# छपरा के किसान ने मूली की खेती से रचा इतिहास, 30 दिन में कमा रहे हैं बंपर मुनाफा

> सारण जिले के किसान राजेश प्रसाद ने कम समय में तैयार होने वाली फसलों और आधुनिक तरीकों से खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। केवल 8वीं तक पढ़े राजेश मूली और अन्य सब्जियों से रोजाना कमाई कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/chhapra-ke-kisana-ne-muli-ki-kheti-se-racha-itihasa-30-dina-men-kama-rahe-hain-bnpara-munapha-20436 · **Language:** Hindi
**Tags:** मूली की खेती, छपरा किसान, आधुनिक खेती, मल्टी-क्रॉपिंग, कृषि मुनाफा, बिहार कृषि

कृषि के क्षेत्र में कम लागत लगाकर बेहतरीन कमाई कैसे की जा सकती है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण बिहार के सारण जिले में देखने को मिला है। यहां के लहलादपुर प्रखंड अंतर्गत सारण गांव के रहने वाले किसान राजेश प्रसाद ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक खेती के तरीकों से कृषि विशेषज्ञों को भी अचंभित कर दिया है। केवल 8वीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त करने वाले राजेश अपनी व्यावहारिक सोच के बलबूते पर कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसलों से शानदार मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।

## कम लागत में मूली की खेती से बंपर मुनाफा
राजेश प्रसाद का पूरा ध्यान ऐसी फसलों के उत्पादन पर रहता है जो बेहद कम समय में पककर तैयार हो जाएं और जिनकी बाजार में मांग हमेशा बनी रहे। उनकी इस सफलता की मुख्य वजह मूली की खेती है। उनके अनुसार एक कट्ठा जमीन में उन्नत किस्म के बीज और उर्वरक डालने पर कुल खर्च मात्र 300 से 500 रुपये तक ही आता है। बात करें अगर पैदावार की, तो एक कट्ठा खेत से करीब 4 से 5 क्विंटल तक मूली आसानी से मिल जाती है। वर्तमान समय में बाजार में मूली का भाव 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है, जिसके चलते वे एक कट्ठे की फसल बेचकर लगभग 5000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा लेते हैं।

## मात्र 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
राजेश प्रसाद का कहना है कि मूली के साथ-साथ पालक जैसी हरी सब्जियां केवल 25 से 30 दिनों के भीतर ही बाजार में बेचने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती हैं। इतने कम अंतराल में फसल चक्र पूरा हो जाने की वजह से खेत कभी खाली नहीं बैठता है। जैसे ही एक फसल की कटाई पूरी होती है, वे तुरंत उसी खेत में गोभी, टमाटर या बैंगन की बुवाई कर देते हैं, जिससे पूरे सीजन में उनकी आय लगातार बनी रहती है।

## मल्टी-क्रॉपिंग तकनीक से होती है रोजाना कमाई
वे किसी एक ही फसल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मल्टी-क्रॉपिंग यानी बहु-फसलीय तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। अपने रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने और लगातार नगदी प्रवाह बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने खेतों में हरी मिर्च, गोभी, बैंगन और टमाटर जैसी तमाम फसलें उगा रखी हैं। 8वीं तक पढ़े राजेश प्रसाद का यह सफल सफर यह साफ कर देता है कि यदि सही वक्त पर उचित बीजों का चयन किया जाए और सही फसलों की बुवाई हो, तो किसानी कभी भी घाटे का सौदा नहीं बल्कि हर रोज कमाई कराने वाला एक बेहतरीन व्यवसाय साबित हो सकती है।

## इसका आप पर असर
**बिहार में:** सारण और आसपास के किसानों को कम लागत में तेजी से तैयार होने वाली नकदी फसलें अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

**भारत में:** छोटे किसानों के लिए मल्टी-क्रॉपिंग और कम अवधि वाली सब्जियों की खेती से रोजाना आय सुनिश्चित करने का एक बेहतरीन मार्ग प्रशस्त होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. राजेश प्रसाद किस जिले के रहने वाले हैं?
राजेश प्रसाद बिहार के सारण यानी छपरा जिले के लहलादपुर प्रखंड के सारण गांव के रहने वाले हैं।

### 2. मूली की खेती में एक कट्ठे पर कितना खर्च आता है?
एक कट्ठे खेत में उन्नत किस्म के मूली के बीज और खाद का खर्च महज 300 से 500 रुपये के बीच आता है।

### 3. मूली की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
मूली और पालक जैसी हरी सब्जियां मात्र 25 से 30 दिनों के भीतर बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाती हैं।

### 4. एक कट्ठे की मूली बेचकर कितना शुद्ध मुनाफा होता है?
एक कट्ठे खेत से 4 से 5 क्विंटल मूली की पैदावार होती है, जिससे किसान को लगभग 5000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिल जाता है।

### 5. राजेश प्रसाद रोजाना कमाई के लिए कौन सी तकनीक अपनाते हैं?
वे मल्टी-क्रॉपिंग तकनीक अपनाते हैं और गोभी, हरी मिर्च, बैंगन तथा टमाटर जैसी फसलें उगाते हैं।

## प्रेरणा और सबक
**सफलता और सीख के बिंदु:**

- **व्यावहारिक ज्ञान:** औपचारिक शिक्षा की कमी को आड़े न आने दें, बल्कि अपने क्षेत्र के व्यावहारिक अनुभव और सूझबूझ से काम लें।
- **कम अवधि की फसलें:** ऐसी फसलों का चयन करें जो 25 से 30 दिनों में तैयार होकर जल्दी बाजार में बिक सकें।
- **मल्टी-क्रॉपिंग अपनाएं:** एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय विविधता लाएं ताकि नियमित आमदनी बनी रहे।
- **लागत नियंत्रण:** बेहतरीन बीजों और सही उर्वरकों का चुनाव करके न्यूनतम लागत में अधिकतम उत्पादन हासिल करें।

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