# देशभर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी, एक दिन का अवकाश, तीन दिन का शटडाउन और अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

> यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर देश भर में कई चरणों में बैंक हड़ताल की घोषणा की है, जिसमें पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करना और पीएलआई योजना में बदलाव शामिल हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/deshabhara-men-bank-karmachariyon-ki-haratala-ki-chetavani-eka-dina-ka-avakasha-tina-dina-ka-shatadauna-aura-anishchitakalina-hara-29093 · **Language:** Hindi
**Tags:** बैंक हड़ताल, यूएफबीयू, भारतीय बैंक संघ, पांच दिवसीय बैंकिंग, पीएलआई योजना, पेंशन मुद्दे

देशभर के बैंकिंग सेक्टर में जल्द ही कामकाज ठप होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में देशव्यापी हड़ताल पर जाने का बड़ा फैसला किया है। इस आंदोलन के तहत अलग-अलग तारीखों पर हड़तालें आयोजित की जाएंगी, जिससे ग्राहकों को वित्तीय सेवाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यूनियन की ओर से जारी घोषणा के अनुसार, सबसे पहले 11 सितंबर को एक दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद स्थिति न सुधरने पर 28 सितंबर से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिनों का पूर्ण शटडाउन या हड़ताल रहेगी। यदि इन सबके बावजूद कर्मचारियों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकलता है, तो संगठनों ने आगामी 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल पर जाने की भी चेतावनी दी है।

हाल ही में हुई बैठकों और वार्ताओं की बात करें तो, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच 4 सितंबर को हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी और मुख्य मांगों पर सहमति नहीं बन पाई। इस बैठक के बाद यूनियन ने स्पष्ट कर दिया था कि वे तय किए गए 11 सितंबर के हड़ताल के फैसले को टालने की स्थिति में बिल्कुल नहीं हैं।

इस पूरे विवाद के पीछे सबसे अहम और पुरानी मांग देश भर के बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह को लागू करवाना है। यूनियनों का तर्क है कि इस प्रस्ताव पर इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और बैंक यूनियनों के बीच मार्च 2024 में हस्ताक्षरित 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट के तहत सहमति बन चुकी थी। इस समझौते के प्रावधानों के मुताबिक, शनिवार और रविवार के अवकाश की भरपाई के लिए सोमवार से शुक्रवार तक के कार्य दिवसों में कामकाजी घंटों को बढ़ाया जाना तय हुआ था।

यूनियनों का आरोप है कि आपसी सहमति बनने के बावजूद यह प्रस्ताव पिछले दो साल से अधिक समय से बिना किसी ठोस परिणाम के लटका हुआ है। संगठनों का यह भी कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और नाबार्ड जैसे अन्य वित्तीय संस्थानों में पहले से ही पांच दिवसीय कार्य प्रणाली सफलतापूप्र्वक लागू है, ऐसे में बैंकों में इसे रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

कर्मचारियों और अधिकारियों की परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना का संशोधित ढांचा इस टकराव का दूसरा बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस सरकार द्वारा लाई गई इस नई संशोधित संरचना के पूरी तरह खिलाफ है, क्योंकि उनका मानना है कि यह वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के बीच बहुत बड़ा भेदभाव पैदा करती है। यूनियन के आंकड़ों के अनुसार, स्केल 4 और उससे ऊपर के अधिकारियों को मूल वेतन और डीए का 365 दिनों तक का पीएलआई मिल सकता है, जबकि सामान्य कामगार कर्मचारियों और स्केल 3 तक के अधिकारियों के लिए इसे अधिकतम 15 दिन के मूल वेतन और डीए तक सीमित कर दिया गया है।

इसके अलावा भी बैंक यूनियनों ने अपनी कई अन्य लंबित और महत्वपूर्ण समस्याओं को मजबूती से उठाया है, जिनका समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। इन प्रमुख मुद्दों में पेंशन से जुड़े विभिन्न मामले, पेंशनभोगियों के लिए एक समान डीए फॉर्मूला लागू करना, पिछली वार्ताओं और समझौतों के बचे हुए अन्य अवशिष्टीय मुद्दे, स्टाफ की भारी कमी और लगातार बढ़ते हुए कार्यभार को लेकर चिंताएं शामिल हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का कड़ा विरोध किया जा रहा है और कर्मचारियों की अन्य पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की पुरजोर मांग की जा रही है।

यदि 11 सितंबर को प्रस्तावित बैंक हड़ताल तय समय पर होती है, तो इसमें शामिल होने वाले तमाम बैंकों की शाखाओं का सामान्य कामकाज और ऑपरेशन सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बैंक ग्राहकों के लिए इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एटीएम और अन्य आधुनिक डिजिटल सेवाएं सुचारू रूप से चालू रहने की उम्मीद है, जिससे रोजमर्रा के डिजिटल लेन-देन में कोई बड़ी रुकावट नहीं आएगी।

## इसका आप पर असर
इन हड़तालों का सीधा असर आम जनता और खाताधारकों पर पड़ेगा, जिससे वित्तीय कामकाज प्रभावित हो सकता है।

- **भारत में:** देश भर के विभिन्न बैंकों में शाखा स्तर का कामकाज प्रभावित हो सकता है, जिससे चेक क्लियरेंस और कैश जमा कराने जैसे कार्य बाधित होंगे। हालांकि एटीएम, नेट बैंकिंग और मोबाइल ऐप जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी।
- **ग्राहकों के लिए:** यदि आपको बैंक शाखा से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो उसे हड़ताल की तारीखों से पहले ही पूरा कर लें। वित्तीय लेन-देन के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करना इन दिनों में सबसे सुरक्षित विकल्प रहेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस द्वारा पहली हड़ताल कब आयोजित की जाएगी?
यूएफबीयू ने 11 सितंबर को एक दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल की घोषणा की है।

### 2. लगातार तीन दिनों का शटडाउन या हड़ताल किस अवधि में होगी?
तीन दिन की यह हड़ताल 28 सितंबर से 30 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी।

### 3. यदि मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल कब से शुरू होगी?
यदि मुद्दे अनसुलझे रहते हैं, तो यूनियनों ने 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

### 4. आईबीए और यूनियनों के बीच हालिया बैठक किस तारीख को हुई थी?
यूएफबीयू और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच 4 सितंबर को बातचीत हुई थी जो किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी।

### 5. हड़ताल के दौरान क्या डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी?
हां, ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाओं का उपयोग जारी रख सकेंगे।

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