धान की फसल पर मंडराया बीमारियों का खतरा, इन तीन रोगों से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय बालोद जिले में धान की फसल इस समय महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों ने ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा और शीथ ब्लाइट जैसी खतरनाक बीमारियों के प्रकोप को लेकर किसानों को आगाह किया है। छत्तीसगढ़ के बालोद इलाके में धान की फसल इन दिनों अपनी वृद्धि के बेहद संवेदनशील चरण से गुजर रही है, जहां किसान खेतों में निराई और गुड़ाई जैसे जरूरी कामों में पूरी तरह व्यस्त हैं। इसी बीच कृषि वैज्ञानिकों ने आने वाले हफ्तों में फसलों पर कई तरह के गंभीर रोगों के हमले की चेतावनी जारी की है, जिससे अन्नदाताओं की चिंताएं बढ़ सकती हैं। बालोद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. भीमेश्वरी साहू ने क्षेत्र के किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसलों की कड़ी निगरानी करें और ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा तथा शीथ ब्लाइट जैसी जानलेवा बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें। फसल सुरक्षा के लिहाज से यह समय बेहद नाजुक माना जा रहा है, क्योंकि जरा सी लापरवाही से पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है और पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले रोगों में ब्लास्ट एक बेहद प्रमुख और फफूंद जनित बीमारी है, जो धान के पौधों को अंदर से कमजोर कर देती है। इस रोग की पहचान इस बात से की जाती है कि शुरुआत में पौधे की पत्तियों पर बहुत छोटे और मटमैले रंग के धब्बे उभरते हैं, जो वक्त बीतने के साथ गहरे भूरे रंग में बदल जाते हैं। जैसे-जैसे संक्रमण आगे बढ़ता है, इन धब्बों का दायरा तेजी से फैलने लगता है और पूरी पत्ती का प्राकृतिक रंग और आकार बिगड़ने लगता है। इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ डॉ. साहू ने किसानों को एक खास सलाह दी है जिसके तहत वे एजोक्सीस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल के मिश्रण वाली दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस दवा का घोल तैयार करने के लिए डेढ़ मिलीलीटर दवा को प्रति लीटर पानी में मिलाना होता है और जरूरत पड़ने पर दस से पंद्रह दिन के गैप पर इस छिड़काव को दोबारा दोहराया जा सकता है ताकि संक्रमण पर पूरी तरह लगाम लग सके। इसके अलावा जीवाणु झुलसा नामक बैक्टीरियल बीमारी भी धान की खेती करने वालों के लिए एक बड़ी सिरदर्द साबित हो सकती है, जो देखते ही देखते खेत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेती है। इस रोग के हमले पर पत्ती के सबसे ऊपरी हिस्से से पीलापन पैदा होना शुरू होता है और धीरे-धीरे यह पीलापन नीचे की तरफ बढ़ता जाता है। आखिरकार संक्रमित पत्तियां पूरी तरह सूख जाती हैं और पूरा पौधा ऐसा दिखाई देता है जैसे किसी ने उसे जला दिया हो। इस जीवाणु जनित प्रकोप से बचने के लिए सबसे बुनियादी कदम यह है कि खेत में यूरिया खाद के इस्तेमाल को सीमित रखा जाए और रोग के लक्षण दिखने पर नाइट्रोजन की मात्रा बिल्कुल न बढ़ाई जाए। इसके साथ ही खेतों में हर समय पानी भरा रहने की स्थिति से बचना चाहिए और सुरक्षात्मक उपाय के तौर पर स्ट्रेप्टोमाइसिन की तीन ग्राम मात्रा को प्रति स्प्रे कैन में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इन दोनों समस्याओं के अलावा खेतों में शीथ ब्लाइट का खतरा भी मंडराता रहता है, जो मुख्य रूप से पानी के स्तर से ऊपर उठने वाले तनों और हरी पत्तियों को निशाना बनाता है। इस फंगस जनित बीमारी की वजह से पौधों के निचले हिस्सों और पत्तियों पर अजीबोगरीब और अनियमित आकार के धब्बे उभरने लगते हैं, जो फसल को लगातार कमजोर करते हैं। इस रोग पर समय रहते नियंत्रण पाने के लिए हेक्साकोनाजोल दवा का उपयोग किया जा सकता है, जिसकी मात्रा डेढ़ से दो मिलीलीटर या ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से तय की जाती है। यदि संक्रमण का असर ज्यादा हो तो बारह दिन के अंतराल पर इस स्प्रे को दोबारा किया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञों का साफ तौर पर कहना है कि किसान रोजाना अपने खेतों का चक्कर लगाएं और पत्तियों पर किसी भी तरह के असामान्य धब्बे, पीलेपन या झुलसने के लक्षण दिखते ही फौरन कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर सही उपचार शुरू करें ताकि फसल को बचाया जा सके। इसका आप पर असर भारत में: देश के अन्य धान उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को भी बदलते मौसम के दौरान ब्लास्ट और झुलसा जैसी फफूंद जनित बीमारियों से अपनी फसलों को बचाने के लिए नियमित निगरानी रखनी चाहिए। बालोद में: स्थानीय किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में नमी और उर्वरक की मात्रा पर विशेष ध्यान दें तथा लक्षण दिखते ही अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करें। सवाल-जवाब 1. धान की फसल में कौन सी तीन प्रमुख बीमारियां फैलने की आशंका है? कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल में ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा और शीथ ब्लाइट जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। 2. ब्लास्ट रोग के नियंत्रण के लिए किस दवा का छिड़काव करना चाहिए? ब्लास्ट रोग से बचाव के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन और टेबुकोनाजोल के संयोजन वाली दवा का डेढ़ मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए। 3. जीवाणु झुलसा रोग के क्या मुख्य लक्षण हैं? इस रोग में पत्तियों के ऊपरी हिस्से से पीलापन शुरू होकर नीचे की ओर फैलता है और अंत में पत्तियां पूरी तरह सूख जाती हैं। 4. शीथ ब्लाइट रोग की रोकथाम के लिए क्या उपाय सुझाए गए हैं? शीथ ब्लाइट के नियंत्रण के लिए हेक्साकोनाजोल की डेढ़ से दो मिलीलीटर या ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। https://trendkia.com/business/dhana-ki-phasala-para-mndaraya-bimariyon-ka-khatara-ina-tina-rogon-se-bachane-ke-lie-apanaen-ye-upaya-21487 TrendKia — Har trend, sabse pehle.