# भारत में चीनी की महंगाई के बीच पाकिस्तान के मिल मालिकों की नजर भारतीय बाजार पर, 12 लाख टन अतिरिक्त स्टॉक बेचने की लगाई गुहार

> घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान के चीनी मिल मालिकों ने अपनी सरकार से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी भारत को निर्यात करने की इजाजत मांगी है, ताकि गोदामों में सड़ रहे स्टॉक से राहत मिल सके।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bharata-men-chini-ki-mahngai-ke-bicha-pakistan-ke-mila-malikon-ki-najara-bharatiya-bajara-para-12-lakha-tana-stoka-bechane-ki-laga-20023 · **Language:** Hindi
**Tags:** चीनी की कीमत, भारत पाकिस्तान व्यापार, पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन, चीनी निर्यात, कृषि व्यापार, चीनी आयात शुल्क

भारतीय घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में आई हालिया तेजी के बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान के चीनी उद्योगपतियों की हलचल काफी बढ़ गई है। गोदामों में जमा चीनी के विशाल भंडार और उसके खराब होने की आशंका से चिंतित पाकिस्तानी व्यापारी अपने इस अधिशेष माल को भारत में बेचने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने औपचारिक रूप से अपनी सरकार के समक्ष यह मांग रखी है कि देश में पड़े लगभग 12 लाख टन अतिरिक्त स्टॉक को भारत भेजने की मंजूरी प्रदान की जाए। मिल मालिकों की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि यदि यह निर्यात होता है तो इससे न केवल उनका अधिशेष स्टॉक खाली होगा, बल्कि मिलों को तत्काल नकदी प्राप्त होगी जिससे गन्ना किसानों के बकाये का समय पर भुगतान किया जा सकेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चीनी पर आयात शुल्क में ढील दी है। दोनों देशों के बीच साझा जमीनी सीमा होने के कारण पाकिस्तानी मिलों का मानना है कि परिवहन लागत अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मुकाबले काफी कम रहेगी, जिससे वे एक प्रतिस्पर्धी आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकते हैं।

## पाकिस्तान में चीनी का विशाल भंडार और गोदामों पर मंडराता संकट
पाकिस्तान के चीनी उद्योग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वहां स्टॉक की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। 15 अगस्त तक देश भर के गोदामों में कुल 28.1 लाख टन चीनी का भंडार दर्ज किया गया था। पाकिस्तान में चीनी की औसत मासिक खपत लगभग 5.5 लाख टन है। इस गणित के हिसाब से वहां मौजूद मौजूदा स्टॉक घरेलू जरूरतों को बिना किसी कमी के कम से कम दिसंबर 2026 तक आसानी से पूरा कर सकता है। इसके बावजूद चीनी मिल मालिकों की चिंताएं खत्म नहीं हो रही हैं, क्योंकि आने वाले नवंबर महीने से गन्ने का नया क्रशिंग सीजन शुरू होने जा रहा है। नए सीजन की शुरुआत के साथ ही गन्ने की पेराई से बड़ी मात्रा में चीनी का नया उत्पादन बाजार में आएगा। अनुमान लगाया गया है कि आगामी सीजन में देश के भीतर करीब 80 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हो सकता है। यदि पुराना स्टॉक गोदामों से बाहर नहीं निकाला गया, तो नए माल के भंडारण के लिए स्थान की भारी किल्लत हो जाएगी और गोदामों पर दबाव चरम पर पहुंच जाएगा।

## उत्पादन लागत से नीचे गिरे दाम और मिलों का गहराता नकदी संकट
निर्यात की मांग के पीछे केवल स्टॉक की अधिकता ही एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि घरेलू बाजार में चीनी की गिरती कीमतें भी एक बड़ी वजह हैं। वर्तमान में पाकिस्तान में चीनी की एक्स-मिल कीमत 130 से 135 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई है, जो कि इसके वास्तविक उत्पादन लागत से भी नीचे बताई जा रही है। लागत से कम कीमत पर बिक्री और गोदामों में भारी मात्रा में बिना बिका माल पड़े होने के कारण चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति बेहद खस्ता हो चुकी है। इस नकदी संकट का सीधा असर मिलों के दैनिक कामकाज पर पड़ रहा है। वे न तो बैंकों का पुराना कर्ज चुका पा रहे हैं और न ही गन्ना किसानों को उनके फसल मूल्य का समय पर भुगतान कर पा रहे हैं। इसी वित्तीय संकट से उबरने के लिए मिल मालिक भारत के बाजार को एक तिनके के सहारे के रूप में देख रहे हैं, जहां कीमतें तुलनात्मक रूप से बेहतर बनी हुई हैं।

## सरकारी टेंडर, पुराना आयातित स्टॉक और व्यापारिक अनिश्चितता
इस बीच पाकिस्तान सरकार की आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने एक अहम कदम उठाते हुए ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान (TCP) को 1.08 लाख मीट्रिक टन चीनी की बिक्री के लिए अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी करने की मंजूरी दी है। यह माल पिछले वर्ष आयात की गई 3 लाख मीट्रिक टन चीनी की खेप का बचा हुआ हिस्सा है। इससे पहले सरकार ने इस आयातित चीनी को अपने ही घरेलू बाजार में बेचने के लिए दो बार प्रयास किए थे, लेकिन बाजार में पहले से मौजूद कम कीमतों के कारण ये दोनों कोशिशें पूरी तरह से नाकाम साबित हुईं। यही स्थिति पाकिस्तान की चीनी नीति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें लागत से कम हैं और सरकार के पास पुराना आयातित स्टॉक फंसा हुआ है, तब मिल मालिकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अतिरिक्त स्टॉक बेचने की होड़ मची है। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार व्यावहारिक रूप से ठप पड़ा हुआ है। इस कारण यह पूरी तरह अनिश्चित है कि भारत सरकार पाकिस्तान से चीनी आयात करने के किसी प्रस्ताव पर विचार करेगी या नहीं, और फिलहाल यह महज पाकिस्तानी मिल उद्योग की एकतरफा इच्छा ही बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यदि भविष्य में पाकिस्तान से चीनी का आयात होता है तो घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़कर खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

**पाकिस्तान में:** अतिरिक्त स्टॉक बाहर निकलने से वहां की चीनी मिलों को नकदी मिलेगी और गन्ना किसानों को समय पर उनका बकाया भुगतान हो सकेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने क्या मांग की है?
PSMA ने पाकिस्तान सरकार से लगभग 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी को भारत निर्यात करने की अनुमति मांगी है।

### 2. पाकिस्तान में चीनी का कितना स्टॉक मौजूद है?
15 अगस्त तक पाकिस्तान के पास 28.1 लाख टन चीनी का स्टॉक था, जो दिसंबर 2026 तक की घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त है।

### 3. पाकिस्तानी चीनी मिलों के सामने क्या मुख्य समस्या है?
चीनी की एक्स-मिल कीमतें उत्पादन लागत से नीचे (130-135 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो) गिर गई हैं और नया क्रशिंग सीजन शुरू होने से गोदामों पर दबाव बढ़ रहा है।

### 4. क्या भारत पाकिस्तान से चीनी खरीदेगा?
इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार ठप है और यह केवल पाकिस्तानी मिलों की एक मांग है।

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