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  "title": "धान की बंपर पैदावार के लिए सिर्फ यूरिया नहीं, इन बातों का भी रखें खास ख्याल",
  "summary": "धान की फसल में दूसरी टॉप ड्रेसिंग का समय बेहद अहम होता है। इस दौरान यूरिया के साथ-साथ अन्य पोषक तत्वों और पानी की सही मात्रा का ध्यान रखकर किसान बंपर पैदावार ले सकते हैं।",
  "content": "खरीफ सीजन के दौरान धान की खेती देश के किसानों के लिए सबसे अहम फसलों में शुमार होती है। इन दिनों खेतों में धान की फसल तेजी से अपनी बढ़त ले रही है। रोपाई का दौर बीतने के बाद अब पौधों में नई पत्तियों के निकलने और कल्ले फूटने की प्रक्रिया जोर पकड़ने लगती है। फसल के विकास के इस संवेदनशील दौर में पौधों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। यदि इस चरण में खेतों में उर्वरकों का प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, तो न केवल पौधों की ग्रोथ अच्छी होती है बल्कि स्वस्थ और मजबूत कल्लों की संख्या में भी इजाफा होता है, जिसका सीधा और सकारात्मक असर अंततः बंपर पैदावार के रूप में सामने आता है।\n\nउर्वरकों के इस्तेमाल में सावधानी और सही मात्रा का महत्व\nबहुत से किसान यह मान लेते हैं कि खेतों में अंधाधुंध और अधिक मात्रा में खाद डालने से उत्पादन बढ़ जाता है, लेकिन यह धारणा बिल्कुल गलत है। खाद का इस्तेमाल करने से पहले खेत की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति, धान की बोई गई किस्म, रोपाई का तरीका, सिंचाई के साधन और पहले दी जा चुकी खाद की मात्रा का पूरा आकलन करना बेहद आवश्यक होता है। अक्सर किसान भाई दूसरी टॉप ड्रेसिंग करते वक्त यूरिया की सही मात्रा को लेकर चूक कर बैठते हैं। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पौधे जरूरत से ज्यादा हरे और कोमल हो जाते हैं, जिससे कीटों और बीमारियों का हमला होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा, फसल के गिरने की आशंका भी पैदा हो जाती है।\n\nदूसरी टॉप ड्रेसिंग का सही समय और यूरिया की मात्रा\nयदि आप भी अपनी धान की फसल में दूसरी बार खाद देने की तैयारी कर रहे हैं, तो रोपाई के लगभग 20 से 30 दिन बाद का समय इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि संतुलित मात्रा में खाद डालने से फसल की सेहत सुधरती है। किसान प्रति एकड़ के हिसाब से लगभग 20 से 30 किलोग्राम यूरिया का इस्तेमाल दूसरी टॉप ड्रेसिंग के रूप में कर सकते हैं। धान के खेत में दूसरी बार उर्वरक डालने का मुख्य उद्देश्य पौधों में अधिकतम कल्लों का विकास करना और उनकी तंदुरुस्त बढ़वार को गति देना होता है ताकि फसल मजबूती के साथ आगे बढ़ सके।\n\nनाइट्रोजन के अलावा अन्य जरूरी पोषक तत्वों की भूमिका\nधान के खेत में दूसरी खाद का छिड़काव करते समय यह समझना भी अनिवार्य है कि फसल को केवल नाइट्रोजन की ही दरकार नहीं होती है। पौधों के सर्वांगीण विकास के लिए फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, फास्फोरस पौधों की जड़ों के विकास और शुरुआती दौर में उनकी वृद्धि के लिए बहुत जरूरी होता है। यदि धान के खेतों में जिंक की कमी हो जाए, तो पौधों की ग्रोथ बुरी तरह प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में पत्तियों पर अजीब से लक्षण उभरने लगते हैं और पौधे अपनी सामान्य ताकत खोकर कमजोर दिखने लगते हैं, जिससे अंततः कुल पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।\n\nकई बार अन्नदाता यूरिया और डीएपी को एक ही श्रेणी की खाद समझ लेते हैं, जबकि दोनों के रासायनिक गुण और कार्य बिल्कुल अलग होते हैं। यूरिया का मुख्य काम पौधों को नाइट्रोजन उपलब्ध कराना है, जबकि डीएपी से फास्फोरस और नाइट्रोजन दोनों की पूर्ति होती है। इसलिए हमेशा खेत की वास्तविक जरूरत और मिट्टी की सेहत को परखकर ही उर्वरकों का चयन करना चाहिए। यूरिया डालने से पहले खेत का फालतू पानी बाहर निकाल देना चाहिए और जमीन में केवल हल्की नमी बनाकर रखनी चाहिए। नाइट्रोजन पौधों के भीतर क्लोरोफिल का निर्माण करने में मदद करता है। लगातार एक ही जमीन पर खेती करने से मिट्टी के प्राकृतिक गुण कम होने लगते हैं, जिसकी भरपाई केवल संतुलित उर्वरकों के नियमित इस्तेमाल से ही संभव हो पाती है।\n\nकृषि विशेषज्ञों की सलाह और जल प्रबंधन\nइस पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने जानकारी दी है कि धान की रोपाई के ठीक 30 दिन बाद दूसरी खाद खेतों में डाल देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि खाद डालने से ठीक पहले खेत के अंदर पर्याप्त नमी का होना बहुत जरूरी है। यदि खेत में उचित मॉइस्चर बना रहता है, तो पौधों की जड़ें पोषक तत्वों को आसानी से ग्रहण करती हैं, जिससे उनकी ग्रोथ बेहतरीन होती है और कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।\n\nडॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद का छिड़काव करते समय खेत के अंदर पानी का अत्यधिक भराव नहीं होना चाहिए। यदि खेत में बहुत ज्यादा पानी खड़ा रहता है, तो धान के पौधे अंदर ही अंदर पीले पड़ने शुरू हो जाते हैं। इसलिए दूसरी टॉप ड्रेसिंग करते समय खेत की जल निकासी और नमी की स्थिति पर विशेष रूप से नजर रखनी चाहिए ताकि फसल को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: धान उगाने वाले सभी राज्यों के किसानों को सही मात्रा में यूरिया और जिंक के इस्तेमाल से बंपर पैदावार मिलने में मदद मिलेगी।\n• खेत और फसल स्तर पर: रोपाई के 20 से 30 दिन बाद सही नमी और नियंत्रित जलभराव के साथ खाद देने से पौधे मजबूत होंगे और कीटों का खतरा घटेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. धान की फसल में दूसरी टॉप ड्रेसिंग कब करनी चाहिए?\nधान की रोपाई के लगभग 20 से 30 दिन बाद दूसरी टॉप ड्रेसिंग की जानी चाहिए।\n\n2. दूसरी टॉप ड्रेसिंग में कितनी यूरिया का इस्तेमाल करना चाहिए?\nकिसान प्रति एकड़ लगभग 20 से 30 किलोग्राम यूरिया का उपयोग कर सकते हैं।\n\n3. धान में दूसरी खाद डालने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?\nइसका प्रमुख उद्देश्य पौधों में कल्लों की संख्या बढ़ाना और मजबूत बढ़वार में मदद करना है।\n\n4. क्या धान को केवल नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है?\nनहीं, नाइट्रोजन के अलावा फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और जिंक जैसे पोषक तत्व भी जरूरी हैं।\n\n5. खाद डालते समय खेत में पानी की क्या स्थिति होनी चाहिए?\nखेत में अत्यधिक जलभराव नहीं होना चाहिए और केवल हल्की नमी होनी चाहिए।\n\n6. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन के अनुसार खाद देने का सही समय क्या है?\nरोपाई के करीब 30 दिन बाद और पर्याप्त नमी होने पर खाद देनी चाहिए।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-09",
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