्य भारी उद्योग, कारखानों की उत्पादकता और उनके अंतिम उत्पादन को बढ़ाने में इन उपकरणों की गुणवत्ता सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। भारत इस समय एक उपभोग-आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर विनिर्माण-आधारित आर्थिक विकास की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक इकोसिस्टम का निर्माण करने के लिए आधुनिक तकनीक और देश की मानव प्रतिभा, दोनों का ही समान रूप से विकास करना बेहद आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत के पास वर्तमान में विभिन्न मशीनों, कलपुर्जों और आधुनिक तकनीकों का स्थानीय स्तर पर निर्माण (लोकल उत्पादन) करने का एक बेहतरीन और ऐतिहासिक अवसर है। लेकिन हम तब तक सही मायने में आत्मनिर्भर और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण नहीं कर सकते, जब तक कि हम अपने देश के कार्यबल को अत्यधिक कुशल और प्रशिक्षित नहीं बना लेते। तकनीकी उपकरणों के स्थानीयकरण के साथ-साथ अपने कार्यबल की क्षमताओं का स्थानीयकरण करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए, यदि भारत को अपने संपूर्ण विनिर्माण ढांचे को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी और अग्रणी बनाना है, तो नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ कर्मचारियों के कौशल और उनकी प्रतिभा के विकास पर लगातार काम करना अनिवार्य होगा।

 

## औद्योगिक सुरक्षा और कानूनी अनुपालन का महत्व

इस औद्योगिक विमर्श में दिल्ली सरकार के प्रतिनिधियों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा के मुद्दों को रेखांकित किया। सरकार की ओर से बताया गया कि औद्योगिक उपकरणों और टूल्स का सीधा और गहरा संबंध कर्मचारियों की व्यावसायिक सुरक्षा से होता है। चूंकि लगभग हर प्रकार की औद्योगिक और विनिर्माण गतिविधियों में भारी मशीनरी और उपकरणों का निरंतर उपयोग किया जाता है, इसलिए इन उपकरणों का उचित और सुरक्षित डिजाइन, उनका नियमित रखरखाव और उनके उपयोग के सुरक्षित तौर-तरीके न केवल कामगारों की जान की रक्षा करते हैं बल्कि कारखाने की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय सुधार लाते हैं। इसके विपरीत, खराब गुणवत्ता वाले या असुरक्षित उपकरण कार्यस्थलों पर गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।

भारत सरकार द्वारा लाए गए ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, Health एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020’ (व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता) के अंतर्गत दुर्घटनाओं को रोकने, संभावित खतरों की पहचान करने, जोखिमों का सही मूल्यांकन करने और सभी कर्मचारियों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने पर बहुत अधिक बल दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उद्योगों को सुरक्षा को एक अतिरिक्त या बाद की चीज मानने के बजाय, उपकरणों के शुरुआती डिजाइनिंग स्तर से ही सुरक्षा मानकों को उसमें शामिल कर लेना चाहिए। ऐसा करने से कंपनियां किसी दुर्घटना के होने के बाद केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय, जोखिमों के उत्पन्न होने से पहले ही उनकी पहचान कर उन्हें पूरी तरह से नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

 

## चीन के विनिर्माण मॉडल से सीख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की राह

इस बड़े आयोजन में 300 से अधिक औद्योगिक प्रदर्शकों ने भाग लिया है, जो अपनी तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होना है, तो देश को बड़े पैमाने पर निर्यात बढ़ाने, उत्पादन की मात्रा बढ़ाने (मास प्रोडक्शन), लीन मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों को लागू करने और क्लस्टर-आधारित औद्योगिक विकास पर अपना ध्यान पूरी तरह केंद्रित करना होगा। इस संदर्भ में चीन का उदाहरण काफी प्रासंगिक है। चीन के विनिर्माण क्षेत्र के वैश्विक सफर और अनुभव से यह साफ पता चलता है कि कैसे बहुत बड़े पैमाने पर उत्पादन करना, अत्यधिक कुशल उत्पादन प्रणालियों का विकास करना और एक मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला बनाना किसी भी देश को वैश्विक बाजार में सबसे प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

भारतीय उद्योगों को भी अब वैश्विक बाजार की मांगों को पूरा करने के लिए अपनी पारंपरिक मानसिकता में बदलाव लाना होगा। इसके लिए सरकार के निरंतर सहयोग, मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण और बड़े पैमाने पर क्लस्टर-आधारित विनिर्माण की दिशा में बढ़ने की सख्त जरूरत है। जब देश के विनिर्माता अपनी सोच बदलकर उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार करेंगे, तो भारत के पास अपनी इस विशाल क्षमता के बल पर दुनिया भर के सभी उत्पाद श्रेणियों में एक प्रमुख और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने का पूरा सामर्थ्य मौजूद है।

## इसका आप पर असर
भारत में विनिर्माण क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों का देश के छोटे उद्यमियों और आम नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **रोजगार के अवसर:** एमएसएमई क्षेत्र में आधुनिक मशीनों और तकनीकी सुधारों के आने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसका सीधा मतलब है कि युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर नौकरियां मिल सकेंगी।
- **उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार:** उन्नत कटिंग टूल्स और ऑटोमेशन तकनीकों के उपयोग से देश में बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की होगी। इससे उपभोक्ताओं को अधिक टिकाऊ और बेहतर उत्पाद मिल सकेंगे।
- **आसान वित्तीय सहायता:** पात्र छोटे व्यवसायों के लिए सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये तक के बिना गारंटी वाले ऋण की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए छोटे उद्यमी बिना किसी वित्तीय तनाव के अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।
- **गुजरात में औद्योगिक विकास:** गुजरात की 750 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को वर्तमान में आरएएमपी (RAMP) योजना के तहत सीधे जोड़ा जा रहा है। इससे राज्य के स्थानीय उद्योगों को सीधे तौर पर वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले खड़ा होने में मदद मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
भारत द्वारा विनिर्माण क्षेत्र में इस स्तर पर ध्यान केंद्रित करने और इस एक्सपो के आयोजन के पीछे कई ठोस कारण और पृष्ठभूमियां काम कर रही हैं।

- **वैश्विक बाजार में कम हिस्सेदारी:** वर्तमान में 23 बिलियन डॉलर के वैश्विक कटिंग टूल बाजार में भारत का योगदान सिर्फ 15 प्रतिशत है। इस अंतर को पाटने और साल 2030 तक बढ़ने वाले इस विशाल बाजार पर कब्जा करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को आधुनिक बनाना जरूरी है।
- **मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास का लक्ष्य:** भारत सरकार देश की अर्थव्यवस्था को केवल उपभोग-आधारित मॉडल से हटाकर एक मजबूत विनिर्माण-आधारित मॉडल में बदलना चाहती है। इसके लिए पारंपरिक कारखानों को डिजिटल प्रणालियों से जोड़ना बुनियादी जरूरत है।
- **सुरक्षा और कानूनी अनुपालन:** सरकार 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020' के जरिए कार्यस्थल पर होने वाली दुर्घटनाओं को शून्य पर लाना चाहती है। इसके लिए उपकरणों के शुरुआती डिजाइन में ही सुरक्षा को शामिल करना अनिवार्य किया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026 कहाँ आयोजित किया जा रहा है?
यह प्रदर्शनी नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित की जा रही है।

### 2. इस प्रदर्शनी में कौन-कौन से देश शामिल हो रहे हैं?
इस एक्सपो में भारत को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए जर्मनी, चीन, ताइवान और हांगकांग के उद्योग और प्रदर्शक भाग ले रहे हैं।

### 3. एमएसएमई के लिए 'RAMP' योजना क्या है और इसका क्या फायदा है?
यह एमएसएमई मंत्रालय की एक विशेष योजना है जो छोटे उद्योगों को इंडस्ट्री 4.0 और डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ती है। इसके तहत वर्तमान में गुजरात की 750 से अधिक इकाइयों को उन्नत बनाया जा रहा है।

### 4. पात्र एमएसएमई को कितना सरकारी वित्तीय समर्थन मिल सकता है?
योजनाओं के तहत पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को अपनी मशीनों को आधुनिक बनाने और क्षमता बढ़ाने के लिए ₹100 करोड़ तक का कोलैटरल-फ्री (बिना गारंटी) ऋण मिल सकता है।

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