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  "title": "दिल्ली में अब एक ही पोर्टल से होगा ट्रेड लाइसेंस रिन्यू, प्रॉपर्टी टैक्स के साथ देने होंगे 15 फीसदी ज्यादा",
  "summary": "दिल्ली नगर निगम ने जनरल ट्रेड लाइसेंस सिस्टम को प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल से जोड़ दिया है। 23 जून से शुरू हुई इस नई व्यवस्था में कारोबारी प्रॉपर्टी टैक्स पर 15 फीसदी अतिरिक्त रकम देकर लाइसेंस रिन्यू करा सकते हैं और ऑनलाइन रसीद ही लाइसेंस मानी जाएगी।",
  "content": "दिल्ली में दुकान और कारोबार चलाने वालों के लिए अब ट्रेड लाइसेंस रिन्यू कराना पहले से आसान हो गया है। दिल्ली नगर निगम ने जनरल ट्रेड लाइसेंस (GTL) की पूरी व्यवस्था को प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल के साथ जोड़ दिया है, यानी अब दोनों के भुगतान एक ही पोर्टल से होंगे। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि यह बदलाव खासतौर पर इसलिए किया गया है ताकि ऑनलाइन रिन्यू को लेकर कारोबारियों के बीच चल रही उलझन खत्म हो सके। नई प्रक्रिया 23 जून से लागू हो गई है।\n\nइस एकीकृत सिस्टम के तहत कारोबारी अपने ट्रेड लाइसेंस को प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी फीस चुकाकर रिन्यू करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें सालाना प्रॉपर्टी टैक्स की रकम पर 15 फीसदी अतिरिक्त राशि देनी होगी। भुगतान के बाद जो ऑनलाइन रसीद मिलेगी, वही उस कारोबारी परिसर के लिए रिन्यू किए गए लाइसेंस के तौर पर मानी जाएगी।\n\nप्रॉपर्टी टैक्स का मतलब और फीस का नियम\nनिगम ने साफ किया है कि यहां प्रॉपर्टी टैक्स से आशय उसी परिसर पर बनने वाले टैक्स से है, जहां कारोबार चल रहा है। नई व्यवस्था की फीस का नियम दोहराते हुए निगम ने अपने बयान में कहा, \"जनरल ट्रेड लाइसेंस फीस देय प्रॉपर्टी टैक्स की 15 फीसदी की दर से ली जाएगी, और पोर्टल से जो ऑनलाइन पेमेंट रसीद बनेगी, उसे ही ट्रेड लाइसेंस माना जाएगा।\"\n\nमहीनों की देरी और कारोबारियों की चिंता\nयह बदलाव ऐसे समय आया है जब कारोबारी कई महीनों से इस व्यवस्था के लागू होने में हो रही देरी को लेकर परेशान थे। ज्यादातर कारोबारियों को उम्मीद थी कि 30 अप्रैल की रिन्यू की आखिरी तारीख से पहले ही पोर्टल का यह लिंक तैयार हो जाएगा। कारोबारियों का कहना है कि एक साथ भुगतान वाली यह व्यवस्था दिल्ली भर के कई प्रतिष्ठानों के लिए अनुपालन की लागत घटा सकती है।\n\nलेकिन दिक्कत यह रही कि अप्रैल में जब रिन्यू का दौर शुरू हुआ, तब पोर्टल का लिंक सक्रिय ही नहीं था। इस वजह से जुर्माने से बचने के लिए कारोबारी पुराने लाइसेंस सिस्टम का ही सहारा लेते रहे। कमला नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने पहले कहा था, \"आखिरी तारीख 30 अप्रैल तक रही और नई व्यवस्था लागू नहीं हुई थी। कारोबारियों के पास पुरानी प्रक्रिया अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।\"\n\nरोलआउट में देरी की वजह\nनिगम के अधिकारियों के मुताबिक प्रक्रिया से जुड़े कुछ सवालों ने इस व्यवस्था को लागू करने में देरी कराई। अधिकारियों को यह तय करना था कि लाइसेंस फीस आखिर कौन भरेगा, संपत्ति का मालिक, उसमें रहने वाला या फिर कारोबार चलाने वाला। साथ ही यह भी पक्का करना था कि एक ही पोर्टल लॉगिन के जरिए भुगतान बिना किसी गड़बड़ी के कैसे जोड़े जाएं।\n\nदिसंबर में मिली थी मंजूरी\nदोनों व्यवस्थाओं को मिलाने का फैसला पिछले साल दिसंबर में निगम सदन में मंजूर हुआ था। इस योजना के तहत जनरल ट्रेड और स्टोरेज लाइसेंस को प्रॉपर्टी टैक्स से जोड़ा गया। इसमें लाइसेंस फीस को लागू प्रॉपर्टी टैक्स का 15 फीसदी तय किया गया और इसे सालाना प्रॉपर्टी टैक्स के साथ ही जमा करने की शर्त रखी गई।\n\nएक साल में 43 हजार से ज्यादा लाइसेंस\nआधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक निगम ने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 43,178 ट्रेड लाइसेंस जारी किए। इस पूरी प्रक्रिया से 118.03 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। इसमें सबसे आगे सिटी जोन रहा, जहां 3,634 लाइसेंस से 15.70 करोड़ रुपये आए। इसके बाद साउथ जोन रहा, जहां 3,826 लाइसेंस से 13.12 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा।\n\nनिगम का कहना है कि इस एकीकरण का मकसद कागजी कार्रवाई घटाना और कारोबारियों के लिए कदमों की संख्या कम करना है। अधिकारियों ने इस बदलाव को राजधानी में कारोबार करने की आसानी से भी जोड़ा है। अब जब GTL सिस्टम टैक्स पोर्टल से चल रहा है, तो कारोबारी एक ही भुगतान प्रक्रिया से रिन्यू पूरा कर सकते हैं और उसी रसीद को सबूत के तौर पर अपने पास रख सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: दुकान या कारोबार चलाने वालों के लिए लाइसेंस रिन्यू और प्रॉपर्टी टैक्स अब एक ही पोर्टल से होंगे, जिससे कागजी झंझट और अलग-अलग कदम घट जाएंगे।\n• दिल्ली में: कारोबारियों को सालाना प्रॉपर्टी टैक्स पर 15 फीसदी अतिरिक्त रकम देनी होगी और मिली ऑनलाइन रसीद ही ट्रेड लाइसेंस का काम करेगी, इसलिए इसे संभालकर रखना जरूरी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली में ट्रेड लाइसेंस रिन्यू की नई व्यवस्था कब से लागू हुई?\nनई प्रक्रिया 23 जून से लागू हो गई है, जिसमें जनरल ट्रेड लाइसेंस सिस्टम को प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल से जोड़ दिया गया है।\n\n2. लाइसेंस रिन्यू के लिए कितनी फीस देनी होगी?\nकारोबारियों को सालाना देय प्रॉपर्टी टैक्स पर 15 फीसदी अतिरिक्त रकम फीस के रूप में देनी होगी।\n\n3. रिन्यू किया गया लाइसेंस किस रूप में मिलेगा?\nभुगतान के बाद पोर्टल से जो ऑनलाइन रसीद बनेगी, उसे ही उस परिसर के लिए ट्रेड लाइसेंस माना जाएगा।\n\n4. पुरानी व्यवस्था में देरी क्यों हुई?\nअप्रैल में रिन्यू का दौर शुरू होने पर पोर्टल का लिंक सक्रिय नहीं था, और अधिकारियों को यह तय करना था कि फीस मालिक, किरायेदार या कारोबारी में से कौन भरेगा।\n\n5. इस फैसले को मंजूरी कब मिली थी?\nदोनों व्यवस्थाओं को मिलाने का फैसला पिछले साल दिसंबर में निगम सदन में मंजूर हुआ था।\n\n6. एक साल में कितने ट्रेड लाइसेंस जारी हुए?\nनिगम ने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 43,178 लाइसेंस जारी किए, जिनसे 118.03 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-24",
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    "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस"
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