# भीलवाड़ा में सरसों बोने से पहले किसान इन नई किस्मों की जानकारी जरूर लें

> भीलवाड़ा में किसान रबी सीजन के लिए सरसों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में DRMRIJ-31, RH 1424 और RH 1706 जैसी किस्मों की खासियत और सावधानियां जानना जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bhilwara-men-sarason-bone-se-pahale-kisana-ina-nai-kismon-ki-janakari-jarura-len-29474 · **Language:** Hindi
**Tags:** सरसों की खेती, रबी सीजन, भीलवाड़ा किसान, DRMRIJ-31, RH 1424, RH 1706, सरसों की किस्म, ICAR

भीलवाड़ा जिले में रबी सीजन नजदीक आते ही सरसों उगाने वाले किसान बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं, और इस साल किस्म के चुनाव को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि सही किस्म ही कम समय में बेहतर पैदावार और रोगों से कम नुकसान की गारंटी देती है।

## राजस्थान के लिए सिफारिश की गई किस्में
राजस्थान में उगाई जाने वाली सरसों के लिए कई किस्मों की सिफारिश की गई है, जिनमें DRMRIJ-31 यानी गिरिराज भी शामिल है। यह किस्म खासतौर पर उन खेतों के लिए बताई गई है जहां तय समय पर बुवाई की जाती है, यानी देरी से बुवाई करने वाले किसानों के लिए यह विकल्प उतना कारगर नहीं माना जाता।

## कम अवधि और रोग सहनशीलता चाहने वालों के लिए विकल्प
जो किसान कम समयावधि और बीमारियों से बचाव को तरजीह देते हैं, वे RH 1424 या RH 1706 के विकल्प पर विचार कर सकते हैं, वहीं DRMRIJ-31 भी एक भरोसेमंद नाम है। ICAR के आंकड़ों के मुताबिक RH 1424 करीब 139 दिन में और RH 1706 करीब 140 दिन में पककर तैयार हो जाती है। दोनों किस्में उत्तरी राजस्थान के लिए सुझाई गई हैं और इनमें माहू कीट के खिलाफ सहनशीलता के साथ-साथ अल्टरनेरिया झुलसा, सफेद रतुआ और स्क्लेरोटिनिया जैसी बीमारियों के प्रति मध्यम दर्जे का प्रतिरोध भी देखा गया है।

## अकेली अच्छी किस्म काफी नहीं
कृषि विशेषज्ञ बार-बार यही समझाते हैं कि सिर्फ बढ़िया किस्म चुन लेने भर से पैदावार नहीं बढ़ जाती। बुवाई सही समय पर हो, बीज प्रमाणित हो, खेत में नमी पर्याप्त हो, खाद संतुलित मात्रा में डाली जाए और फसल पर निगरानी लगातार बनी रहे, तभी अच्छे नतीजे मिलते हैं। बीमारी दिखने के बाद इलाज ढूंढने की बजाय पहले दिन से साफ-सुथरा, प्रमाणित बीज चुनना और पौधों के बीच ठीक दूरी बनाए रखना कहीं बेहतर नतीजे देता है। यह भी ध्यान रहे कि कोई भी किस्म हमेशा के लिए बीमारी से पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती, क्योंकि मौसम बदलने और खेत की परिस्थितियां अलग होने पर रोग का असर घट-बढ़ सकता है।

## नई हाइब्रिड किस्मों पर काम जारी
भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान लगातार ज्यादा पैदावार देने वाली नई किस्मों पर काम कर रहा है। संस्थान ने NRCHB-506 हाइब्रिड और DRMRIJ-31 यानी गिरिराज को बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। NRCHB-506 को समय पर बोई गई फसल के लिए ज्यादा उपज और अधिक तेल की मात्रा देने वाली किस्म बताया गया है, जो राजस्थान के किसानों के लिए फायदेमंद हो सकती है।

## बुवाई से पहले किसान क्या करें
भीलवाड़ा के किसान तय समय पर सरसों बोने की योजना बना रहे हैं। ऐसे में सिर्फ बाजार में चर्चित नाम पर भरोसा करने के बजाय अपने खेत की सिंचाई सुविधा, मिट्टी की किस्म और बुवाई की तारीख के हिसाब से कृषि विभाग से सही किस्म की पुष्टि कर लेना समझदारी होगी। किस्म का सही चुनाव, वक्त पर बुवाई और खेती के वैज्ञानिक तरीकों को साथ लाने पर ही पैदावार में असली फर्क दिखता है।

## इसका आप पर असर
सही किस्म चुनने का सीधा असर किसान की कमाई और मेहनत पर पड़ता है, क्योंकि गलत चुनाव से पैदावार घट सकती है और बीमारी से नुकसान बढ़ सकता है।

- **भारत में:** देश भर के सरसों किसानों के लिए यह सलाह लागू होती है कि सिर्फ बाजार में मशहूर बीज नहीं, बल्कि अपने इलाके की मिट्टी और मौसम के हिसाब से किस्म चुनें। इससे तेल उत्पादन बढ़ने के साथ किसान की आमदनी पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
- **भीलवाड़ा में:** भीलवाड़ा के किसानों को RH 1424, RH 1706 और DRMRIJ-31 जैसी किस्मों की जानकारी अभी बुवाई से पहले ही ले लेनी चाहिए। कृषि विभाग से सिंचाई और मिट्टी के हिसाब से पुष्टि करने पर फसल खराब होने का खतरा कम होगा।
- **बीज खरीद पर असर:** बीज खरीदते वक्त सिर्फ प्रचार पर भरोसा करने से नुकसान हो सकता है, इसलिए प्रमाणित बीज ही खरीदें। नकली या अप्रमाणित बीज से पूरी फसल पर असर पड़ सकता है।
- **रोग प्रबंधन पर असर:** माहू, अल्टरनेरिया झुलसा, सफेद रतुआ और स्क्लेरोटिनिया जैसी बीमारियों से बचाव के लिए शुरुआत से ही सतर्कता जरूरी है। बीमारी दिखने के बाद इलाज कराने में समय और पैसा दोनों ज्यादा लगते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. DRMRIJ-31 किस्म किन किसानों के लिए बेहतर है?
DRMRIJ-31 यानी गिरिराज उन किसानों के लिए बेहतर है जो समय पर बुवाई करते हैं।

### 2. RH 1424 और RH 1706 कितने दिन में तैयार होती हैं?
ICAR के मुताबिक RH 1424 करीब 139 दिन में और RH 1706 करीब 140 दिन में पककर तैयार होती है।

### 3. RH 1424 और RH 1706 किन बीमारियों के प्रति सहनशील हैं?
इन दोनों किस्मों में माहू के प्रति सहनशीलता और अल्टरनेरिया झुलसा, सफेद रतुआ व स्क्लेरोटिनिया के प्रति मध्यम प्रतिरोध देखा गया है।

### 4. NRCHB-506 किस्म की खासियत क्या है?
NRCHB-506 को समय पर बोई गई फसल के लिए ज्यादा उपज और अधिक तेल देने वाली किस्म बताया गया है।

### 5. क्या किसी किस्म को पूरी तरह रोग-मुक्त माना जा सकता है?
नहीं, मौसम और खेत की परिस्थितियों के अनुसार किसी भी किस्म पर रोग का असर बदल सकता है।

### 6. बुवाई से पहले किसानों को किससे सलाह लेनी चाहिए?
किसानों को अपने खेत की सिंचाई, मिट्टी और बुवाई की तारीख के हिसाब से कृषि विभाग से किस्म की पुष्टि करनी चाहिए।

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