# दीवाली की खरीदारी के दौरान फर्जी क्यूआर कोड का बड़ा खतरा, डिजिटल लेन-देन सुरक्षित रखने के अहम नियम

> त्योहारी सीजन में ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीदारी के बीच जालसाज फर्जी क्यूआर कोड के जरिए बैंक खाते खाली कर रहे हैं। इस साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों और सतर्क रहने के तौर-तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/divali-ki-kharidari-ke-daurana-pharji-qr-code-ka-bara-khatara-dijitala-lena-dena-surakshita-rakhane-ke-ahama-niyama-53369 · **Language:** Hindi
**Tags:** फोनपे, यूपीआई सुरक्षा, क्यूआर कोड फ्रॉड, साइबर अपराध, ऑनलाइन बैंकिंग, दीवाली शॉपिंग, वित्तीय सुरक्षा

दीवाली के त्योहारी सीजन में चारों तरफ खरीदारी की भारी हलचल देखने को मिलती है और इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों से होने वाले भुगतान में जबर्दस्त तेजी आ जाती है। बाजारों में उमड़ी भीड़ और ऑनलाइन ऑफर्स की भरमार के बीच उपभोक्ता जल्दबाजी में भुगतान निपटाने की कोशिश करते हैं। डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म फोनपे ने इसी त्योहारी आपाधापी को देखते हुए उपभोक्ताओं को फर्जी क्यूआर कोड के बढ़ते खतरों के प्रति सतर्क किया है। त्योहारी माहौल का बेजा फायदा उठाने वाले साइबर अपराधी ऐसे ग्राहकों को अपना निशाना बनाते हैं जो हड़बड़ी में खरीदारी कर रहे होते हैं। इसके लिए वे या तो दुकानों पर लगे असली मर्चेंट कोड के ऊपर फर्जी क्यूआर कोड के स्टिकर चिपका देते हैं, या फिर त्योहारी कैशबैक, रिफंड और आकर्षक गिफ्ट हैंपर्स का लालच देकर लोगों से संदिग्ध कोड स्कैन करवा लेते हैं।

## त्योहारी सीजन में जालसाजों द्वारा अपनाए जाने वाले मुख्य हथकंडे
साइबर अपराधी निर्दोष खरीदारों की मेहनत की कमाई को अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कराने के लिए मुख्य रूप से दो चालाक तौर-तरीकों का सहारा लेते हैं। इन दोनों ही तरीकों में उपभोक्ता के ध्यान भटकाने और जल्दबाजी का फायदा उठाया जाता है।

पहला तरीका भ्रामक मैसेज भेजने का है। इसमें जालसाज व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स के जरिए एक क्यूआर कोड की तस्वीर भेजते हैं। मैसेज में यह दावा किया जाता है कि मुफ्त नकद पुरस्कार, दीवाली बोनस ऑफर या खास गिफ्ट हैंपर हासिल करने के लिए इस कोड को स्कैन करना जरूरी है। पीड़ित को यह झांसा दिया जाता है कि कोड स्कैन करके अपना यूपीआई पिन डालते ही पैसा उनके खाते में जमा हो जाएगा। कई धोखेबाज ऐसे ऐप्स का भी इस्तेमाल करते हैं जो पहले से तय रकम वाले कोड तैयार कर देते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति इनाम पाने की उम्मीद में अपना यूपीआई पिन दर्ज करता है, तुरंत उसके बैंक खाते से रकम कटकर जालसाज की जेब में चली जाती है।

दूसरा तरीका मर्चेंट के क्यूआर कोड से छेड़छाड़ करने का है। भीड़भाड़ वाले बाजारों और व्यस्त दुकानों में जालसाज किसी वैध दुकान के असली यूपीआई स्टिकर के ऊपर चुपके से अपना फर्जी क्यूआर कोड वाला स्टिकर चिपका देते हैं। सामान खरीदने आए ग्राहक यह मानकर चलते हैं कि स्टिकर दुकानदार का ही है। वे अनजाने में उस बदले हुए कोड को स्कैन कर देते हैं और उनका पैसा दुकानदार के खाते में जाने के बजाय सीधे धोखेबाज के खाते में पहुंच जाता है।

## डिजिटल भुगतान का सबसे अहम नियम
यूपीआई के जरिए लेन-देन करते समय हर उपभोक्ता को एक बुनियादी नियम हमेशा याद रखना चाहिए। पैसा प्राप्त करने या अपने खाते में मंगाने के लिए कभी भी यूपीआई पिन दर्ज करने या पे बटन दबाने की आवश्यकता नहीं होती है। यदि कोई वास्तविक व्यक्ति या संस्थान आपको पैसे भेजना चाहता है, तो उसे केवल आपके मोबाइल नंबर की जरूरत होती है। यदि आपको किसी भी माध्यम से ऐसा कोई संदिग्ध पेमेंट अनुरोध प्राप्त होता है, तो उस पर कतई प्रतिक्रिया न दें। ऐसे फर्जी अनुरोधों को सीधे फोनपे ऐप के जरिए रिपोर्ट करना चाहिए ताकि समय रहते उचित कदम उठाया जा सके।

## दुकानों और ऑनलाइन खरीदारी में ध्यान रखने योग्य सुरक्षा सावधानियां
खरीदारी करते समय वित्तीय नुकसान से बचने के लिए कुछ बुनियादी सुरक्षा आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद जब पेमेंट स्क्रीन सामने आए, तो यूपीआई पिन दर्ज करने से पहले स्क्रीन पर दिखने वाले प्राप्तकर्ता के नाम और भुगतान की राशि की दोबारा जांच अवश्य करें। विशेष रूप से दुकानों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते समय इस बात की पुष्टि कर लें कि नाम उसी दुकान या व्यापारी का है।

इंटरनेट ब्राउजिंग के दौरान हानिकारक विज्ञापनों और भ्रामक मैसेज से बचने के लिए अपने ब्राउज़र में एक भरोसेमंद पॉप-अप ब्लॉकर सक्रिय रखना चाहिए। यदि स्क्रीन पर अचानक कोई अप्रत्याशित पॉप-अप दिखाई दे, तो उसमें दी गई किसी भी तस्वीर या लिंक पर तब तक बिल्कुल क्लिक न करें जब तक कि उसके स्रोत की पूरी तरह पुष्टि न हो जाए।

इसके अलावा, अपने भुगतान और पहचान से जुड़े संवेदनशील विवरणों को सुरक्षित रखने के लिए हमेशा जाने-माने और प्रतिष्ठित विक्रेताओं से ही खरीदारी करनी चाहिए। किसी भी ऐसे संदेश या फोन कॉल से बेहद सतर्क रहें जिसमें तत्काल फैसला लेने का दबाव बनाया जा रहा हो या बहुत कम समय के लिए बंपर ऑफर देने का दावा किया जा रहा हो। अत्यधिक दबाव वाले दावों या टिक-टिक करती उल्टी गिनती वाले ऑफर्स को खतरे की पहली घंटी मानें और कोई भी कदम उठाने से पहले स्वतंत्र रूप से उनकी सत्यता की जांच करें।

## सुरक्षा का मजबूत ढांचा और इनबिल्ट फीचर्स
ग्राहकों के लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिए फोनपे प्रोटेक्ट फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। यह सुरक्षा ढांचा संभावित रूप से जोखिम भरे लेन-देन की पहचान करने और भुगतान प्रक्रिया के दौरान ही उपभोक्ता को चेतावनी देने का काम करता है। यह सिस्टम संदर्भ के आधार पर चेतावनी संदेश प्रदर्शित करता है, उपयोगकर्ताओं को यह पुष्टि करने की अनुमति देता है कि क्या उन्होंने वास्तव में भुगतान को अधिकृत किया है, और धोखाधड़ी की पहचान प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए फीडबैक का उपयोग करता है।

इसके साथ ही प्लेटफॉर्म कई स्तरों पर सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करता है। इनमें केवाईसी जांच, बायोमेट्रिक सत्यापन, दस्तावेजों का प्रमाणीकरण और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन शामिल हैं। प्रणाली में बिहेवियरल बायोमेट्रिक्स का भी सहारा लिया जाता है, जो डिवाइस की विशेषताओं और उपयोगकर्ता की गतिविधियों के पैटर्न का गहराई से विश्लेषण करती है। यह तकनीक किसी भी असामान्य या संदिग्ध व्यवहार को तत्काल पहचानने में मदद करती है।

## धोखाधड़ी की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने के आधिकारिक रास्ते
यदि किसी उपयोगकर्ता को किसी लेन-देन में धोखाधड़ी का अंदेशा होता है, तो उसे बिना किसी देरी के फोनपे ऐप के हेल्प सेक्शन में जाकर तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही ग्राहक सहायता टीम या प्लेटफॉर्म के शिकायत निवारण चैनल से संपर्क साधना चाहिए।

वित्तीय साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। पीड़ित व्यक्ति को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर जाकर तुरंत घटना की सूचना दर्ज करनी चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करके भी मामले की जानकारी दी जा सकती है ताकि समय रहते वित्तीय नुकसान को रोकने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके। संदिग्ध फोन कॉल और भ्रामक संदेशों की रिपोर्टिंग के लिए संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध चक्षु सुविधा का उपयोग किया जा सकता है।

ग्राहकों को अपनी बैंकिंग सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग रहना चाहिए। कभी भी रिफंड, कैशबैक या त्योहारी इनाम का दावा करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना यूपीआई पिन, पासवर्ड या वन-टाइम पासवर्ड साझा न करें। यूपीआई के जरिए पैसे प्राप्त करने के लिए किसी पिन की आवश्यकता नहीं होती, यह बात प्रत्येक डिजिटल यूजर को अपने ध्यान में रखनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में खरीदारी करते समय छोटी सी लापरवाही भी आपके बैंक खाते में मौजूद पूरी रकम खाली कर सकती है।

- **सभी डिजिटल उपभोक्ताओं के लिए:** किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करते समय स्क्रीन पर दिखने वाले व्यापारी के नाम और रकम की पुष्टि करने के बाद ही भुगतान करें। कभी भी पैसे प्राप्त करने के लिए अपना यूपीआई पिन दर्ज न करें क्योंकि ऐसा करते ही आपके खाते से रकम कट जाएगी।
- **दुकानों से खरीदारी करने वालों के लिए:** काउंटर पर रखे क्यूआर कोड स्टिकर को ध्यान से देखें कि कहीं उसके ऊपर दूसरा स्टिकर तो नहीं चिपकाया गया है। किसी भी तरह का संदेह होने पर तुरंत दुकानदार से सही नाम पूछकर सत्यापन करें।
- **मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने वालों के लिए:** व्हाट्सएप या अन्य मैसेज पर आए मुफ्त कैशबैक, दीवाली बोनस या गिफ्ट हैंपर वाले क्यूआर कोड को कभी स्कैन न करें। इस तरह के प्रलोभन देने वाले नंबरों को तुरंत ब्लॉक करें और रिपोर्ट दर्ज कराएं।
- **धोखाधड़ी के शिकार होने पर:** पैसे कटने की स्थिति में बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। त्वरित शिकायत करने से संदिग्ध बैंक खातों में पैसे का ट्रांसफर रुकने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

## ऐसा क्यों हुआ
त्योहारी सीजन के दौरान डिजिटल लेन-देन में भारी उछाल आता है, जिसका फायदा उठाकर जालसाज जल्दबाजी में मौजूद ग्राहकों को फंसाने के लिए नए हथकंडे अपनाते हैं।

- **सीधा कारण:** जालसाज असली दुकानों के मर्चेंट कोड पर अपने फर्जी स्टिकर चिपका देते हैं या फिर कैशबैक और बोनस के नाम पर लोगों से कोड स्कैन करवाकर पिन दर्ज करा लेते हैं। लोग यह समझ नहीं पाते कि पिन दर्ज करने से पैसा आता नहीं बल्कि खाते से कट जाता है।
- **त्योहारी आपाधापी की परिस्थितियां:** दीवाली के समय बाजारों में भारी भीड़ होती है और लोग फटाफट पेमेंट निपटाने के चक्कर में स्क्रीन पर दिखने वाले नाम की जांच करना छोड़ देते हैं। इसी लापरवाही और लालच का फायदा उठाकर साइबर ठग फर्जी संदेश और कोड प्रसारित करते हैं।
- **आगे की सुरक्षा व्यवस्था:** पेमेंट प्लेटफॉर्म सुरक्षा जांच और चेतावनी प्रणाली को मजबूत कर रहे हैं, जबकि साइबर एजेंसियां हेल्पलाइन 1930 और पोर्टल के जरिए त्वरित शिकायतों पर खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया अपनाती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या यूपीआई के जरिए पैसे प्राप्त करने के लिए कभी यूपीआई पिन दर्ज करने की जरूरत होती है?
नहीं, पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी यूपीआई पिन दर्ज करने या पे बटन दबाने की आवश्यकता नहीं होती है। केवल पैसे भेजने के लिए ही पिन दर्ज करना होता है।

### 2. दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करते समय सबसे बड़ा खतरा क्या होता है?
दुकानों पर जालसाज असली मर्चेंट कोड के ऊपर अपना फर्जी स्टिकर चिपका देते हैं। इससे भुगतान दुकानदार को मिलने के बजाय सीधे जालसाज के खाते में चला जाता है।

### 3. फोनपे प्रोटेक्ट फीचर किस तरह से धोखाधड़ी को रोकता है?
यह सिस्टम जोखिम भरे लेन-देन की पहचान करके भुगतान के दौरान संदर्भ आधारित चेतावनी जारी करता है और उपयोगकर्ता से भुगतान की पुष्टि कराता है।

### 4. साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत किन नंबरों या वेबसाइट पर संपर्क करना चाहिए?
पीड़ित को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करना चाहिए या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

### 5. संदिग्ध कॉल और संदेशों की रिपोर्ट करने के लिए किस सरकारी पोर्टल का उपयोग किया जाता है?
संदिग्ध फोन कॉल और संदेशों की सूचना संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध चक्षु सुविधा के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

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