# बिहार के भोजपुर में 25 एकड़ में तैयार होगा अमरूद का क्लस्टर, किसानों को प्रति एकड़ मिलेगी ₹1 लाख की मदद

> भोजपुर जिले के जगदीशपुर और कोईलवर प्रखंड में अमरूद की व्यावसायिक बागवानी को बढ़ावा देने के लिए 25 एकड़ का विशेष क्लस्टर तैयार किया जा रहा है, जिसमें किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक का वित्तीय अनुदान मिलेगा।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bihar-ke-bhojpur-men-25-ekara-men-taiyara-hoga-amaruda-ka-klastara-kisanon-ko-prati-ekara-milegi-1-lakha-ki-madada-43500 · **Language:** Hindi
**Tags:** भोजपुर कृषि, अमरूद की खेती, कृषि सब्सिडी, बिहार बागवानी, जगदीशपुर, कोइलवर

बिहार के भोजपुर जिले में फल उत्पादन और बागवानी को संगठित व्यापार का रूप देने के मकसद से एक नई ग्रामीण कृषि परियोजना जमीन पर उतरने जा रही है। ‘गांव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी’ पहल के अंतर्गत जिले के भीतर 25 एकड़ भूमि पर अमरूद की सघन खेती के लिए एक समेकित क्लस्टर की स्थापना की जाएगी। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए जगदीशपुर और कोईलवर प्रखंडों के संबंधित राजस्व गांवों का चयन किया गया है, जहां स्थानीय काश्तकारों को संगठित करके अमरूद के व्यवस्थित बगीचे लगवाए जाएंगे। इस कार्यक्रम में भागीदारी निभाने वाले प्रत्येक किसान को प्रति एकड़ के हिसाब से 1 लाख रुपये तक की सरकारी सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

## शुरुआती वित्तीय मंजूरी और अनुदान के दायरे
परियोजना के संचालन को गति देने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने 16.25 लाख रुपये के शुरुआती फंड की औपचारिक मंजूरी दे दी है। योजना के तय नियमों के आधार पर, पूरे 25 एकड़ के रकबे पर काम पूरा होने की स्थिति में काश्तकारों को कुल 25 लाख रुपये तक का आर्थिक लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकारी स्तर से मिलने वाली इस वित्तीय सहायता का इस्तेमाल खेती के आरंभिक खर्चों में किया जाएगा। इसमें उन्नत किस्म की पौध सामग्री की खरीद, खेतों की गहरी जुताई व समतलीकरण, पोषक खाद, जरूरी कीटनाशक, सिंचाई की मुकम्मल व्यवस्था और खरपतवार नियंत्रण के आवश्यक उपाय शामिल हैं, जिससे उत्पादक किसानों की जेब पर शुरुआती पूंजी का दबाव न पड़े।

## क्लस्टर आधारित खेती से होने वाले संरचनात्मक फायदे
छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरी हुई पारंपरिक बागवानी की तुलना में एक निश्चित इलाके में बड़ा क्लस्टर विकसित करने से खेती की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आती है। सामूहिक स्तर पर संसाधन जुटाने से पौधरोपण का कार्य, आधुनिक सिंचाई सुविधाएं, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और नई कृषि तकनीकों का प्रयोग सभी जुड़े किसानों के लिए सुगम बन जाता है। इसके अलावा, एक ही क्षेत्र में भारी मात्रा में एक समान गुणवत्ता वाले अमरूद पैदा होने से बड़े फल व्यापारी और संस्थागत खरीदार सीधे बाग तक पहुंचेंगे। इसका सीधा लाभ यह होगा कि किसानों को दूरस्थ थोक मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और बिचौलियों की मध्यस्थता खत्म होने से उपज का पूरा मोल उत्पादक के हाथ में आएगा।

## गेहूं और धान के चक्र से इतर मजबूत आर्थिक विकल्प
भोजपुर के ग्रामीण अंचल में गेहूं और धान की पारंपरिक खेती लंबे समय से मुख्य आधार रही है, लेकिन अमरूद की व्यावसायिक खेती किसानों को एक टिकाऊ और नियमित कमाई का वैकल्पिक जरिया देगी। इस क्लस्टर प्रणाली से जुड़कर किसान वैज्ञानिक तरीके सीख सकेंगे, प्रति हेक्टेयर पैदावार में इजाफा दर्ज करेंगे और संगठित बाजार से सीधे संपर्क साधकर अपनी आमदनी को दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

## इसका आप पर असर
इस योजना से भोजपुर के चयनित क्षेत्रों में बागवानी करने वाले किसानों के लिए खेती की शुरुआती लागत में भारी कमी आएगी और उपज की सीधी बिक्री संभव होगी।

- **बिहार में:** राज्य सरकार की बागवानी प्रोत्साहन नीति के तहत संगठित फल क्लस्टर विकसित करने का मॉडल अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है। इससे परंपरागत नकदी फसलों पर निर्भरता कम होगी और बागवानी क्षेत्र में ग्रामीण रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
- **भोजपुर में:** जगदीशपुर और कोईलवर प्रखंड के चयनित गांवों के किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक की प्रत्यक्ष सब्सिडी का लाभ मिलेगा। उत्पादकों को अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना होगा क्योंकि बड़े खरीदार सीधे क्लस्टर से माल उठाएंगे।
- **शुरुआती लागत पर राहत:** पौध सामग्री, खाद, जुताई और सिंचाई के मद में मिलने वाली वित्तीय सहायता से किसानों की अपनी पूंजी सुरक्षित रहेगी। इससे छोटे किसान भी बिना किसी वित्तीय जोखिम के फल बागवानी में कदम रख सकेंगे।
- **बाजार पहुंच में बदलाव:** एक ही जगह 25 एकड़ में अमरूद की खेती होने से स्थानीय फल उत्पादकों की मोलभाव क्षमता मजबूत होगी। मंडियों की ढुलाई और अतिरिक्त कमीशन का खर्च बचने से किसानों की वास्तविक बचत में सुधार आएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
भोजपुर जिले में यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि किसान गेहूं-धान के पारंपरिक फसल चक्र से आगे निकलकर फल बागवानी के जरिए अपनी नियमित आमदनी बढ़ा सकें। छोटे भूखंडों पर अलग-थलग खेती करने से लागत अधिक और मुनाफा कम रहता था, जिसे बदलने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया गया है।

- **परंपरागत फसलों का दबाव:** गेहूं और धान की पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे के चलते किसानों को वैकल्पिक नकदी फसलों की जरूरत महसूस हो रही थी। अमरूद की व्यावसायिक बागवानी कम जोखिम में बेहतर और निरंतर रिटर्न का साधन पेश करती है।
- **बिखरी जोत की कमजोरियां:** अलग-अलग खेतों में छोटी बागवानी करने पर सिंचाई, कीटनाशक और पौध संरक्षण के खर्च काफी बढ़ जाते थे। एक ही क्षेत्र में 25 एकड़ का क्लस्टर बनाने से सामूहिक संसाधनों का उपयोग संभव होगा और प्रति इकाई लागत घट जाएगी।
- **मंडी और बिचौलियों की समस्या:** छिटपुट पैदावार होने पर दूर-दराज की मंडियों में माल ले जाना महंगा पड़ता था और किसान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर होते थे। सामूहिक उत्पादन से बड़े व्यापारी खुद गांव तक आने के लिए प्रेरित होते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. भोजपुर में अमरूद का क्लस्टर कितने क्षेत्र में विकसित किया जाएगा?
भोजपुर जिले में कुल 25 एकड़ क्षेत्र में अमरूद का समेकित क्लस्टर तैयार किया जाएगा।

### 2. इस क्लस्टर योजना के तहत किसानों को कितनी सब्सिडी मिलेगी?
योजना में शामिल होने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।

### 3. योजना के लिए भोजपुर के किन प्रखंडों का चयन किया गया है?
इसके लिए भोजपुर जिले के जगदीशपुर और कोईलवर प्रखंड के राजस्व गांवों को चिह्नित किया गया है।

### 4. कृषि विभाग ने इस परियोजना के लिए कितनी राशि स्वीकृत की है?
कृषि विभाग द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 16.25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

### 5. अनुदान की राशि का उपयोग किसान किन कार्यों में कर सकेंगे?
सब्सिडी का उपयोग पौध सामग्री, खेत की तैयारी, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण के जरूरी खर्चों में किया जाएगा।

### 6. यह योजना किस पहल के तहत चलाई जा रही है?
यह परियोजना ‘गांव की बागवानी, हमारे गौरव की कहानी’ योजना के तहत चलाई जा रही है।

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