# चीन से दूरी बना रहे ब्रांड्स से भारत की गारमेंट इंडस्ट्री को बड़ा मौका

> ब्रोकरेज फर्म 360 वन कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल ब्रांड्स के चीन से दूरी बनाने से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को सालों तक चलने वाला बड़ा मौका मिल सकता है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो बड़े पैमाने पर उत्पादन और तेज डिलीवरी कर पाएंगी।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/china-se-duri-bana-rahe-brandsa-se-india-ki-garamenta-indastri-ko-bara-mauka-8703 · **Language:** Hindi
**Tags:** टेक्सटाइल इंडस्ट्री, भारत निर्यात, चीन प्लस वन, गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, भारत-ब्रिटेन एफटीए, 360 वन कैपिटल

दुनियाभर के फैशन ब्रांड्स अब यह सोचने लगे हैं कि उनके कपड़े कहां बनने चाहिए, और ब्रोकरेज फर्म 360 वन कैपिटल की एक नई रिपोर्ट कहती है कि यही बदलाव आखिरकार भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को वह लंबा ग्रोथ फेज दे सकता है जिसका इंतजार दो दशक से हो रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक यह कोई अस्थायी उछाल नहीं बल्कि एक बड़ा ढांचागत मौका है, जो कंपनियों के चीन पर निर्भरता कम करने और सोर्सिंग को कई देशों में बांटने की कोशिश से पैदा हुआ है।

## ब्रांड्स चीन से दूरी क्यों बना रहे हैं
रिपोर्ट के अनुसार भूराजनीतिक तनाव और मजबूत, कम केंद्रित सप्लाई चेन की जरूरत के चलते अपैरल खरीदार अब सिर्फ एक देश पर निर्भर रहने की बजाय वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग ठिकानों की तलाश कर रहे हैं। भारत लंबे समय से इसी मांग को भुनाना चाहता था। ब्रोकरेज का मानना है कि जिन कंपनियों के पास बड़े पैमाने पर गारमेंट उत्पादन, आपस में जुड़ा हुआ मैन्युफैक्चरिंग ढांचा, ग्राहकों से मजबूत रिश्ते और अनुशासित कामकाज है, उन्हें इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।

## पहले भी चूक चुका है भारत
रिपोर्ट यह नहीं मानती कि यह मौका अपने आप हाथ लग जाएगा। इसमें कहा गया है कि इससे पहले भी भारत को ऐसे मौके मिले थे, लेकिन वह उन्हें टिकाऊ निर्यात बढ़त में नहीं बदल सका, इसलिए सिर्फ अनुकूल ट्रेड पॉलिसी इस बार भी काफी नहीं होगी। आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं, ग्लोबल अपैरल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी सालों से करीब 3 प्रतिशत पर अटकी है, जबकि पिछले दो दशकों में बांग्लादेश की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 9 से 10 प्रतिशत और वियतनाम की करीब 6 से 7 प्रतिशत हो गई है। ब्रोकरेज के मुताबिक भारत की असली लड़ाई अब सस्ते मजदूरों तक सीमित नहीं रह गई है। खरीदार अब सप्लायर को इस आधार पर परखते हैं कि वह कितना उत्पादन कर सकता है, कितनी तेजी से डिलीवरी देता है, उसकी लॉजिस्टिक्स, कंप्लायंस और सस्टेनेबिलिटी कैसी है और उसकी सप्लाई चेन कितनी भरोसेमंद है।

## गारमेंटिंग ही सबसे बड़ी कमजोरी और मौका
रिपोर्ट में गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग को भारत की सबसे बड़ी कमजोरी के साथ-साथ सबसे बड़ा मौका भी बताया गया है। यहां उत्पादन इकाइयां बिखरी हुई और आकार में इतनी छोटी हैं कि वे बड़े ग्लोबल ब्रांड्स के भारी ऑर्डर अकेले संभाल नहीं पातीं, जिससे भारतीय कंपनियां जितना काम मिलता है उसमें से पूरा फायदा नहीं उठा पातीं। रिपोर्ट के मुताबिक आगे चलकर तय यह करेगा कि हर मजदूर कितना उत्पादन दे रहा है, फैक्ट्री का रोजमर्रा का कामकाज कैसा है, ऑटोमेशन कितना अपनाया गया है और डिलीवरी समय पर हो रही है या नहीं, न कि सिर्फ मजदूरी कितनी कम है।

## कॉटन से आगे बढ़ने की जरूरत
रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत को अपने फाइबर बेस को कॉटन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। ग्लोबल मांग अब मानव निर्मित फाइबर, परफॉर्मेंस अपैरल और टेक्निकल टेक्सटाइल की तरफ बढ़ रही है। इसका मतलब है कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को एडवांस्ड फाइबर और यार्न बनाने की क्षमता विकसित करनी होगी, साथ ही कॉटन की उत्पादकता, क्वालिटी और उसकी ट्रेसेबिलिटी यानी स्रोत तक पहुंच को भी बेहतर बनाना होगा।

## ट्रेड डील तभी काम आएगी जब डिलीवरी हो
हाल में लागू हुए भारत-ब्रिटेन एफटीए जैसे ट्रेड समझौतों से खरीदारों के लिए भारत से सोर्सिंग सस्ती हो सकती है, लेकिन ब्रोकरेज का कहना है कि टैरिफ में मिली छूट तभी नियमित ऑर्डर में बदलेगी जब भारतीय फैक्ट्रियां बड़े पैमाने पर डिलीवरी देने के लिए वाकई तैयार हों। रिपोर्ट में कहा गया, "इंडस्ट्री को इसलिए कई ट्रेड एग्रीमेंट्स के साथ-साथ गारमेंटिंग क्षमता, तकनीकी काबिलियत, कंप्लायंस और मजदूर-प्रधान नए मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स में भी ठोस विस्तार चाहिए।"

## फायदा आखिर किसे मिलेगा
आगे चलकर ऑटोमेशन, सस्टेनेबिलिटी और ट्रेसेबिलिटी ही तय करेंगे कि कौन सी कंपनी बाकियों से आगे निकलती है, ऐसा ब्रोकरेज का मानना है। रिपोर्ट का निचोड़ यही है कि भारत के टेक्सटाइल सेक्टर के सामने मौका बड़ा और असली है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो पैमाना, इंटीग्रेशन, प्रोडक्टिविटी, प्रोडक्ट इनोवेशन और सोच-समझकर पूंजी लगाने के तरीके को साथ लेकर चलेंगी, न कि सिर्फ अनुकूल ट्रेड पॉलिसी या सस्ती मजदूरी के भरोसे बैठी कंपनियों को।

## इसका आप पर असर
यह रिपोर्ट बताती है कि भारत का गारमेंट और टेक्सटाइल कारोबार आगे किस दिशा में जा सकता है, और इसका फायदा असल में किसे मिलेगा।

- **फैक्ट्री वर्कर्स और नौकरी तलाशने वालों के लिए:** चीन से हटकर आ रहे ऑर्डर से गारमेंट फैक्ट्रियों में नई नौकरियां बन सकती हैं, लेकिन सिर्फ उन्हीं कंपनियों में जो अपनी क्षमता और ऑटोमेशन बढ़ाएंगी।
- **निवेशकों के लिए:** रिपोर्ट के मुताबिक असली फायदा उन्हीं मैन्युफैक्चरर्स को मिलेगा जिनके पास बड़ा पैमाना, एकीकृत कामकाज और मजबूत एग्जीक्यूशन है, पूरे सेक्टर को नहीं।
- **निर्यातकों और विदेशी खरीदारों के लिए:** भारत-ब्रिटेन एफटीए जैसे समझौतों से भारत में बने कपड़े विदेशों में ज्यादा किफायती दाम पर मिल सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. 360 वन कैपिटल की रिपोर्ट किस बारे में है?
यह रिपोर्ट बताती है कि चीन+1 सोर्सिंग रणनीति और सप्लाई चेन के विविधीकरण से भारत के टेक्सटाइल सेक्टर को कई सालों तक चलने वाला बड़ा मौका मिल सकता है।

### 2. ग्लोबल अपैरल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी कितनी है?
भारत की हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत पर अटकी हुई है, जबकि बांग्लादेश की हिस्सेदारी बढ़कर 9-10 प्रतिशत और वियतनाम की 6-7 प्रतिशत हो गई है।

### 3. रिपोर्ट के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग, यानी उत्पादन का बिखरा और छोटे पैमाने पर होना, भारत की सबसे बड़ी कमजोरी बताई गई है।

### 4. भारत-ब्रिटेन एफटीए का इस पर क्या असर पड़ेगा?
यह एफटीए भारत से सोर्सिंग को सस्ता बना सकता है, लेकिन तभी फायदा मिलेगा जब भारतीय फैक्ट्रियां बड़े ऑर्डर समय पर पूरा कर पाएं।

### 5. रिपोर्ट के मुताबिक आगे कौन सी कंपनियां सबसे ज्यादा फायदे में रहेंगी?
वे कंपनियां जो बड़े पैमाने पर गारमेंटिंग, एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग, मजबूत ग्राहक संबंध और अनुशासित कामकाज रखती हैं।

### 6. क्या सिर्फ अनुकूल ट्रेड पॉलिसी काफी होगी?
नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक भारत पहले भी ऐसे मौके गंवा चुका है, इसलिए स्केल, प्रोडक्टिविटी और डिलीवरी क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

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