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  "title": "बुरहानपुर के किसान ने मामा से सीखी तरकीब, 15 एकड़ में मिक्स खेती कर कमा रहे लाखों",
  "summary": "मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र के किसान जयेश पाटिल ने पारंपरिक फसलों से हटकर मिक्स खेती अपनाई है और वे सालाना 8 से 10 लाख रुपये कमा रहे हैं।",
  "content": "मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कृषि का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जहां किसान अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर बहु-फसल यानी मिक्स खेती की ओर रुख कर रहे हैं। पहले इस इलाके के किसान मुख्य रूप से केले की खेती पर निर्भर रहते थे, लेकिन समय के साथ बदलाव आया है। अब केले के साथ-साथ मक्का, चना, सोयाबीन, कपास और विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की भी बंपर पैदावार ली जा रही है। इस नए बदलाव ने किसानों की आय में भारी इजाफा किया है और वे लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी बुरहानपुर जिले के नेपानगर इलाके से सामने आई है, जहां एक किसान ने अपनी सूझबूझ और मेहनत से खेती की तस्वीर बदल दी है।\n\nमामा के सानिध्य में सीखी खेती की बारीकियां\nइस सफलता की इबारत लिखने वाले किसान जयेश पाटिल का कहना है कि उन्होंने खेती के गुर अपने मामा से सीखे हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 30 सालों से खेती से जुड़े हुए हैं, लेकिन पिछले 10 वर्षों से उन्होंने मिक्स खेती को पूरी तरह अपना लिया है और इसी ने उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह सुधार दिया है। अपनी औपचारिक शिक्षा के बारे में बताते हुए उन्होंने साझा किया कि उन्होंने कक्षा आठवीं तक ही पढ़ाई की है क्योंकि उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। उस दौरान वे अपने मामा के घर पर रहते थे और वहीं रहकर उन्होंने खेती-किसानी के सभी हुनर और तौर-तरीके सीख लिए, जो आज उन्हें लखपति बना चुके हैं।\n\nवैज्ञानिक मार्गदर्शन और कम लागत में बंपर मुनाफा\nजयेश पाटिल कुल 15 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं और अपनी इस मेहनत के बल पर वे अपने इलाके के 10 से 15 मजदूरों और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मुहैया करा रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को काम देना और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। बेहतर पैदावार के लिए वे पूरी तरह सजग रहते हैं और समय-समय पर कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि विभागों के अधिकारियों से संपर्क कर उचित मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। अधिकारियों की सलाह के अनुसार ही वे खेतों में सही मात्रा में खाद और बीज का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम आती है और शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है। हालांकि, कभी-कभी मौसम की बेरुखी जैसे ओलावृष्टि या भारी बारिश के कारण फसलों को नुकसान का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद वे औसतन 8 से 10 लाख रुपये की सालाना कमाई कर लेते हैं।\n\nविविध फसलों से होती है रोजाना की कमाई\nअपनी खेती की रणनीति के बारे में विस्तार से बताते हुए किसान ने कहा कि वे अपने खेतों में केला, कपास, गन्ना, मक्का, चना, सोयाबीन और सब्जियों की एक विस्तृत श्रृंखला उगाते हैं। सब्जियों में वे खासतौर पर करेला, लौकी, गिलकी, भिंडी, पालक, कोथिमीर और मेथी की भाजी की खेती करते हैं। इन सब्जियों को उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनसे रोजाना आमदनी होती रहती है, जिससे घर का खर्च और बाकी वित्तीय जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। इन सभी फसलों का प्रबंधन करके वे हर साल 8 से 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं और साथ ही दर्जनों लोगों को आजीविका भी दे रहे हैं। आठवीं तक पढ़े होने के बावजूद उनकी यह व्यावसायिक समझ आज बड़े-बड़े किसानों के लिए मिसाल बन गई है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर कृषि क्षेत्र से जुड़ी है और इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है:\n\n• भारत में: देश के किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय बहु-फसल और वैज्ञानिक खेती अपनाने की प्रेरणा मिलती है।\n• बुरहानपुर में: स्थानीय किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के नए रास्ते मिलते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जयेश पाटिल कहाँ के रहने वाले हैं और वे कितनी जमीन पर खेती करते हैं?\nजयेश पाटिल मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र के रहने वाले हैं और वे कुल 15 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं।\n\n2. वे मिक्स खेती से सालाना कितना मुनाफा कमा लेते हैं?\nवे मिक्स खेती और सब्जियों के जरिए औसतन 8 से 10 लाख रुपये की सालाना कमाई कर लेते हैं।\n\n3. उन्होंने खेती के गुर किससे सीखे थे?\nजयेश पाटिल ने खेती की सभी बारीकियां अपने मामा के घर पर रहकर उन्हीं से सीखी थीं।\n\n4. वे अपने खेतों में कौन-कौन सी मुख्य फसलें उगाते हैं?\nवे केला, कपास, गन्ना, मक्का, चना, सोयाबीन के साथ-साथ करेला, लौकी, भिंडी और पालक जैसी कई सब्जियां उगाते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nजयेश पाटिल के सफर से किसान और युवा ये महत्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं:\n\n• पारंपरिक सोच से आगे बढ़ना: केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय मिक्स और बहु-फसल खेती अपनाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।\n• विशेषज्ञों की सलाह: कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों का मार्गदर्शन लेने से लागत घटती है और पैदावार बढ़ती है।\n• कड़ी मेहनत और अनुभव: औपचारिक शिक्षा की कमी सफलता में रुकावट नहीं बनती यदि काम के प्रति लगन और सही व्यावहारिक ज्ञान हो।\n• दैनिक आय के स्रोत: सब्जियों जैसी फसलें उगाने से लगातार और रोजाना नकदी मिलती रहती है जिससे वित्तीय संतुलन बना रहता है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-27",
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