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  "type": "article",
  "title": "चीन ने अमेरिका, यूरोपीय संघ, ताइवान और जापान से आने वाले पॉलीऑक्सीमिथाइलीन पर लगाया एंटी डंपिंग शुल्क",
  "summary": "चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका, ईयू, ताइवान और जापान से आयातित पॉलीऑक्सीमिथाइलीन पर 21 अगस्त से नए एंटी डंपिंग टैक्स रेट लागू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों, मुद्रा विनिमय और जिंसों में हलचल देखी जा रही है।",
  "content": "चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने रसायन और प्लास्टिक उद्योग से जुड़े एक बड़े फैसले में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, ताइवान तथा जापान से आयात किए जाने वाले पॉलीऑक्सीमिथाइलीन पर एंटी डंपिंग शुल्क की नई दरों का ऐलान कर दिया है। बीजिंग द्वारा की गई एक विस्तृत समीक्षा के बाद यह टैक्स ढांचा तैयार किया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार यह नई दरें 21 अगस्त से प्रभाव में आ जाएंगी। चीनी अधिकारियों का उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को विदेशी प्रतिस्पर्धा और असमान कीमतों से राहत प्रदान करना है।\n\nविभिन्न विदेशी कंपनियों पर तय की गई शुल्क दरें\nवाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, अलग-अलग निर्यातकों और कंपनियों के लिए कर की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। जापानी रासायनिक निर्माता डायसेल कॉर्पोरेशन पर 35.5 प्रतिशत की दर से एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई गई है। वहीं ताइवान स्थित इसकी इकाई डायसेल एचपीपी ताइवान कंपनी लिमिटेड पर 3.8 प्रतिशत का अपेक्षाकृत कम शुल्क लागू होगा।\n\nइसके अलावा पॉलीप्लास्टिक्स कंपनी लिमिटेड द्वारा चीन के मुख्य भूभाग में निर्यात किए जाने वाले कोपोलिमराइज्ड पॉलीऑक्सीमिथाइलीन पर 35.5 प्रतिशत की दर से भारी शुल्क वसूल किया जाएगा। दूसरी ओर, पॉलीप्लास्टिक्स ताइवान कंपनी लिमिटेड के माध्यम से भेजे जाने वाले इसी रसायन पर 32.6 प्रतिशत का टैक्स रेट निर्धारित किया गया है। 21 अगस्त से प्रभावी होने वाली इन दरों के बाद वैश्विक प्लास्टिक आपूर्ति श्रृंखला में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।\n\nटैरिफ की कार्यप्रणाली और करों से इसका अंतर\nटैरिफ अथवा सीमा शुल्क किसी देश में आने वाले विशिष्ट सामानों या मर्चेंडाइज आयात पर लगाया जाने वाला कर होता है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादकों और स्थानीय निर्माताओं को बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त देना होता है ताकि उन्हें आयातित वस्तुओं की तुलना में कीमत का सीधा लाभ मिल सके। दुनिया भर के देश संरक्षणवाद के एक बड़े हथियार के रूप में आयात कोटा और व्यापारिक बाधाओं के साथ-साथ टैरिफ का व्यापक उपयोग करते हैं।\n\nयद्यपि टैरिफ और सामान्य टैक्स दोनों ही सरकार के राजस्व में वृद्धि करते हैं जिससे सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं का वित्तपोषण होता है, लेकिन दोनों के बीच स्पष्ट अंतर मौजूद है। टैरिफ का भुगतान बंदरगाह या प्रवेश बिंदु पर आयातकों द्वारा अग्रिम रूप से किया जाता है। इसके विपरीत, सामान्य टैक्स खरीद के समय व्यक्तिगत करदाताओं और व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा चुकाया जाता है।\n\nअर्थशास्त्रियों के बीच टैरिफ नीति पर मतभेद\nअंतरराष्ट्रीय व्यापार में टैरिफ के उपयोग को लेकर अर्थशास्त्रियों के दो मुख्य विचार हैं। एक पक्ष का मानना है कि घरेलू उद्योगों को विदेशी झटकों से बचाने और व्यापार असंतुलन को दुरुस्त करने के लिए टैरिफ लागू करना बेहद आवश्यक है। यह नीति स्थानीय नौकरियों और विनिर्माण इकाइयों को संरक्षण प्रदान करती है।\n\nइसके विपरीत, दूसरा पक्ष टैरिफ को एक नुकसानदेह उपाय मानता है। उनका तर्क है कि लंबी अवधि में टैरिफ के कारण उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं। इसके अतिरिक्त, एक देश द्वारा टैरिफ लगाए जाने पर दूसरा देश भी बदले में टैक्स लगा देता है, जिससे एक हानिकारक ट्रेड वॉर छिड़ने का जोखिम उत्पन्न हो जाता है।\n\nडोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ प्रस्ताव और अमेरिकी आयात का गणित\nनवंबर 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू उत्पादकों को मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर टैरिफ का इस्तेमाल करना चाहते हैं। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में अमेरिका के कुल आयात में मेक्सिको, चीन और कनाडा की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही थी।\n\nइस अवधि के दौरान मेक्सिको 466.6 अरब डॉलर के निर्यात के साथ अमेरिका का सबसे बड़ा निर्यातक देश बनकर उभरा। इसी वजह से डोनाल्ड ट्रंप अपनी भावी टैरिफ नीतियों में इन तीनों देशों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। उनका इरादा टैरिफ से प्राप्त होने वाले सरकारी राजस्व का उपयोग करके अमेरिकी नागरिकों के व्यक्तिगत आयकर में कटौती करने का है।\n\nमुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और पाउंड की मजबूती\nचीन के इस फैसले और अमेरिकी आर्थिक घटनाक्रमों के बीच विदेशी मुद्रा बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कारोबार के दौरान AUD/USD 0.17 प्रतिशत गिरकर 0.7112 के स्तर पर दर्ज किया गया। दूसरी तरफ GBP/USD में जोरदार तेजी देखी गई और यह मई के मध्य के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचते हुए 1.3600 से ऊपर निकल गया।\n\nब्रिटेन से जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई, जो बाजार के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप रही। इसके अलावा, जुलाई में ब्रिटेन की कोर CPI सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि इसके 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। अमेरिका में ट्रेजरी विभाग द्वारा दीर्घकालिक बॉन्ड की तरलता सहायता के लिए बायबैक परिचालन के आकार को दोगुना करने के फैसले ने डॉलर पर भारी दबाव डाला, जिससे पाउंड को तेजी हासिल करने में मदद मिली।\n\nयूरो का उछाल और सोने की कीमतें\nडॉलर सूचकांक में आई कमजोरी के चलते EUR/USD में भी तेज तेजी का माहौल बना और यह जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूते हुए 1.1650 के ऊपर कारोबार करने लगा। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड मार्केट को राहत देने के ऐलान से डॉलर बिकवाली के दबाव में रहा। बाजार सहभागियों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स पर टिकी हुई है।\n\nअंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना एशियाई सत्र के दौरान $4,500 के स्तर के आसपास संघर्ष करता हुआ देखा गया, जो जून की शुरुआत के अपने रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा नीचे आया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख ने डॉलर को कुछ हद तक सहारा दिया, जिससे सोने की ऊपरी बढ़त सीमित रही। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड मार्केट में किए गए हस्तक्षेप के बाद बॉन्ड प्रतिफल में आई भारी गिरावट ने सर्राफा धातुओं को निचले स्तरों पर मजबूत समर्थन प्रदान किया।\n\nक्रिप्टो बाजार में हाइपरलिक्विड का उछाल\nडिसेंट्रलाइज़्ड फाइनेंस क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ा उछाल देखा गया जब हाइपरलिक्विड की कीमत में 20 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। यह उछाल डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आया जिसमें उन्होंने कहा कि कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) डिसेंट्रलाइज़्ड पर्पेचुअल फ्यूचर्स प्लेटफॉर्म हाइपरलिक्विड को अमेरिका में आधिकारिक रूप से लाने की दिशा में काम कर रहा है। इस खबर के बाद निवेशकों ने तेजी से खरीदारी की।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: चीन और पश्चिमी देशों के बीच टैरिफ जंग तेज होने से वैश्विक प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है, जिससे भारतीय विनिर्माण लागत में बदलाव आ सकता है।\n\nवैश्विक बाजार में: विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और कच्चे माल पर एंटी डंपिंग शुल्क के कारण इलेक्ट्रॉनिक व ऑटोमोटिव घटकों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चीन ने किन देशों के पॉलीऑक्सीमिथाइलीन पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाया है?\nचीन ने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ, ताइवान और जापान से आयातित पॉलीऑक्सीमिथाइलीन पर एंटी डंपिंग शुल्क लागू किया है।\n\n2. यह नया एंटी डंपिंग टैक्स कब से लागू हो रहा है?\nचीन के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार यह नया एंटी डंपिंग टैक्स 21 अगस्त से लागू हो रहा है।\n\n3. डायसेल कॉर्पोरेशन और पॉलीप्लास्टिक्स पर कितना शुल्क लगाया गया है?\nजापान की डायसेल कॉर्पोरेशन और पॉलीप्लास्टिक्स कंपनी लिमिटेड पर 35.5 प्रतिशत की दर से एंटी डंपिंग शुल्क लगाया गया है।\n\n4. डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ को लेकर क्या प्रस्ताव है?\nडोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए मुख्य रूप से मेक्सिको, चीन और कनाडा से आने वाले आयात पर टैरिफ लगाने तथा उससे प्राप्त राजस्व से व्यक्तिगत आयकर कम करने का प्रस्ताव रखा है।\n\n5. हाइपरलिक्विड के टोकन मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि क्यों हुई?\nडोनाल्ड ट्रंप द्वारा यह कहे जाने के बाद कि CFTC डिसेंट्रलाइज़्ड पर्पेचुअल फ्यूचर्स प्लेटफॉर्म हाइपरलिक्विड को अमेरिका में लाने पर काम कर रहा है, इसके मूल्य में 20 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-20",
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    "चीन अमेरिका व्यापार",
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