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  "title": "भारत का पहला पोर्ट आधारित ई-मेथेनॉल प्लांट गुजरात में होगा तैयार, ₹2300 करोड़ की बड़ी परियोजना से वैश्विक जहाजों को मिलेगा हरित ईंधन",
  "summary": "गुजरात के कांडला में 2,300 करोड़ रुपये की लागत से भारत के पहले पोर्ट-आधारित ई-मेथेनॉल संयंत्र की नींव रखी गई है। यह परियोजना देश को हरित समुद्री ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी जहाजों को स्वच्छ ईंधन देने में मदद करेगी।",
  "content": "भारत ने समुद्री परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और टिकाऊ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी ऐतिहासिक पहल की है। केंद्र सरकार के सहयोग से गुजरात के कांडला में देश का पहला ऐसा ई-मेथेनॉल संयंत्र स्थापित किया जा रहा है जो सीधे एक प्रमुख बंदरगाह पर आधारित होगा। इस अत्याधुनिक हरित परियोजना को तैयार करने में कुल 2,300 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजी निवेश किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण संयंत्र दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (DPA) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL) के एक संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य रोजाना 150 टन पर्यावरण अनुकूल ई-मेथेनॉल का उत्पादन करना है, जिससे एशिया और यूरोप के बीच चलने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को स्वच्छ और हरित ईंधन मुहैया कराया जा सके।\n\n \n\nदो चरणों में होगा विशाल परियोजना का विकास\n\nइस बड़े हरित ईंधन संयंत्र को योजनाबद्ध तरीके से दो अलग-अलग चरणों में स्थापित किया जाएगा ताकि इसकी उत्पादन क्षमता को धीरे-धीरे और व्यवस्थित ढंग से बढ़ाया जा सके। इस परियोजना के पहले चरण के तहत करीब 1,200 करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रतिदिन 50 टन ई-मेथेनॉल उत्पादन करने की आधारभूत क्षमता विकसित की जाएगी। इस शुरुआती चरण के काम को जनवरी 2027 तक सफलतापूर्वक पूरा करने का समयसीमा तय किया गया है। इसके तुरंत बाद परियोजना का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें लगभग 1,100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा। इस दूसरे चरण में प्लांट की दैनिक क्षमता में 100 टन की और बढ़ोतरी की जाएगी, जिसे मार्च 2027 तक पूरी तरह से चालू करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन दोनों चरणों के पूरा होने के बाद कुल निवेश का आंकड़ा 2,300 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।\n\n \n\nकेंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रखी आधारशिला\n\nशनिवार को आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान देश के इस अभिनव ई-मेथेनॉल संयंत्र की आधिकारिक आधारशिला रखी गई। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर से वर्चुअल माध्यम से इस ऐतिहासिक परियोजना का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत वैश्विक समुद्री क्षेत्र में एक अग्रणी महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब हमारा देश दुनिया भर के मालवाहक जहाजों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल हरित ऊर्जा प्रदान करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस भव्य शिलान्यास समारोह के अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित थे, जो इस अंतर-राज्यीय सहयोग के महत्व को दर्शाता है।\n\n \n\nहरित तकनीक और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया\n\nएक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह अनूठा संयंत्र पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से ई-मेथेनॉल का निर्माण करेगा। इसकी दैनिक उत्पादन क्षमता 150 टन होगी। इस संयंत्र में उत्पादन के लिए पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा, पानी और जैविक स्रोतों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड यानी बायोजेनिक CO2 का उपयोग किया जाएगा। इससे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। इस खास अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भारत के तेल और पेट्रोलियम उद्योग के इतिहास में अपने राज्य की सदियों पुरानी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब पूरी दुनिया हरित और स्वच्छ ऊर्जा की तरफ बढ़ रही है, तब असम इस बदलाव में भी अपना बहुत बड़ा योगदान दे रहा है।\n\n \n\nअसम के सार्वजनिक उपक्रमों का वैश्विक स्तर पर विस्तार\n\nइस बड़ी परियोजना की सफलता पर असम के मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से भी एक विस्तृत बयान जारी किया गया। इस बयान में कहा गया कि यह संयुक्त उपक्रम असम के औद्योगिक क्षेत्र के भौगोलिक विस्तार की दृष्टि से एक बड़ा और मील का पत्थर साबित होने वाला कदम है। यह परियोजना इस बात का भी प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पर्यावरण के अनुकूल उभरती हुई नई हरित अर्थव्यवस्था में असम के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की कार्यक्षमता और व्यावसायिक कौशल का दायरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। कांडला के बंदरगाह पर बनने वाला यह प्लांट न केवल कार्बन मुक्त भविष्य की राह दिखाएगा बल्कि दोनों राज्यों के आर्थिक सहयोग का भी एक शानदार उदाहरण बनेगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस नई परियोजना के शुरू होने से समुद्री व्यापार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आएगा।\n\n• स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता: कांडला बंदरगाह पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए हरित ईंधन उपलब्ध होने से भारत वैश्विक ग्रीन शिपिंग हब के रूप में उभरेगा। इससे देश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।\n\n• कार्बन उत्सर्जन में कमी: पारंपरिक ईंधन के मुकाबले ई-मेथेनॉल का इस्तेमाल होने से समुद्री जहाजों से होने वाले प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी। इससे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को साफ हवा और बेहतर स्वास्थ्य वातावरण मिलेगा।\n\n• आर्थिक लाभ: भारत में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भारी विदेशी निवेश आकर्षित होगा, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ग्रीन ऊर्जा उद्योग से जुड़े युवाओं और तकनीकी पेशेवरों के लिए भविष्य में करियर की नई राहें खुलेंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nइस बड़े निवेश और संयुक्त उद्यम के पीछे वैश्विक शिपिंग नियमों में बदलाव और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता मुख्य कारण है।\n\n• वैश्विक दबाव: अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के वैश्विक नियमों के चलते जहाजों के लिए स्वच्छ ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत ने समय से पहले तैयारी शुरू कर दी है।\n\n• सहयोग की आवश्यकता: कांडला पोर्ट की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और असम पेट्रो-केमिकल्स की तकनीकी विशेषज्ञता ने इस परियोजना को संभव बनाया है। दोनों संगठनों ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए यह साझा कदम उठाया है।\n\n• बायोजेनिक ऊर्जा का उपयोग: नवीकरणीय ऊर्जा और पानी के साथ-साथ जैविक स्रोतों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड (बायोजेनिक CO2) का उपयोग करके टिकाऊ ईंधन बनाने की आधुनिक तकनीक अब व्यावहारिक हो चुकी है। इस तकनीकी प्रगति ने इस स्तर के बड़े प्लांट को स्थापित करने का रास्ता साफ किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत का पहला पोर्ट-आधारित ई-मेथेनॉल प्लांट कहां बनाया जा रहा है?\nयह प्लांट गुजरात के कांडला में दीनदयाल पोर्ट पर स्थापित किया जा रहा है।\n\n2. इस परियोजना पर कुल कितना निवेश किया जाएगा और इसके साझेदार कौन हैं?\nइस परियोजना पर कुल 2,300 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जो दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (DPA) और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL) का एक संयुक्त उद्यम है।\n\n3. इस संयंत्र की दैनिक उत्पादन क्षमता कितनी होगी और इसे कब तक पूरा किया जाएगा?\nइस संयंत्र की कुल क्षमता 150 टन प्रतिदिन होगी। पहले चरण (50 टन) को जनवरी 2027 और दूसरे चरण (100 टन) को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।\n\n4. ई-मेथेनॉल का उत्पादन करने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल किया जाएगा?\nइस ईंधन के उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, पानी और जैविक स्रोतों से प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड (बायोजेनिक CO2) का उपयोग किया जाएगा।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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