बिहार में मशरूम उत्पादन पर 50% सरकारी अनुदान, समस्तीपुर पूसा संस्थान से समझें ₹12 लाख की कमाई का गणित बिहार सरकार मशरूम शेड निर्माण पर 50 फीसदी सब्सिडी प्रदान कर रही है, जबकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा का प्रशिक्षण किसानों को सालाना 10 से 12 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त करने में सहायता करता है। कृषि क्षेत्र में विविधीकरण लाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए मशरूम उत्पादन एक अत्यंत आकर्षक व्यवसाय बनकर उभरा है। समस्तीपुर जिले में स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विशेषज्ञों के अनुसार, कम भूमि और सीमित संसाधनों में भी मशरूम की वैज्ञानिक खेती से हर साल 10 लाख से 12 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ अर्जित किया जा सकता है। राज्य सरकार भी इस स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बुनियादी ढांचे के निर्माण पर वित्तीय अनुदान उपलब्ध करा रही है। सरकारी सब्सिडी और अनिवार्य प्रशिक्षण प्रक्रिया मशरूम उत्पादन की नई इकाई स्थापित करने की इच्छा रखने वाले किसानों के लिए बिहार सरकार एक विशेष प्रोत्साहन योजना चला रही है। इस योजना के अंतर्गत 1,600 वर्गफीट क्षेत्रफल की बांस और फूस की शेड अथवा झोपड़ी निर्माण के लिए स्वीकृत लागत 1 लाख 89 हजार 900 रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। अनुदान राशि का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा से एक सप्ताह का तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करना अनिवार्य होता है। इस सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान किसानों को उन्नत किस्म के बीजों का चयन, खाद तैयार करने की तकनीक, फसलों का रखरखाव और बाजार में विपणन से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाती है। प्रशिक्षण समाप्ति पर दिया जाने वाला प्रमाण पत्र सरकारी सब्सिडी का दावा करने के लिए एक आवश्यक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है। लागत और प्रारंभिक निवेश का पूरा लेखा-जोखा विश्वविद्यालय के मशरूम विभाग में कार्यरत वरीय वैज्ञानिक डॉ. दयाराम सिंह के अनुसार, यद्यपि शेड का स्वीकृत ढांचागत मूल्य अलग है, लेकिन वास्तविक धरातल पर व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने में लगभग 5 लाख रुपये तक का कुल निवेश आता है। इस शुरुआती खर्च में झोपड़ी निर्माण के अतिरिक्त भूसा, स्पॉन या मशरूम बीज, पॉलीथीन बैग, रसायन और आवश्यक श्रम लागत सम्मिलित होती है। वैज्ञानिक के मुताबिक, 1,500 से 1,600 वर्गफीट के ढकी हुई शेड में वर्ष भर जलवायु के अनुकूल विभिन्न किस्मों का चक्रवार उत्पादन लिया जा सकता है। एक बार तैयार की गई बांस-फूस की शेड लगभग तीन वर्षों तक निरंतर उपयोग में लाई जा सकती है, जिससे किसानों को हर साल नए निर्माण पर अतिरिक्त पूंजी नहीं लगानी पड़ती। उत्पादन क्षमता और शुद्ध मुनाफा का गणित उत्पादकता और बाजार दर के गणित को स्पष्ट करते हुए डॉ. दयाराम सिंह ने बताया कि 1,600 वर्गफीट की एक इकाई से सामान्य वैज्ञानिक रखरखाव के माध्यम से सालाना 10 से 12 टन मशरूम प्राप्त होता है। यदि किसान उत्कृष्ट प्रबंधन और तापमान नियंत्रण तकनीकों का प्रयोग करते हैं तो यही उत्पादन बढ़कर 15 टन तक पहुंच सकता है। वर्तमान बाजार परिदृश्य में ताजा मशरूम का थोक और खुदरा मूल्य 120 रुपये से 150 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रहता है। उत्पादन, श्रम, बीज तथा परिचालन संबंधी सभी लागत घटाने के उपरांत किसान एक शेड से प्रति वर्ष 10 लाख से 12 लाख रुपये का साफ मुनाफा कमा सकते हैं, जो पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक है। कई स्थानीय किसान इस प्रशिक्षण मॉडल को अपनाकर व्यावसायिक सफलता हासिल कर चुके हैं। इसका आप पर असर भारत भर में: कम लागत और छोटी जगह में शुरू होने वाली मशरूम खेती पारंपरिक कृषि के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प प्रदान करती है। बिहार में: स्थानीय किसान समस्तीपुर पूसा संस्थान से एक सप्ताह का प्रशिक्षण लेकर और 50 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाकर सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. बिहार में मशरूम शेड निर्माण पर कितनी सब्सिडी मिलती है? बिहार सरकार 1,600 वर्गफीट की शेड के स्वीकृत मूल्य 1,89,900 रुपये पर 50 प्रतिशत का अनुदान प्रदान करती है। 2. मशरूम उत्पादन की सब्सिडी पाने के लिए क्या शर्त है? किसानों को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से एक सप्ताह का प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। 3. एक मशरूम शेड तैयार करने में कुल कितना खर्च आता है? झोपड़ी निर्माण, भूसा, बीज और रसायनों सहित पूर्ण व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने में लगभग 5 लाख रुपये का खर्च आता है। 4. 1,600 वर्गफीट की एक शेड से सालाना कितनी कमाई हो सकती है? सभी खर्च निकालने के बाद किसान एक शेड से सालाना 10 लाख से 12 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं। 5. बांस और फूस से बनी मशरूम शेड कितने समय तक चलती है? एक बार बनाई गई 1,500 से 1,600 वर्गफीट की शेड लगभग तीन वर्षों तक उपयोग योग्य रहती है। प्रेरणा और सबक मशरूम खेती से सफलता के महत्वपूर्ण पाठ: • तकनीकी प्रशिक्षण अनिवार्य: वैज्ञानिक तरीके से बीज चयन और शेड प्रबंधन सीखकर जोखिम कम किया जा सकता है। • सरकारी योजनाओं का लाभ: बुनियादी ढांचे पर 50 प्रतिशत सब्सिडी का उपयोग करके प्रारंभिक पूंजीगत खर्च को आधा किया जा सकता है। • टिकाऊ इन्फ्रास्ट्रक्चर: 3 साल तक चलने वाली बांस-फूस की शेड बनाकर बार-बार होने वाले निर्माण खर्च को बचाया जा सकता है। • फसल विविधीकरण: साल भर मौसम के अनुसार अलग-अलग मशरूम किस्मों का उत्पादन कर निरंतर आय बनाई रखी जा सकती है। https://trendkia.com/business/bihar-men-masharuma-utpadana-para-50-sarakari-anudana-samastipur-pusa-snsthana-se-samajhen-12-lakha-ki-kamai-ka-ganita-14655 TrendKia — Har trend, sabse pehle.