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  "title": "दिल्ली में बिजली अब हर महीने महंगी होगी: DERC के पहले मासिक PPAC आदेश से किसके बिल कितने बढ़ेंगे, समझिए पूरा हिसाब",
  "summary": "दिल्ली बिजली नियामक आयोग ने तीनों वितरक कंपनियों को अप्रैल 2026 का PPAC वसूलने की मंजूरी दी है। अब यह चार्ज तिमाही के बजाय हर महीने लगेगा, जिससे टाटा पावर इलाके में 1% और BSES इलाके में 2.5% से 3.5% तक बिल बढ़ सकता है।",
  "content": "भीषण गर्मी के बीच दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं के लिए जेब पर असर डालने वाली खबर है। दिल्ली बिजली नियामक आयोग (DERC) ने एक ऐसा आदेश जारी किया है जिसके बाद राजधानी में बिजली की दर अब हर महीने ऊपर-नीचे होगी। आयोग ने तीनों वितरक कंपनियों — BRPL, BYPL और TPDDL — को अप्रैल 2026 का Power Purchase Adjustment Charge (PPAC/FPPAS) उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति दे दी है।\n\nसबसे बड़ा बदलाव: अब हर महीने लगेगा यह चार्ज\nअब तक दिल्ली में PPAC हर तिमाही के आधार पर तय और वसूला जाता था। यह राजधानी का पहला मासिक PPAC आदेश है, यानी अब बिजली वितरक कंपनियां यह चार्ज महीने-दर-महीने उपभोक्ताओं से लेंगी। इसका सीधा मतलब यह है कि बिजली की दर अब हर महीने बदल सकती है और महंगी पड़ सकती है।\n\nकिस इलाके में कितना बढ़ेगा बिल\nदिल्ली में तीन बिजली वितरक कंपनियां काम करती हैं और इनके इलाकों में PPAC का असर अलग-अलग होगा। टाटा पावर के इलाके में रहने वाले उपभोक्ताओं को अब 1% ज्यादा चुकाना होगा। वहीं BSES के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बिल में 2.5% से 3.5% तक की बढ़ोतरी होगी।\n\nDERC के आदेश में क्या-क्या है\nआयोग ने कंपनियों की मांग के मुकाबले काफी कम राशि को मंजूरी दी है। ब्योरा इस तरह है:\n\n• BRPL: 17.94% — कंपनी ने 31.55% की मांग रखी थी, जिसमें से बहुत कम मंजूर हुआ।\n• BYPL: 17.43% — 35.26% की मांग में कटौती करके यह मंजूरी दी गई।\n• TPDDL: 16% — दस्तावेज जमा करने के बाद पूरी मांग को मंजूरी दी गई।\n\nआखिर PPAC है क्या\nPPAC दरअसल बिजली खरीदने की लागत — जैसे कोयले और ईंधन की कीमतों — में होने वाले उतार-चढ़ाव को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का एक वैधानिक तरीका है। देश भर में 25 से ज्यादा राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इसे पहले ही लागू कर चुके हैं। यह कोई मनमाना फैसला नहीं है — Hon'ble APTEL के 2011 के आदेश, Electricity Act और Ministry of Power के 2021-2022 के निर्देशों के तहत इसे लागू करना अनिवार्य है।\n\nआयोग ने 10% की स्वत: सीमा से ऊपर की अतिरिक्त राशि की भी छूट दी है। इसका मकसद यह है कि वितरक कंपनियां (DISCOMs) बिजली बनाने वाले जनरेटरों को समय पर भुगतान कर सकें। अगर PPAC न मिले तो DISCOMs के सामने तरलता यानी नकदी का संकट खड़ा हो सकता है, और आखिरकार इसका बोझ ब्याज के रूप में उपभोक्ताओं पर ही आ पड़ता है।\n\nदिल्लीवासियों की जेब पर असर\nहर उपभोक्ता पर इसका असर एक जैसा नहीं होगा:\n\n• सब्सिडी वाले उपभोक्ता — कोई असर नहीं: दिल्ली सरकार की सब्सिडी यूनिट्स की संख्या पर तय होती है, बिल की रकम पर नहीं। इसलिए 200 से 500 यूनिट तक सब्सिडी पाने वाले आम परिवारों के बिल में PPAC की वजह से कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं होगी।\n• गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ता: ज्यादा बिजली खर्च करने वाले, व्यावसायिक कनेक्शन और हाई-यूनिट घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में अप्रैल 2026 के लिए 7% से 18% तक अतिरिक्त सर्चार्ज जुड़ सकता है।\n• नया Component \"F\": जुलाई 2026 से आगे के महीनों में पहले की किसी भी under-recovery को कैप के दायरे में समायोजित करने का प्रावधान रखा गया है, ताकि कंपनियों को स्थायी नुकसान न हो।\n\nयह फैसला जरूरी क्यों माना जा रहा है\nअप्रैल 2026 में कोयले और ईंधन की कीमतों के साथ-साथ आयात लागत बढ़ने से बिजली खरीदने की लागत में भारी इजाफा हुआ है। दूसरी ओर CERC, केंद्र सरकार की कंपनियों जैसे NTPC और NHPC को हर महीने पूरा पास-थ्रू देता है। इसी तर्ज पर अब दिल्ली में भी मासिक PPAC की शुरुआत हो रही है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/delhi-men-bijali-aba-hara-mahine-mahngi-hogi-derc-ke-pahale-masika-ppac-adesha-s-321",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-13",
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    "दिल्ली बिजली दर",
    "DERC",
    "PPAC चार्ज",
    "BSES",
    "टाटा पावर",
    "बिजली बिल",
    "मासिक PPAC",
    "DISCOM"
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  "site": "TrendKia"
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