# बीकानेर में खजूर से अचार, लड्डू और बिस्कुट बनाने की मिली ट्रेनिंग, कृषि विश्वविद्यालय ने 37 लोगों को सिखाया प्रोसेसिंग मंत्र

> एसकेआरएयू बीकानेर में आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप में किसानों और महिला समूहों को खजूर से आठ तरह के मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/bikaner-men-khajura-se-achara-laddu-aura-biskuta-banane-ki-mili-treninga-krishi-vishvavidyalaya-ne-37-logon-ko-sikhaya-prosesinga--10692 · **Language:** Hindi
**Tags:** बीकानेर न्यूज़, एसकेआरएयू बीकानेर, खजूर प्रसंस्करण, कृषि समाचार, राजस्थान किसान, स्वरोजगार योजना

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (एसकेआरएयू), बीकानेर में खजूर की खेती करने वाले किसानों और नए उद्यमियों की कमाई बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष पहल की गई है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दौरान कच्चे खजूर से विभिन्न प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को केवल ताजे फल बेचने के बजाय उनसे लड्डू, केक, शरबत, अचार, माउथ फ्रेशनर, बिस्कुट, छुहारा और पिंड जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की तकनीक सिखाई गई, ताकि कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें।

## खजूर के प्रसंस्करण का 37 प्रतिभागियों को मिला व्यावहारिक ज्ञान
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय कार्यशाला में कुल 37 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें स्थानीय किसान, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य, युवा उद्यमी और कृषि व्यवसाय में रुचि रखने वाले लोग शामिल थे। प्रशिक्षण का मुख्य ध्येय ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों से रूबरू कराना था, जिससे वे खजूर का बेहतर उपयोग करके अपने व्यापार को बढ़ा सकें। कृषि विशेषज्ञों ने इस दौरान स्पष्ट किया कि खुले बाजार में सीधे कच्चा फल बेचने की तुलना में जब खजूर से मूल्यवर्धित सामान तैयार करके बेचा जाता है, तो उससे कई गुना अधिक मुनाफा हासिल होता है।

## मौसम की अनिश्चितता से सुरक्षा देगा वैल्यू एडिशन: डॉ. एन. के. शर्मा
समापन सत्र में बोलते हुए अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने कहा कि पूरे राजस्थान में खजूर की पैदावार का क्षेत्र निरंतर बढ़ रहा है, इसलिए अब केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना समय की मांग है। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम, बेमौसम बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से अक्सर किसानों की तैयार फसल खराब हो जाती है या उन्हें मंडी में सही दाम नहीं मिल पाता। ऐसे में यदि किसान खजूर के प्रसंस्कृत उत्पाद बनाकर बाजार में उतारते हैं, तो उन्हें न केवल फसल के नुकसान से सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनकी उपज का बेहतर मूल्य भी सुनिश्चित हो सकेगा।

## विशेषज्ञों ने सिखाई अचार, बिस्कुट और शरबत बनाने की तकनीक
प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने वर्कशॉप में सिखाई गई तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अलग-अलग विशेषज्ञों ने व्यावहारिक सत्रों के दौरान विभिन्न उत्पाद बनाने की प्रक्रिया समझाई। इस कड़ी में डॉ. रूपम गुप्ता ने खजूर का स्वादिष्ट अचार बनाने की सटीक विधि बताई। वहीं डॉ. ममता सिंह ने प्रतिभागियों को खजूर से बिस्कुट और पाचक माउथ फ्रेशनर तैयार करने की ट्रेनिंग दी। इसके अलावा डॉ. सी.पी. मीणा ने खजूर का शरबत तैयार करने का जीवंत प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को खजूर के लड्डू, केक, पिंड और गुणवत्तापूर्ण छुहारा तैयार करने की बारीकियाँ भी व्यावहारिक रूप से सिखाई गईं।

## पैकेजिंग और मार्केटिंग से दूसरे राज्यों में भी बढ़ेगी मांग
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने खजूर के नए प्रसंस्कृत सामानों के विपणन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि खजूर से नए और आकर्षक उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ उनका प्रभावी प्रचार करना बेहद जरूरी है। यदि इन उत्पादों की आधुनिक तकनीक से सुंदर पैकेजिंग की जाए और सही तरीके से ब्रांडिंग व मार्केटिंग की जाए, तो स्थानीय बाजार के अलावा देश के अन्य राज्यों में भी इनकी भारी मांग पैदा की जा सकती है। इससे छोटे व्यवसायियों और कृषकों की वार्षिक आय में काफी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

## ग्रामीण स्वरोजगार और महिला समूहों को मिलेगा बढ़ावा
राजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक मणिशंकर ने कहा कि इस प्रकार की व्यावसायिक ट्रेनिंग ग्रामीण युवाओं और महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षण हासिल करने के बाद प्रतिभागी अपने स्तर पर छोटे कुटीर उद्योग स्थापित कर सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने सभी विषय विशेषज्ञों और प्रशिक्षणार्थियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय आगे भी किसानों और उद्यमियों के हित में ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। इस पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. बी.डी.एस. नाथावत ने किया।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** खजूर प्रसंस्करण तकनीकों से देश भर में कृषि आधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की केवल कच्चे फल पर निर्भरता कम होगी।
- **राजस्थान में:** राज्य के खजूर उत्पादकों और स्वयं सहायता समूहों को मौसम की मार से सुरक्षा के साथ-साथ बेहतर आय के अवसर प्राप्त होंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. एसकेआरएयू बीकानेर में किस विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया था?
विश्वविद्यालय में खजूर के प्रसंस्करण और उससे विविध मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने के लिए दो दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

### 2. वर्कशॉप में खजूर से कौन-कौन से उत्पाद बनाना सिखाया गया?
प्रतिभागियों को खजूर का अचार, बिस्कुट, शरबत, लड्डू, केक, माउथ फ्रेशनर, छुहारा और पिंड बनाना सिखाया गया।

### 3. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल कितने लोगों ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम में कुल 37 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें किसान, महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य और युवा उद्यमी शामिल थे।

### 4. खजूर का अचार बनाने की विधि किस विशेषज्ञ ने सिखाई?
खजूर का अचार बनाने की विस्तृत प्रक्रिया विषय विशेषज्ञ डॉ. रूपम गुप्ता द्वारा सिखाई गई।

### 5. मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से किसानों को क्या फायदा होता है?
वैल्यू एडिशन से कच्चे फल के खराब होने या कम दाम मिलने का जोखिम घटता है और प्रसंस्कृत सामान बेचने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._