देश में महंगी हुई चीनी के बाद हरकत में आई सरकार, 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक सीमा लागू देश भर के कई शहरों में चीनी के दाम 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और सट्टेबाजी रोकने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना ड्यूटी आयात की अनुमति दी है। आगामी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले देश भर के खुदरा बाजारों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई बड़े शहरों में चीनी के दाम उछलकर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक महीने के भीतर चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई है। बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और आगामी फेस्टिव सीजन के दौरान चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि स्थिति को काबू में रखने के लिए बाजार की लगातार निगरानी की जा रही है। गन्ने की फसल को नुकसान और उत्पादन में गिरावट बनी मुख्य वजह कीमतों में आई इस तेजी के पीछे उत्पादन में अनुमान से ज्यादा गिरावट आना है। इस चालू सीजन में चीनी का कुल उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा राज्यों द्वारा शुरुआत में लगाए गए 343 LMT के अनुमान से काफी कम है। उत्पादन में इस कमी का मुख्य कारण गन्ने की फसल में लगी रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियां हैं। इसके अलावा कई गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और जलभराव के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मांग के मोर्चे पर, त्योहारों के करीब आने से चीनी की खपत बढ़ी है, जबकि कुछ स्थानीय बाजारों में जमाखोरी और सट्टेबाजी ने भी दाम बढ़ाने में भूमिका निभाई है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के पास वर्तमान में इतना चीनी स्टॉक मौजूद है कि अक्टूबर में नया पेराई सत्र शुरू होने तक घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके। एथनॉल नीति से नहीं बढ़े दाम, किसानों को समय पर हुआ भुगतान चीनी महंगी होने के लिए एथनॉल निर्माण को जिम्मेदार ठहराने की अटकलों को सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो घटकर 2025-26 में 9% रह गई है। आमतौर पर भारत में हर साल 320 से 340 LMT चीनी तैयार होती है, जबकि घरेलू खपत केवल 280 से 290 LMT के आसपास रहती है। अतिरिक्त चीनी के बाजार में पड़े रहने से चीनी मिलों की नकदी फंस जाती थी, जिससे किसानों के गन्ने का भुगतान अटक जाता था। एथनॉल नीति लागू होने से मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिला है। इसी का परिणाम है कि 20 अगस्त 2026 तक 2025-26 सीजन के कुल गन्ना बकाये का 97% भुगतान किसानों के खातों में किया जा चुका है। वैश्विक बाजार में भी चीनी की किल्लत और कीमतों में उछाल चीनी की कीमतों में यह तेजी केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी आपूर्ति प्रभावित हुई है। अनुमान है कि 2026-27 के दौरान वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में लगभग 33 LMT की भारी कमी दर्ज की जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस किल्लत के कारण कीमतें तेजी से चढ़ी हैं। वैश्विक बाजार में चीनी के दाम 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन थे, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गए। इसका सीधा मतलब है कि महज दो महीनों के अंतराल में वैश्विक कीमतों में 16% से ज्यादा का उछाल दर्ज किया गया है। सट्टेबाजी और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का एक्शन प्लान घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें काबू में रखने और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने छह सूत्रीय रणनीति तैयार की है • स्टॉक सीमा का निर्धारण: चीनी व्यापारियों और कारोबारियों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक अधिकतम 400 टन की स्टॉक सीमा तय की गई है। • बड़े खरीदारों पर पाबंदी: 1 सितंबर से बड़े खरीदार अपनी 15 दिनों की खपत से अधिक का चीनी स्टॉक नहीं रख पाएंगे। • मिलों की जमीनी जांच: केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों के गोदामों में जाकर वास्तविक स्टॉक का निरीक्षण कर रही हैं। • कच्ची चीनी का आयात: बाजार में सप्लाई बढ़ाने के मकसद से 10 LMT कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात (Duty-Free Import) को मंजूरी दी गई है। • पेराई सत्र की समय सीमा: राज्यों और चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि वे 15 अक्टूबर से ही गन्ने की पेराई का काम शुरू कर दें। • उत्पादन में बढ़ोतरी का लक्ष्य: जल्दी पेराई शुरू होने से अक्टूबर महीने में चीनी का उत्पादन सामान्य 3 से 4 LMT के मुकाबले बढ़कर 10 LMT से अधिक होने की उम्मीद जताई गई है। 정부는 उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ गन्ना किसानों के हितों की रक्षा करने के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। आने वाले दिनों में चीनी के खुदरा मूल्यों, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और व्यापारिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी ताकि त्योहारों के दौरान मिठास बनी रहे और आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। इसका आप पर असर • भारत में: आगामी त्योहारी सीजन में रसोई के बजट पर चीनी की बढ़ती कीमतों का असर कम होगा और बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी। • शहरी उपभोक्ताओं के लिए: जमाखोरी पर कार्रवाई और 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात के बाद शहरों में 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे खुदरा दामों में नरमी आने की उम्मीद है। सवाल-जवाब 1. देश के कई शहरों में चीनी के खुदरा दाम कहां तक पहुंच गए हैं? देश के कई शहरों में चीनी के खुदरा दाम 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं, जबकि औसत कीमत बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई है। 2. सरकार ने चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए क्या मुख्य फैसला लिया है? सरकार ने घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख टन (10 LMT) कच्ची चीनी के बिना ड्यूटी (शुल्क-मुक्त) आयात की अनुमति दी है। 3. चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक की क्या सीमा तय की गई है? 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की गई है। 4. क्या चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल उत्पादन जिम्मेदार है? नहीं, सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में 9% रह गया है, इसलिए एथनॉल इसकी वजह नहीं है। 5. गन्ने की पेराई का नया सीजन कब से शुरू करने का निर्देश दिया गया है? राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। https://trendkia.com/business/desha-men-mahngi-hui-chini-ke-bada-harakata-men-ai-sarakara-10-lakha-tana-shulka-mukta-ayata-aura-stoka-sima-lagu-19627 TrendKia — Har trend, sabse pehle.