भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का नया रिकॉर्ड, 12 वर्षों में 843 अरब डॉलर पहुंचा कुल एफडीआई केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का एफडीआई प्रवाह 94.53 अरब डॉलर के शिखर पर पहुंच गया, जबकि 2014 से अब तक कुल 81 लाख करोड़ रुपये का विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। भारत में विदेशी पूंजी का प्रवाह लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की मजबूत आर्थिक स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत किए गए 12 वर्षों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद से देश में अब तक कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगभग 843 अरब डॉलर यानी करीब 81 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का यह भरोसा निरंतर बढ़ता जा रहा है, जिसका सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन हालिया समय में देखने को मिला जब एक ही वित्त वर्ष के दौरान देश में एफडीआई का प्रवाह 95 अरब डॉलर के आंकड़े के करीब पहुंच गया। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा वित्त वर्ष 2025-26 का विदेशी निवेश वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 94.53 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर दर्ज हुआ है। वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 तक के पूरे कालखंड में कुल निवेश प्रवाह 843 अरब डॉलर रहा। ‘मेक इन इंडिया’ पहल की 12वीं वर्षगांठ के मौके पर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह प्रगतिशील वृद्धि देश के विनिर्माण और समग्र व्यापारिक परिवेश के लिए एक बेहद उत्साहवर्धक तस्वीर पेश करती है। इस अवधि में विदेशी कंपनियों ने विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाई है। पीएलआई योजनाओं से उत्पादन, निर्यात और रोजगार में उछाल विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने में केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 31 मार्च तक प्राप्त आंकड़ों के आधार पर इन योजनाओं के अंतर्गत 2.40 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष वास्तविक निवेश धरातल पर उतरा है। इस ठोस पूंजीगत निवेश के चलते 23.8 लाख करोड़ रुपये का कुल उत्पादन और बिक्री दर्ज की गई, जबकि 15.2 लाख करोड़ रुपये का माल विदेशों में निर्यात हुआ। इसके अलावा, रोजगार सृजन के मोर्चे पर भी इन योजनाओं ने गहरा असर डाला है, जिसके जरिए अब तक 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों को मिला सीधा फायदा पीएलआई व्यवस्था का सबसे व्यापक लाभ उन्नत विनिर्माण तथा तकनीकी क्षेत्रों को प्राप्त हुआ है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर तथा विशेष इस्पात जैसे सेक्टरों में उत्पादन क्षमताओं का तेजी से विस्तार हुआ है। इन उच्च मूल्य वाले उद्योगों ने न केवल घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया है, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए भी प्रेरित किया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट औद्योगिक शहरों में भारी पूंजी भारत में बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर निरंतर बल दिया जा रहा है, जो विदेशी निवेशकों के लिए बड़े आकर्षण का केंद्र बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के तहत देश भर में नए औद्योगिक स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं। इन अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में विदेशी निवेशक भारी मात्रा में पूंजी लगा रहे हैं, जिससे एफडीआई के आंकड़ों में भारी उछाल आया है। यदि निवेश के स्रोतों पर नजर डालें तो भारत में सबसे बड़ा एफडीआई प्रवाह सिंगापुर से दर्ज किया जाता है, जिसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका और विभिन्न यूरोपीय देश प्रमुख निवेशक के रूप में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। इसका आप पर असर विदेशी निवेश के इस ऐतिहासिक प्रवाह से देश में विनिर्माण, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और औपचारिक रोजगार के कई नए रास्ते खुल रहे हैं। • भारत में: विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार आ रही वैश्विक पूंजी से घरेलू उत्पादन में भारी तेजी आएगी। इससे युवाओं के लिए तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और कोर इंजीनियरिंग में 14 लाख से अधिक रोजगार के अवसरों का दायरा और विस्तृत होगा। • उद्योग और व्यापार: पीएलआई योजनाओं के जरिए 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात होने से स्थानीय सप्लायर्स और एमएसएमई इकाइयों को बड़े वैश्विक कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के आने से स्थानीय स्तर पर नई तकनीक और बेहतरीन मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की पहुंच आसान हो सकेगी। • इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी: नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत बन रहे नए स्मार्ट शहरों से लॉजिस्टिक्स और परिवहन की लागत घटेगी। बेहतर आधुनिक बुनियादी ढांचा बनने से आम नागरिकों और व्यापारियों दोनों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। • निवेशक और बाजार: सिंगापुर, अमेरिका और यूरोपीय देशों से पूंजी प्रवाह बने रहने से विदेशी मुद्रा भंडार और रुपया स्थिर रहने में मदद मिलेगी। इससे बाजार में स्थिरता का सकारात्मक माहौल बना रहेगा। ऐसा क्यों हुआ भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह नीतिगत सुधारों, रणनीतिक विनिर्माण प्रोत्साहनों और बुनियादी ढांचे के तेज आधुनिकीकरण के मिले-जुले प्रयासों के कारण नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। • पीएलआई योजना और विनिर्माण सुधार: केंद्र सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख उद्योगों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन व्यवस्था लागू करने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को सीधा वित्तीय प्रोत्साहन मिला। इन योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश धरातल पर उतरने से उत्पादन और निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। • औद्योगिक स्मार्ट शहरों का निर्माण: राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम के जरिए प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, जिससे कंपनियों के लिए फैक्ट्री लगाना आसान हुआ। विश्वस्तरीय सड़कों, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट टाउनशिप ने वैश्विक निवेशकों का जोखिम घटाया। • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण: अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपनी विनिर्माण निर्भरता को अन्य देशों में बांटने के प्रयासों के बीच भारत एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा। सिंगापुर, अमेरिका और यूरोप से लगातार पूंजी आकर्षित कर भारत ने खुद को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया है। सवाल-जवाब 1. पिछले 12 वर्षों में भारत में कुल कितना एफडीआई आया है? वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में कुल 843 अरब डॉलर (करीब 81 लाख करोड़ रुपये) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। 2. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक एफडीआई कितना दर्ज किया गया? वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 94.53 अरब डॉलर का अब तक का सबसे अधिक वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दर्ज किया। 3. पीएलआई योजनाओं के तहत अब तक कितना वास्तविक निवेश और उत्पादन हुआ है? 31 मार्च तक पीएलआई योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश, 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन व बिक्री और 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है। 4. पीएलआई योजनाओं से कितने रोजगार के अवसर बने हैं? इन उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं से 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। 5. भारत में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश किस देश से आता है? भारत में सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सिंगापुर से आता है, जबकि इसके अलावा अमेरिका और यूरोपीय देश भी प्रमुख निवेशक हैं। https://trendkia.com/business/bharata-men-pratyaksha-videshi-nivesha-ka-naya-rikorda-12-varshon-men-843-araba-dolara-pahuncha-kula-fdi-38601 TrendKia — Har trend, sabse pehle.