# जीएसटी पंजीकरण को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, बिना बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं मिलेगा अप्रूवल

> दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अब बायोमेट्रिक आधारित आधार ऑथेंटिकेशन के बिना कोई भी नया जीएसटी पंजीकरण नहीं किया जाएगा। अदालत ने फर्जीवाड़े और राजस्व को हो रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताई है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/delhi-haikorta-ka-jiesati-pnjikarana-phaisala-biometric-adhara-anivarya-31027 · **Language:** Hindi
**Tags:** जीएसटी पंजीकरण, दिल्ली हाईकोर्ट, आधार ऑथेंटिकेशन, टैक्स चोरी, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, व्यापार कानून

यदि आप देश में किसी भी प्रकार का कारोबार संचालित करते हैं या नया व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया है कि अब बायोमेट्रिक आधारित आधार ऑथेंटिकेशन के बिना माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने उन तमाम याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह कड़ा आदेश जारी किया, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि उनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल करके फर्जी जीएसटी पंजीकरण हासिल किए जा रहे हैं।

## फर्जी पंजीकरण और भारी टैक्स चोरी के आंकड़े
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष सरकारी आंकड़ों का भी जिक्र किया गया। पीठ ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि संसद में फर्जी जीएसटी पंजीकरण से जुड़े एक सवाल के लिखित जवाब में संबंधित मंत्री ने यह जानकारी दी थी कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान देश भर में कुल 2,800 फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले पकड़ में आए थे। इन फर्जी मामलों के जरिए कुल 15,085 करोड़ रुपये की भारी-भरकम टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया था। इसके ठीक बाद के वित्त वर्ष यानी 2024-25 में भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ और 1,654 नए फर्जी पंजीकरणों का पता चला, जिनके माध्यम से 13,109 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की गई थी।

## अधिकारियों की विफलता और बायोमेट्रिक अनिवार्यता
अदालत ने पाया कि सरकार की ओर से पहले ही यह आश्वासन दिया गया था कि जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जाएगा, लेकिन संबंधित अधिकारी इस व्यवस्था को जमीन पर लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। इस प्रशासनिक सुस्ती का नतीजा यह निकला कि असामाजिक तत्व लगातार चुराए गए, निष्क्रिय किए गए या फर्जी दस्तावेजों के सहारे पैन और आधार विवरण का गलत इस्तेमाल करके धोखाधड़ी वाले पंजीकरण धड़ल्ले से करा रहे हैं। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी इस व्यवस्था को समय पर लागू करने में असफल रहे हैं, जिसके कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और निर्दोष नागरिकों को बेवजह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

## देशभर के अधिकारियों को सख्त निर्देश
न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि अब देश भर के सभी संबंधित अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि वे भविष्य में किसी भी आवेदक को बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना जीएसटी पंजीकरण की अनुमति बिल्कुल न दें। अदालत ने पहले भी सरकार को होने वाले राजस्व के नुकसान और आम नागरिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों से अपनी तरफ से उचित कदम उठाने का आग्रह किया था। अदालत की मंशा इस पूरे मामले को पूरी गंभीरता के साथ देखने और इस तरह के अवैध सिंडिकेट पर नकेल कसने की है ताकि सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके।

## क्रियान्वयन में दिक्कत और 22 सितंबर की समय सीमा
इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने में आने वाली किसी भी व्यावहारिक कठिनाई या तकनीकी अड़चन को लेकर अदालत ने अधिकारियों को यह छूट दी है कि वे अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को आगामी 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है और कहा है कि तब तक किसी भी प्रकार की आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। अपने पिछले आदेश में भी अदालत ने इस बात का जिक्र किया था कि अधिकारी इस कड़वी सच्चाई से इनकार नहीं कर सके हैं कि निर्दोष नागरिकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके बड़े पैमाने पर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराए जा रहे हैं।

## मौजूदा व्यवस्था और भविष्य का बदलाव
मौजूदा समय में प्रचलित जीएसटी कानूनों के अंतर्गत पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आधार वेरिफिकेशन को पूरी तरह अनिवार्य नहीं बनाया गया है। यही मुख्य वजह है कि धोखाधड़ी करने वाले लोग आसानी से पैन कार्ड और अन्य कागजातों का दुरूपयोग करके बिना किसी वास्तविक सत्यापन के पंजीकरण हासिल कर लेते हैं। अदालत का यह आदेश पूरी तरह लागू होने के बाद केवल उसी आधार कार्ड के जरिए जीएसटी का नया पंजीकरण संभव हो सकेगा, जिसमें दर्ज आधिकारिक मोबाइल नंबर के माध्यम से उसका सफल सत्यापन किया जा सके। कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताते हुए यह भी कहा कि देश में जीएसटी लागू हुए लगभग 9 साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस जरूरी व्यवस्था को लागू करने में असमर्थ रहे हैं, जिससे अंततः आम आदमी और देश के खजाने को भारी नुकसान हो रहा है।

## इसका आप पर असर
जीएसटी पंजीकरण में बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होने से देश भर के कारोबारियों और नए उद्यमियों को फर्जीवाड़े से बड़ी सुरक्षा मिलेगी।

- **भारत में:** सभी राज्यों में नए जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए अब आवेदक को बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे फर्जी कंपनियों के नाम पर होने वाली करोड़ों की टैक्स चोरी पर रोक लगेगी।
- **कारोबारियों के लिए:** असली व्यवसायियों को दूसरों द्वारा उनके पैन और आधार के दुरुपयोग से राहत मिलेगी। हालांकि, नए पंजीकरण के दौरान सत्यापन प्रक्रिया में थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अदालत का फैसला देश में लगातार बढ़ रहे फर्जी जीएसटी पंजीकरण और उससे होने वाली भारी राजस्व हानि के मामलों के कारण आया है।

- **फर्जी दस्तावेजों का दुरुपयोग:** धोखेबाजों द्वारा निर्दोष नागरिकों के चोरी किए गए या निष्क्रिय पैन और आधार नंबर का उपयोग करके अवैध रूप से जीएसटी नंबर हासिल किए जा रहे थे।
- **प्रशासनिक विफलता:** सरकार द्वारा पहले घोषणा किए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारी इस बायोमेट्रिक प्रणाली को समय पर लागू करने में नाकाम रहे, जिसके कारण अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. जीएसटी पंजीकरण के लिए अब क्या अनिवार्य कर दिया गया है?
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अब बिना बायोमेट्रिक आधारित आधार ऑथेंटिकेशन के कोई भी जीएसटी पंजीकरण नहीं किया जाएगा।

### 2. किन न्यायाधीशों की पीठ ने यह फैसला सुनाया है?
यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ द्वारा दिया गया है।

### 3. वर्ष 2023-24 में फर्जी जीएसटी पंजीकरण से कितनी टैक्स चोरी हुई थी?
वर्ष 2023-24 के दौरान 2,800 फर्जी पंजीकरण के मामलों में कुल 15,085 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई थी।

### 4. वर्ष 2024-25 में कितने फर्जी पंजीकरण सामने आए थे?
वर्ष 2024-25 के दौरान 1,654 फर्जी पंजीकरण मामलों में 13,109 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का पता चला था।

### 5. इस मामले की अगली सुनवाई कब तय की गई है?
अदालत ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया है।

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