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  "title": "मानसून में गाय-भैंस का दूध नहीं होगा कम, पशुओं को खुर सड़न की दर्दनाक बीमारी से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके",
  "summary": "बरसात के मौसम में कीचड़ और गंदगी के कारण दुधारू पशुओं में खुर सड़ने का संक्रमण तेजी से फैलता है, जिसे बेहद आसान घरेलू उपायों से रोका जा सकता है।",
  "content": "बरसात के मौसम में पशुओं की सेहत पर मंडराता खतरा\nबारिश का मौसम शुरू होते ही किसानों के सामने खेती-किसानी के साथ-साथ अपने पालतू पशुओं की देखभाल की भी बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह जलजमाव, कीचड़ और गंदगी की वजह से गाय और भैंस के खुरों में संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में पशुओं में खुर सड़ने की समस्या बहुत तेजी से फैलती है। कई बार पशुपालक इसे सामान्य चोट या कांटा चुभना समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही पशुओं के लिए बेहद कष्टदायक साबित हो सकती है। इसके कारण पशुओं को चलने-फिरने में भारी परेशानी होती है और उनका दूध उत्पादन भी तेजी से गिर जाता है।\n\nलक्षण और बीमारी फैलने की वजह\nट्रेंडकिया (TrendKia) से बातचीत में देवघर कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने इस बीमारी की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि जब पशु लगातार गीली और कीचड़ से भरी जगहों पर खड़े रहते हैं, तो उनके खुरों के बीच की त्वचा गलने लगती है। इस कारण वहां बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है, जिससे खुर सड़ने लगते हैं।\n\nइस बीमारी के शुरुआती दौर में पशु थोड़ा लंगड़ाकर चलता है, जिस पर अमूमन ध्यान नहीं दिया जाता। धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ने पर पशु अपना एक पैर हवा में उठाकर खड़ा होने लगता है। उसे चलने में तेज दर्द होता है और वह बार-बार बैठने की कोशिश करता है। कई बार खुरों के बीच गंभीर सूजन आ जाती है और वहां से तेज बदबू आने लगती है। अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो घाव बहुत गहरा हो जाता है और पशु हमेशा के लिए लंगड़ा भी हो सकता है।\n\nदूध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर असर\nडॉ. पूनम सोरेन के मुताबिक, इस बीमारी का सीधा प्रभाव पशुओं की सेहत और उनके दूध देने की क्षमता पर पड़ता है। अत्यधिक दर्द के कारण पशु ठीक से चारा नहीं खा पाते हैं। पोषण की कमी के चलते उनका शरीर कमजोर होने लगता है और दूध की मात्रा घट जाती है। कई किसानों को गलतफहमी होती है कि मानसून में दूध का उत्पादन स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है, जबकि इसका असली कारण खुरों में छिपा यह संक्रमण हो सकता है। इसलिए बारिश के महीनों में पशुओं के पैरों की विशेष निगरानी जरूरी है।\n\nबचाव के आसान और घरेलू उपाय\nपशुओं को इस दर्दनाक बीमारी से बचाने के लिए डॉ. पूनम सोरेन ने कुछ बेहद असरदार और व्यावहारिक घरेलू उपाय साझा किए हैं:\n\n• पशुशाला को रखें साफ और सूखा: जिस स्थान पर पशुओं को बांधा जाता है, वहां पानी का ठहराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यदि पशुशाला का फर्श कच्चा है, तो नमी को सोखने के लिए वहां समय-समय पर सूखी मिट्टी या बालू डालना फायदेमंद होता है।\n• चूने का छिड़काव: पशुशाला और उसके आसपास के परिसर में नियमित रूप से चूने का छिड़काव करें। इससे गंदगी और संक्रामक बैक्टीरिया नष्ट होते हैं।\n• खुरों की नियमित सफाई: हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार पशुओं के पैरों और खुरों को साफ पानी से धोकर अच्छे से सुखाना चाहिए। सफाई की यह छोटी सी आदत संक्रमण को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।\n• कीचड़ वाली जगहों से दूरी: बारिश के दिनों में पशुओं को ऐसे रास्तों या मैदानों में चराने से बचाएं जहां अत्यधिक कीचड़ हो। यदि चराई के बाद खुरों में मिट्टी या गोबर फंसा रह गया हो, तो घर लौटते ही उसे तुरंत साफ कर दें।\n• संतुलित पोषण: पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है। उनके भोजन में हरा चारा, सूखा चारा और उचित मात्रा में खनिज मिश्रण शामिल होना चाहिए, ताकि उनका शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम रहे।\n\nइसका आप पर असर\n• देशभर में: इस जानकारी की मदद से भारत के सभी डेयरी किसान बारिश के दिनों में अपने पशुओं की सेहत का ख्याल रखकर दूध के उत्पादन को घटने से बचा सकते हैं, जिससे उनका आर्थिक नुकसान रुकेगा।\n• देवघर और झारखंड में: स्थानीय पशुपालक देवघर कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर पशुओं के स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी आपातकालीन स्थिति में सीधा परामर्श और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बारिश के मौसम में गाय-भैंस का दूध क्यों कम होने लगता है?\nबारिश में गीली जगहों पर खड़े रहने से पशुओं के खुरों में संक्रमण (खुर सड़न) हो जाता है, जिससे दर्द के कारण वे चारा कम खाते हैं और उनका दूध उत्पादन घट जाता है।\n\n2. पशुओं में खुर सड़ने की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?\nशुरुआती लक्षणों में पशु का हल्का लंगड़ाकर चलना, एक पैर उठाकर खड़े रहना, पैरों में सूजन आना और खुरों से बदबू आना शामिल है।\n\n3. पशुशाला में नमी कम करने के लिए क्या घरेलू उपाय कर सकते हैं?\nपशुशाला के कच्चे फर्श पर सूखी मिट्टी या रेत डालें और गंदगी तथा बैक्टीरिया को कम करने के लिए समय-समय पर चूने का छिड़काव करें।\n\n4. बरसात में पशुओं के खुरों को कितनी बार साफ करना चाहिए?\nपशुओं के खुरों को हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार साफ पानी से अच्छी तरह धोकर सुखाना चाहिए।\n\n5. पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उनके आहार में क्या शामिल करें?\nपशुओं को संतुलित आहार देना चाहिए, जिसमें सही मात्रा में हरा चारा, सूखा चारा और खनिज मिश्रण शामिल हो।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-06-20",
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    "पशुपालन",
    "पशु स्वास्थ्य",
    "मानसून केयर",
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    "कृषि विज्ञान केंद्र"
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