छोटे कस्बों के कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए तैयार होंगे 1000 स्थानीय ट्रेड गाइड, पीयूष गोयल ने पेश किया नया खाका देश के दूर-दराज के जिलों और छोटे शहरों से निर्यात को रफ्तार देने के लिए 1000 स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जो मातृभाषा में कारोबारियों का मार्गदर्शन करेंगे। देश के छोटे शहरों और कस्बों में काम कर रहे उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष रणनीति तैयार की है। इस पहल का मुख्य मकसद भाषा की बाधा को दूर करना है, ताकि छोटे कारोबारी भी अपनी स्थानीय बोली और भाषा में वैश्विक व्यापार से जुड़े तकनीकी नियमों को समझ सकें। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने करीब 1000 स्थानीय लोगों का एक समर्पित दल तैयार करने की योजना सामने रखी है। यह दस्ता जमीनी स्तर पर जाकर उन उद्यमियों की सहायता करेगा जो अपने उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेजने की तैयारी कर रहे हैं या पहले से ही निर्यात गतिविधियों में शामिल हैं। मातृभाषा में मिलेगी वैश्विक व्यापार की तकनीकी समझ प्रस्तावित योजना के तहत चयनित करीब 1,000 स्थानीय युवाओं और विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, पैकेजिंग मानकों और कागजी औपचारिकताओं का सघन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन सभी प्रशिक्षित सहयोगियों की सबसे बड़ी खूबी उनकी क्षेत्रीय भाषाओं पर मजबूत पकड़ होगी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन लोगों को राज्यों और जिलों में तैनात किया जाएगा, जिससे ग्रामीण तथा कस्बाई इलाकों के निर्माता बिना किसी झिझक के अपनी ही भाषा में जरूरी जानकारी जुटा सकें। इस पूरी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार क्षेत्रीय व्यापार संगठनों और प्रमुख इंडस्ट्री चैंबर्स के साथ मिलकर काम करेगी। एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी कई मंत्रालयों की सेवाएं व्यापारियों को विभिन्न मंजूरियों और औपचारिकताओं के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर भटकने से राहत दिलाने के उद्देश्य से बड़े केंद्रों पर एकीकृत वाणिज्य और उद्योग कार्यालय स्थापित करने की योजना बनाई गई है। पीयूष गोयल के अनुसार, अलग-अलग महकमों के अलग कार्यालय चलाने के बजाय एक साझा सुविधा केंद्र काम करेगा। इस तरह के सिंगल-कॉन्टैक्ट सेंटर से कारोबारियों को कई सरकारी एजेंसियों की सेवाएं एक ही जगह प्राप्त हो सकेंगी, जिससे लालफीताशाही पर रोक लगेगी और क्लीयरेंस की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज और पारदर्शी बनेगी। व्यापार समझौतों के लाभ और डिजिटल सत्यापन पर जोर उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और व्यापार सुगमता से जुड़े हालिया नीतिगत सुधारों की भी पड़ताल की गई। निर्यातकों को यह स्पष्ट किया गया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से मिलने वाली शुल्क छूट का लाभ उठाने के साथ-साथ उनके कड़े नियमों और गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी अनिवार्य है। इस दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने मांग रखी कि एफटीए के तहत जारी होने वाले मूल स्थान के डिजिटल प्रमाण पत्र (डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन) की मान्यता को अन्य भागीदार मुल्कों में भी व्यापक स्तर पर लागू कराया जाए। साथ ही डीजीएफटी, कस्टम्स विभाग, वाणिज्यिक बैंकों और संबंधित जांच एजेंसियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच बेहतर तकनीकी तालमेल बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। माल ढुलाई खर्च और कागजी अड़चनों को सुलझाने की कवायद समीक्षा बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुद्री माल ढुलाई के बढ़ते खर्च और विभिन्न स्तरों पर अटके दस्तावेजों से जुड़ी व्यावहारिक मुश्किलों पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। नीति निर्धारकों ने माना कि जब तक शुरुआती विनिर्माण से लेकर विदेशी बंदरगाह पर डिलीवरी तक के पूरे एक्सपोर्ट साइकल को सुगम और निर्बाध नहीं बनाया जाएगा, तब तक छोटे व्यापारियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना संभव नहीं होगा। इसलिए लॉजिस्टिक्स बाधाओं को दूर करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसका आप पर असर इस कदम से छोटे शहरों के सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को अपनी ही भाषा में निर्यात की तकनीकी प्रक्रियाएं समझने का सीधा अवसर मिलेगा। • छोटे कारोबारियों के लिए: जिला स्तर पर प्रशिक्षित गाइड मिलने से पहली बार एक्सपोर्ट करने वालों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे कागजी गलतियों के कारण शिपमेंट रुकने की आशंका घटेगी और सीधे ऑर्डर हासिल करना आसान होगा। • लागत और समय की बचत: एकीकृत वाणिज्य कार्यालय खुलने से व्यापारियों को कस्टम्स, डीजीएफटी और बैंक की मंजूरियों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे मंजूरी मिलने में लगने वाले हफ्तों का समय बच सकेगा। • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन और एफटीए नियमों की स्पष्ट जानकारी होने से भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टैक्स छूट का फायदा तेजी से मिलेगा। इससे विदेशी खरीदारों के सामने भारतीय माल की कीमत प्रतिस्पर्धी बनेगी। • लॉजिस्टिक्स में राहत: समुद्री माल ढुलाई और कागजी बाधाओं पर ध्यान दिए जाने से कंटेनर अटके रहने पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क में कमी आ सकती है। इससे निर्माताओं का शुद्ध मुनाफा बढ़ेगा। ऐसा क्यों हुआ छोटे कस्बों में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बनने के बावजूद जागरूकता की कमी, जटिल अंग्रेजी दस्तावेजीकरण और प्रशासनिक अड़चनों की वजह से स्थानीय कारोबारी विदेशी बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे थे। • भाषा और तकनीकी जानकारी का अभाव: अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी संधियां और कानूनी औपचारिकताएं अक्सर कठिन अंग्रेजी शब्दावली में होती हैं, जिससे जिला स्तर के पारंपरिक व्यापारी हिचकिचाते रहे हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षित 1000 गाइड तैयार करने का निर्णय इसी दूरी को पाटने के लिए लिया गया है। • विभागों के बीच तालमेल की कमी: कस्टम्स, डीजीएफटी और वित्तीय संस्थानों के अलग-अलग सिस्टम होने से निर्यातकों को कागजात सत्यापन में भारी देरी झेलनी पड़ती थी। इसीलिए एकीकृत कार्यालय और डिजिटल इंटीग्रेशन की मांग को स्वीकार किया गया है। • लॉजिस्टिक्स खर्च में बढ़ोतरी: वैश्विक स्तर पर समुद्री माल ढुलाई के बढ़े हुए भाड़े ने छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ा दी थी, जिससे सरकार को सप्लाई चेन बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा। सवाल-जवाब 1. सरकार कितने लोगों को ट्रेड की ट्रेनिंग देने की योजना बना रही है? केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने करीब 1000 स्थानीय लोगों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े विषयों में प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव रखा है। 2. प्रशिक्षित लोगों की क्या भूमिका होगी? ये विशेषज्ञ जिला और राज्य स्तर पर नए और मौजूदा कारोबारियों को उनकी क्षेत्रीय भाषा में निर्यात प्रक्रियाओं और नियमों की जानकारी देंगे। 3. एकीकृत वाणिज्य और उद्योग कार्यालय बनाने का क्या उद्देश्य है? इन कार्यालयों का मकसद कई विभागों की सेवाओं को एक ही छत के नीचे लाकर कारोबारियों के लिए मंजूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना है। 4. बैठक में एफटीए से जुड़ी क्या प्रमुख मांग रखी गई? उद्योग जगत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन की प्रक्रिया को अन्य भागीदार मुल्कों में भी लागू करने की मांग की। https://trendkia.com/business/chhote-kasbon-ke-karobariyon-ko-antararashtriya-bajara-se-jorane-ke-lie-taiyara-honge-1000-sthaniya-treda-gaida-piyush-goyal-ne-pe-36688 TrendKia — Har trend, sabse pehle.