{
  "type": "article",
  "title": "केंद्र ने राज्यों को बांटे टैक्स के 1.09 लाख करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को मिला सबसे बड़ा हिस्सा",
  "summary": "केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले राज्यों को टैक्स हिस्सेदारी के तहत 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त जारी की है। इसमें उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक 19,208 करोड़ रुपये और बिहार को 10,845 करोड़ रुपये मिले हैं।",
  "content": "आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों के खजाने में टैक्स हिस्सेदारी के रूप में 1,09,019 करोड़ रुपये की एक और किस्त हस्तांतरित कर दी है। चालू वित्त वर्ष में दी गई यह दूसरी अतिरिक्त किस्त है, जो राज्यों को मिलने वाले नियमित मासिक ट्रांसफर से अलग है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, मजबूत आर्थिक गतिविधियों और बेहतर टैक्स संग्रह के चलते यह कदम उठाया गया है, जिससे राज्यों को अपने वित्तीय प्रबंधन में बड़ी राहत मिलेगी।\n\nबुनियादी ढांचे और जनहित की योजनाओं को मिलेगी गति\nवित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि टैक्स ट्रांसफर के इस फैसले से राज्यों को बुनियादी ढांचे से जुड़े निर्माण कार्यों में तेजी लाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के संचालन और विकास कार्यों के लिए जरूरी धन की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। सरकारी खजाने में एकत्र हुए जीएसटी में से राज्यों को उनका वैधानिक हिस्सा दिया जा रहा है, जिसका सीधा असर देश भर की समग्र आर्थिक वृद्धि पर सकारात्मक रूप से दिखेगा।\n\nत्योहारों के आगमन से पहले राज्यों पर पूंजीगत खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को गति देने का दबाव रहता है। केंद्र की ओर से इस समय वित्तीय संसाधन मिलने से राज्य सरकारें समय पर अपनी योजनाओं को पूरा कर सकेंगी और स्थानीय स्तर पर मांग व आर्थिक गतिविधियों को भी नया संबल मिलेगा।\n\nटैक्स बंटवारे का मौजूदा ढांचा और नियम\nवर्तमान व्यवस्था के मुताबिक, प्रत्येक वित्त वर्ष में केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए जाने वाले कुल केंद्रीय टैक्स का 41 फीसदी हिस्सा 14 किस्तों के जरिए राज्यों में वितरित किया जाता है। टैक्स वसूली की इस व्यवस्था में एक बड़ा हिस्सा आईजीएसटी का होता है, जो मुख्य रूप से निर्यात और आयात पर लगने वाले शुल्क से वसूला जाता है। यह समस्त धनराशि पहले केंद्र सरकार के पास आती है और फिर निर्धारित फार्मूले के अनुसार प्रत्येक राज्य को उसकी तय हिस्सेदारी आवंटित कर दी जाती है।\n\nकिस राज्य के खाते में पहुंची कितनी रकम\nइस ताजा किस्त में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के खाते में गया है, जिसे कुल 19,208 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। वहीं दूसरे स्थान पर बिहार रहा है, जिसे 10,845 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा अन्य प्रमुख राज्यों को आवंटित राशि इस प्रकार है\n\n• मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ रुपये की राशि दी गई है।\n• पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये मिले हैं।\n• महाराष्ट्र के हिस्से में 7,022 करोड़ रुपये आए हैं।\n• राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।\n• ओडिशा को 4,819 करोड़ रुपये और आंध्र प्रदेश को 4,597 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।\n• कर्नाटक को 4,504 करोड़ रुपये तथा तमिलनाडु को 4,466 करोड़ रुपये दिए गए हैं।\n• गुजरात को 4,094 करोड़ रुपये और झारखंड को 3,660 करोड़ रुपये हस्तांतरित हुए हैं।\n\nइस अतिरिक्त पूंजी प्रवाह से सभी राज्यों को त्योहारी मांग को संभालने और अपनी वित्तीय देनदारियों को सुचारू रूप से पूरा करने में सहायता मिलेगी।\n\nइसका आप पर असर\nत्योहारों से ठीक पहले राज्यों को मिले 1.09 लाख करोड़ रुपये से विकास कार्यों और स्थानीय योजनाओं को तेज गति मिलेगी।\n\n• भारत में: राज्य सरकारों के पास नकदी प्रवाह बढ़ने से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं में तेजी आएगी। इससे त्योहारी सीजन के दौरान देश भर के बाजारों में मांग और व्यापारिक गतिविधियों को ठोस सहारा मिलेगा।\n• उत्तर प्रदेश और बिहार में: सबसे ज्यादा राशि पाने वाले इन दोनों राज्यों को अपनी ग्रामीण और शहरी विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे और लंबित जनहित कार्य गति पकड़ेंगे।\n• करदाताओं और आम जनता के लिए: समय पर फंड मिलने से राज्य सरकारों को त्योहारी खर्चों के लिए नए कर लगाने या उधारी बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आम नागरिकों को बेहतर सड़कों, जल आपूर्ति और सरकारी सेवाओं की उपलब्धता का सीधा लाभ मिलेगा।\n• ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए: सरकारी खजाने में पर्याप्त पूंजी होने से विकास कार्यों के रुके हुए बकाए का भुगतान तेजी से हो सकेगा। इससे स्थानीय निर्माण कंपनियों और छोटे कारोबारियों को अपनी कार्यशील पूंजी बनाए रखने में आसानी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमजबूत आर्थिक गतिविधियों और रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शन की वजह से केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में राज्यों के लिए यह अग्रिम टैक्स किस्त जारी की है।\n\n• बढ़ा हुआ टैक्स संग्रह: वित्त मंत्रालय के अनुसार सरकारी खजाने में जीएसटी और प्रत्यक्ष करों की मजबूत आवक के कारण यह दूसरी अतिरिक्त किस्त जारी करना संभव हुआ है। केंद्रीय खजाने में अधिक राजस्व आने से राज्यों की वैधानिक हिस्सेदारी का वितरण भी आसान हुआ है।\n• त्योहारी सीजन की वित्तीय जरूरतें: त्योहारों के दौरान राज्य स्तर पर पूंजीगत खर्च और जन कल्याणकारी कार्यक्रमों की मांग काफी बढ़ जाती है। राज्यों को नकदी संकट से बचाने और निर्माण परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र ने यह राशि समय से पहले हस्तांतरित की है।\n• संवैधानिक बंटवारे का नियम: वित्त वर्ष के दौरान केंद्र द्वारा वसूले जाने वाले कुल कर राजस्व का 41 फीसदी हिस्सा 14 किस्तों में राज्यों को दिया जाना अनिवार्य होता है। इसी तय व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार ने आईजीएसटी और अन्य करों का हिस्सा राज्यों को आवंटित किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केंद्र सरकार ने राज्यों को कुल कितनी अतिरिक्त राशि जारी की है?\nकेंद्र सरकार ने टैक्स हिस्सेदारी के तहत राज्यों को कुल 1,09,019 करोड़ रुपये की अतिरिक्त किस्त जारी की है।\n\n2. इस टैक्स ट्रांसफर में सबसे ज्यादा पैसा किस राज्य को मिला है?\nउत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 19,208 करोड़ रुपये और बिहार को 10,845 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।\n\n3. केंद्र सरकार कुल टैक्स का कितना प्रतिशत राज्यों को देती है?\nवर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार एकत्र किए गए कुल टैक्स का 41 प्रतिशत हिस्सा 14 किस्तों में राज्यों को वितरित करती है।\n\n4. इस किस्त को समय से पहले जारी करने का मुख्य उद्देश्य क्या है?\nत्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए यह राशि जारी की गई है ताकि राज्य पूंजीगत खर्च बढ़ा सकें और विकास व कल्याणकारी योजनाओं को गति दे सकें।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-11-01",
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    "निर्मला सीतारमण",
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