# भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, नितिन गडकरी के मॉडल पर बनेंगी 6 नई माल ढुलाई लाइनें

> भारतीय रेलवे ने करीब 16 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली छह नई फ्रेट लाइनों के लिए सड़क क्षेत्र के हाइब्रिड एन्युटी मॉडल को अपनाने का फैसला किया है। इन परियोजनाओं से तीन राज्यों में ढुलाई को बढ़ावा मिलेगा और निजी निवेश आकर्षित होगा।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bharatiya-relave-ka-bara-kadama-nitina-gadakari-ke-model-para-banengi-6-nai-mala-dhulai-lainen-25610 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रेलवे, नितिन गडकरी, माल ढुलाई, बुलेट ट्रेन, हाइब्रिड मॉडल, ओडिशा, झारखंड, तेलंगाना

भारतीय परिवहन नेटवर्क में निजी पूंजी के प्रवाह को गति देने के लिए एक अहम पहल की गई है, जिसके तहत माल ढुलाई को बेहतर बनाने वाली छह नई लाइनों के निर्माण में सड़क परिवहन क्षेत्र की कार्यप्रणाली का उपयोग किया जाएगा। वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाली पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी ने अगस्त के शुरुआती दिनों में इन छह नई पटरियों के विकास प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इन नए मार्गों की कुल लंबाई लगभग 647 किलोमीटर तय की गई है, जिन्हें हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के आधार पर तैयार किया जाएगा। यह पहला अवसर होगा जब रेलवे किसी परियोजना के लिए इस विशिष्ट वित्तीय ढांचे का इस्तेमाल कर रहा है, जिसका उपयोग अब तक मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता रहा है।

इन छह प्रस्तावित रेल परियोजनाओं को देश के तीन प्रमुख राज्यों में विकसित किया जाना तय किया गया है, जिनमें से चार परियोजनाएं ओडिशा में, एक तेलंगाना में और एक झारखंड में स्थापित की जाएंगी। ओडिशा के हिस्से में आने वाली पटरियों में लगभग 49.58 किलोमीटर लंबी बालाराम-पुटगड़िया-तेंतुलोई इनर कॉरिडोर, 112.56 किलोमीटर लंबी बुधापंक-तेंतुलोई-लुबुरी आउटर कॉरिडोर, 101.26 किलोमीटर लंबी जाजपुर-क्योंझर रोड-आराडी-धामरा पोर्ट और 48.96 किलोमीटर लंबी टिकिरी स्टेशन-वॉल्टेयर बॉक्साइट माइंस लाइन शामिल हैं। इसके अलावा तेलंगाना में लगभग 207.80 किलोमीटर लंबी मनुगुरु-रामागुंडम लाइन तथा झारखंड में लगभग 126.52 किलोमीटर लंबी पाकुड़ एवं नगरनाबी से गोड्डा को जोड़ने वाली लाइन का निर्माण किया जाएगा।

इन सभी छह परियोजनाओं के लिए शुरुआती बोली लागत लगभग 15,976 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि पूरे संचालन काल के दौरान कुल पूंजीगत व्यय लगभग 40,866 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इन पटरियों के लिए कंसेशन की अवधि 17 से 19 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, और इन मार्गों पर मुख्य तौर पर कोयले की ढुलाई की जाएगी। कोयले के अलावा इन पटरियों पर लौह अयस्क, बॉक्साइट, कोकिंग कोल, उर्वरक, सीमेंट और विभिन्न प्रकार के खाद्यान्न जैसी जरूरी वस्तुओं का परिवहन भी सुनिश्चित किया जाएगा। शुरुआती चरण में इन परियोजनाओं को डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर प्रारूप के तहत सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी, लेकिन बाजार से प्राप्त प्रतिक्रिया के बाद रेलवे मंत्रालय ने इसकी संरचना की नए सिरे से समीक्षा की और इसे हाइब्रिड मॉडल के तहत लागू करने का निर्णय लिया। अब इन सभी प्रस्तावों को अंतिम मुहर के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद आधिकारिक रूप से निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।

इस नई व्यवस्था के तहत निर्माण कार्य के दौरान आने वाले वित्तीय जोखिम को सरकार और निजी क्षेत्र के बीच आपस में बांटा जाएगा। निर्माण काल के दौरान भारतीय रेलवे की ओर से कुल बोली लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा, जबकि शेष 60 प्रतिशत राशि की व्यवस्था निजी निर्माण कंपनी द्वारा की जाएगी। लाइन के पूरी तरह चालू हो जाने के पश्चात रेलवे इस 60 प्रतिशत राशि का भुगतान किस्तों के रूप में ब्याज सहित चुकता करेगा, और इसके साथ ही पटरियों तथा अन्य परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए निजी इकाई को नियमित भुगतान भी किया जाएगा। इस पूरे ढांचे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ट्रेनों के आवागमन और माल ढुलाई से प्राप्त होने वाला शत-प्रतिशत राजस्व भारतीय रेलवे के पास ही रहेगा। इसके अलावा ट्रैफिक और टैरिफ से जुड़ा सारा जोखिम भी रेलवे खुद वहन करेगा, जिसका मतलब है कि यदि किसी मार्ग पर माल ढुलाई या उससे मिलने वाला राजस्व अनुमान से कम रहता है तो इसका कोई भी आर्थिक दंड निजी कंपनी को नहीं भुगतना पड़ेगा।

रेलवे के आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इन छह परियोजनाओं पर निर्माण कार्य अप्रैल 2028 से शुरू किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है, और एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसके लिए बोली लगाने की प्रक्रिया वित्त वर्ष 2027-28 के दौरान शुरू हो सकती है। इन छह नई लाइनों के अतिरिक्त भी रेलवे के पास सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत लगभग 49 अन्य परियोजनाएं पाइपलाइन में मौजूद हैं, जिनकी कुल अनुमानित लागत करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये है। इससे पहले रेलवे इस मॉडल के जरिए कुल 18 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है जिन पर 16,686 करोड़ रुपये की लागत आई थी, जबकि 16,362 करोड़ रुपये की लागत वाली सात अन्य परियोजनाएं वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। इन चालू कार्यों में मुख्य रूप से कोयला खदानों और बंदरगाहों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली लाइनें शामिल हैं।

## इसका आप पर असर
इस बड़े रेलवे प्रोजेक्ट से देश के लॉजिस्टिक्स सेक्टर और औद्योगिक माल ढुलाई की रफ्तार में सुधार होने की उम्मीद है।

- **भारत में:** देश भर में माल ढुलाई के नए कॉरिडोर बनने से औद्योगिक सामानों की आवाजाही तेज होगी और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
- **ओडिशा, झारखंड और तेलंगाना में:** इन तीनों राज्यों में नई रेल लाइनें बिछने से कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों के परिवहन में सुगमता आएगी तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. इन नई रेल परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत कितनी है?
इन छह परियोजनाओं की शुरुआती बोली लागत लगभग 15,976 करोड़ रुपये आंकी गई है।

### 2. इन नई पटरियों का निर्माण किस मॉडल के तहत किया जाएगा?
इन परियोजनाओं को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।

### 3. यह परियोजनाएं किन-किन राज्यों में बनाई जा रही हैं?
इनमें से चार परियोजनाएं ओडिशा में, एक तेलंगाना में और एक झारखंड में विकसित की जाएंगी।

### 4. इन मार्गों पर मुख्य रूप से किस वस्तु की ढुलाई होगी?
इन मार्गों पर मुख्य रूप से कोयले की ढुलाई की जाएगी, इसके अलावा लौह अयस्क, सीमेंट और खाद्यान्न भी ले जाए जाएंगे।

### 5. इन परियोजनाओं पर निर्माण कार्य कब से शुरू होने का प्रस्ताव है?
रेलवे के अनुसार इन छह परियोजनाओं का निर्माण अप्रैल 2028 से शुरू करने का प्रस्ताव है।

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